एक दूसरे का सम्मान करते हैं धौनी और कोहली : रवि शास्त्री
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 05 Apr 2015 3:50 PM
अधिकांश लोगों को लगा था कि भारत जीत सकता है. यह टीम 300 से अधिक का स्कोर बना सकती थी. गेंदबाजों ने कोई कसर नहीं छोड़ रखी थी. फील्डर भी दस रन आउट करने में सक्षम थे. रुकिये. क्या यह वही टीम नहीं है जो टेस्ट और त्रिकोणीय श्रृंखला में हार गई थी. जो पिछले […]
अधिकांश लोगों को लगा था कि भारत जीत सकता है. यह टीम 300 से अधिक का स्कोर बना सकती थी. गेंदबाजों ने कोई कसर नहीं छोड़ रखी थी. फील्डर भी दस रन आउट करने में सक्षम थे. रुकिये. क्या यह वही टीम नहीं है जो टेस्ट और त्रिकोणीय श्रृंखला में हार गई थी. जो पिछले छह महीने से दौरे पर थी. जो अपने टेस्ट कप्तान के बिना थी. इसमें कोई भी खिलाड़ी ऐसा नहीं था जो 50 टेस्ट से ज्यादा खेला हो. इस पर इंग्लैंड दौरे के जख्म थे. खैर छोडो. ये दो टीमें नहीं थी. एक जो सब कुछ हार चुकी थी और दूसरी जिसने सब कुछ जीता था.
इनके मानदंड दूसरे थे. ये ऑस्ट्रेलिया को ईंट का जवाब पत्थर से देना चाहते थे. यह टीम पीछे की ओर कदम नहीं उठाना चाहती थी. कौशल में बेहतर थी और मानसिक रुप से भी. दर रोज आपसी तालमेल बेहतर हो रहा था. यही वजह है कि सिडनी में उतरी टीम को आपका समर्थन हासिल था. आपको लगा कि ये खिताब फिर जीतेगी. टीम को भी खुद पर भरोसा था. मेरी नजर में ऑस्ट्रेलिया का यह दौरा निस्संदेह सफल रहा. मैं निष्पक्ष होकर बोल रहा हूं. माइक्रोफोन के पीछे भी मैं ऐसा ही कहता.
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