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Shattila Ekadashi 2026: षटतिला एकादशी का धार्मिक महत्व, तिल दान से कैसे मिलती है विष्णु कृपा

Updated at : 08 Jan 2026 8:56 AM (IST)
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Shattila Ekadashi 2026 religious significance

षटतिला एकादशी 2026 का धार्मिक महत्व

Shattila Ekadashi 2026: षटतिला एकादशी 2026 माघ कृष्ण पक्ष की विशेष एकादशी है, जिसमें तिल से जुड़े उपाय और भगवान विष्णु की पूजा का बड़ा महत्व होता है. जानें व्रत तिथि, शुभ समय और धार्मिक महत्व.

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Shattila Ekadashi 2026: षटतिला एकादशी 2026 माघ कृष्ण पक्ष की विशेष एकादशी है, जो भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है. इस दिन तिल दान, व्रत और पूजा से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है. हिंदू पंचांग में प्रत्येक एकादशी का अपना अलग आध्यात्मिक महत्व होता है, लेकिन माघ मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली षटतिला एकादशी का स्थान विशेष माना गया है. यह एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है और जनवरी माह में श्रद्धा, व्रत और दान के साथ मनाई जाती है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन किया गया उपवास और दान कई गुना पुण्य फल प्रदान करता है. खास बात यह है कि इस एकादशी में तिल (Sesame Seeds) का प्रयोग अत्यंत शुभ और फलदायक माना गया है.

नाम में छिपा है रहस्य: षटतिला एकादशी क्यों कहलाती है?

षटतिला एकादशी का नाम ही इसके महत्व को स्पष्ट करता है. ‘षट’ का अर्थ है छह और ‘तिला’ का अर्थ है तिल. शास्त्रों के अनुसार, इस दिन तिल का छह अलग-अलग तरीकों से उपयोग करना अत्यंत शुभ माना गया है. तिल भगवान विष्णु को प्रिय है और इसके दान, सेवन व पूजा से जीवन की नकारात्मकता, दरिद्रता और पापों का नाश होता है. माना जाता है कि तिल के माध्यम से की गई पूजा व्यक्ति के जीवन में सुख, समृद्धि और मानसिक शांति का संचार करती है.

तिल के छह उपयोग: जानिए कौन-से उपाय माने जाते हैं शुभ

तिल दान करने से पाप नष्ट होते हैं.

क्यों करें: शास्त्रों में तिल को पवित्र माना गया है, जो मानसिक और कर्मिक शुद्धि देता है.

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार षटतिला एकादशी पर तिल का उपयोग इन छह रूपों में किया जाता है—

  • तिल से स्नान
  • तिल का उबटन
  • तिल से हवन
  • तिल का दान
  • तिल का सेवन

तिल से बने पकवानों का भोग

इन उपायों से व्यक्ति को आध्यात्मिक शुद्धि प्राप्त होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.

षटतिला एकादशी व्रत विधि: कैसे करें भगवान विष्णु को प्रसन्न?

इस दिन भक्त निर्जल या फलाहार व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा करते हैं. प्रातः स्नान के बाद पीले वस्त्र धारण कर विष्णु सहस्रनाम या एकादशी व्रत कथा का पाठ किया जाता है. पूजा में विशेष रूप से तिल से बने व्यंजन, तिल का तेल और तिल के लड्डू भगवान को अर्पित किए जाते हैं. साथ ही जरूरतमंदों को तिल का दान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है. यह व्रत मन, वाणी और कर्म—तीनों की शुद्धि का प्रतीक माना जाता है.

षटतिला एकादशी 2026 की तिथि और पारण समय

  • षटतिला एकादशी 2026 की तिथि और पारण समय
  • षटतिला एकादशी तिथि: 14 जनवरी 2026 (बुधवार)
  • एकादशी आरंभ: 13 जनवरी 2026, दोपहर 3:17 बजे
  • एकादशी समाप्त: 14 जनवरी 2026, शाम 5:52 बजे
  • पारण समय: 15 जनवरी 2026, सुबह 7:15 से 9:21 बजे

व्रत का पारण शुभ समय में करना अत्यंत आवश्यक माना गया है.

ये भी पढ़ें: इस दिन है षटतिला एकादशी, जानें भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के उपाय

षटतिला एकादशी का आध्यात्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, षटतिला एकादशी का व्रत करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है. यह व्रत जीवन से दुःख, दरिद्रता और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है. साथ ही पापों के नाश और सुख-समृद्धि की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है. शास्त्रों में उल्लेख है कि इस एकादशी के प्रभाव से भक्त का मन शुद्ध होता है और उसे आध्यात्मिक उन्नति की ओर ले जाता है, जिससे विष्णु लोक की प्राप्ति का मार्ग भी खुलता है.

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षटतिला एकादशी पर तिल का उपयोग क्यों किया जाता है?

धार्मिक मान्यता के अनुसार तिल भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है. तिल का दान, सेवन और पूजा करने से पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है.

षटतिला एकादशी का व्रत कैसे किया जाता है?

इस दिन भक्त निर्जल या फलाहार व्रत रखते हैं, भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और तिल से बने पदार्थों का भोग अर्पित करते हैं. जरूरतमंदों को तिल दान करना विशेष फलदायी माना जाता है.

षटतिला एकादशी 2026 का पारण कब करें?

षटतिला एकादशी का व्रत 14 जनवरी 2026 को रखा जाएगा और पारण 15 जनवरी 2026 को सुबह 7:15 बजे से 9:21 बजे के बीच शुभ माना गया है.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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