Coronavirus : रद्द हो सकता है IPL, BCCI ने फ्रेंचाइजी मालिकों के साथ कांफ्रेंस काल स्थगित किया

Author : Rajneesh Anand Published by : Prabhat Khabar Updated At : 24 Mar 2020 1:26 PM

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coronavirus के कारण पहले ही से 15 अप्रैल तक निलंबित आईपीएल को लेकर अनिश्चितता बढती जा रही है चूंकि बीसीसीआई ने फ्रेंचाइजी मालिकों के साथ निर्धारित कांफ्रेंस कॉल स्थगित कर दिया. कोविड 19 के चलते इस लुभावनी लीग के रद्द होने का खतरा भी मंडरा रहा है.

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नयी दिल्ली : पहले ही से 15 अप्रैल तक निलंबित आईपीएल को लेकर अनिश्चितता बढती जा रही है चूंकि बीसीसीआई ने फ्रेंचाइजी मालिकों के साथ निर्धारित कांफ्रेंस कॉल स्थगित कर दिया. कोविड 19 के चलते इस लुभावनी लीग के रद्द होने का खतरा भी मंडरा रहा है.

दुनिया भर में कोरोना वायरस संक्रमण से 16000 से ज्यादा मौते हो चुकी है जबकि भारत में 400 मामले सामने आये हैं और नौ लोग मारे जा चुके हैं. किंग्स इलेवन पंजाब टीम के सह मालिक नेस वाडिया ने कहा ,‘‘ सबसे पहले इंसानियत है. सब कुछ उसके बाद. अगर हालात नहीं सुधरते हैं तो इस बारे में बात करने का भी कोई फायदा नहीं. आईपीएल नहीं होता है तो यही सही. ” एक अन्य फ्रेंचाइजी के मालिक ने कहा ,‘‘ इस समय कुछ भी बात करने का फायदा नहीं है.

पूरे देश में लॉकडाउन है. हमारे सामने आईपीएल से भी अहम मसले हैं. ” आठ टीमों की यह लीग 29 मार्च से शुरू होनी थी जिसे 15 अप्रैल तक टाल दिया गया. वाडिया ने कहा ,‘‘मैं इस समय आईपीएल के बारे में सोच भी नहीं सकता. यह अप्रासंगिक हो गया है. सबसे जरूरी इस समय के हालात है. यह तीसरे विश्व युद्ध जैसी स्थिति है जिसमें हम इतने सारे लोगों की मदद के लिए लड़ रहे हैं. ”

उन्होंने कहा ,‘‘सरकार ने कुछ ठोस कदम उठाये हैं. हम अक्सर सरकार की आलोचना करते हैं लेकिन अच्छे कदमों की तारीफ होनी चाहिए भारत जैसे बड़े देश में सारी उड़ाने रद्द कर दी गईहै. यह बहुत बड़ा और सकारात्मक कदम है.” एक बीसीसीआई अधिकारी ने कहा ,‘‘ अगर ओलंपिक एक साल के लिए स्थगित हो सकते हैं तो आईपीएल क्यो नहीं. ऐसे में आईपीएल का आयोजन कर पाना काफी मुश्किल है. सरकार इस समय विदेशियों को वीजा देने की सोच भी नहीं रही है.”

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लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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