सूर्य और शनि-मंगल योग के प्रभाव से सम्राट को मिला मुख्यमंत्री पद, केतु ने सत्ता की राह को बनाया आसान

Published by :Radheshyam Kushwaha
Published at :14 Apr 2026 6:11 PM (IST)
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Samrat Choudhary kundali

सम्राट चौधरी की कुंडली में राजयोग

Samrat Chaudhary: सम्राट चौधरी को सीएम पद तक पहुंचाने में उच्च के सूर्य का प्रभाव, शनि-मंगल का संघर्षयोग और गुरु की अनुकूल दृष्टि अहम रही. राहु-चंद्रमा ने अचानक राजनीतिक अवसर दिए, जबकि केतु मूलांक ने रणनीतिक सोच दी, इन ग्रहों के संयोजन ने सही समय पर सत्ता का मार्ग प्रशस्त किया.

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Samrat Choudhary Rajyog: सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर बदलाव, संघर्ष और अवसरों का प्रतीक रहा है. कभी लालू प्रसाद यादव के साथ राजनीति करने वाले सम्राट चौधरी आज नरेंद्र मोदी और अमित शाह के भरोसेमंद नेता बनकर उभरे हैं. बीजेपी विधायक दल का नेता चुना जाना उनके लिए एक बड़े राजनीतिक उत्कर्ष का संकेत है. ज्योतिषीय दृष्टि से भी वर्तमान ग्रह स्थिति उन्हें अवसर तो दे रही है, लेकिन चुनौतियों से भरा मार्ग भी दिखाती है. आइए जानते हैं ज्योतिषाचार्य श्रीपति त्रिपाठी जी से सम्राट चौधरी के ज्योतिषीय विश्लेषण और उनके राजयोग के बारे में विस्तार से…

सम्राट चौधरी के बारे में मुख्य बातें

  • सम्राट चौधरी का जन्म: 16 नवंबर 1968
  • बचपन का नाम: राकेश कुमार
  • पिता का नाम: शकुनी चौधरी
  • माता का नाम: पार्वती देवी
  • पत्नी का नाम: ममता कुमारी 
  • जाति: कोइरी कुशवाहा
  • राजनीति में सक्रिय: 1990
  • सम्राट चौधरी बिहार के 24वें मुख्यमंत्री

​सम्राट चौधरी का मुलांक -7

​सम्राट चौधरी का जन्म 16 नवंबर 1968 को हुआ है. अंक ज्योतिष के अनुसार उनका मूलांक 7 (1+6) है, जिसका स्वामी केतु है. केतु जातक को गहरा विचारक, रणनीतिकार और अचानक सफलता दिलाने वाला ग्रह माना जाता है. वहीं उनकी सूर्य राशि वृश्चिक है, जो दृढ़ इच्छाशक्ति और विपरीत परिस्थितियों में भी हार न मानने वाले जुझारू व्यक्तित्व को दर्शाती है.

‘सूर्य का मेष में प्रवेश’ और राजसत्ता

​आज 14 अप्रैल के दिन सबसे महत्वपूर्ण घटना सूर्य का मीन राशि से निकलकर अपनी उच्च राशि मेष में प्रवेश करना है. ज्योतिष में सूर्य को ‘राजा’ और ‘सत्ता’ का कारक माना जाता है.

​उच्च के सूर्य का प्रभाव

कुंडली में जब सूर्य उच्च का होता है, तो वह प्रशासनिक पदों पर बैठे व्यक्तियों या उन पदों की ओर अग्रसर लोगों को प्रचंड ऊर्जा और अधिकार प्रदान करता है. सम्राट चौधरी के लिए सूर्य का यह गोचर उनके राजनीतिक जीवन का स्वर्णिम काल सिद्ध हो सकता है.

ग्रहों की युति और चुनौतीपूर्ण समीकरण

​वर्तमान में मीन राशि में मंगल, बुध और शनि की युति बनी हुई है. मेष राशि में शुक्र और सूर्य की युति हैं. वहीं कुंभ राशि में राहु के साथ चंद्रमा मौजूद हैं. सिंह राशि में केतु है. मिथुन राशि में देव गुरु बृहस्पति हैं.

​मीन राशि में शनि-मंगल योग

मीन राशि में यह युति संघर्ष के बाद बड़ी जीत का संकेत देती है. चूंकि मंगल साहस का प्रतीक है और शनि अनुशासन व जनता का, इसलिए इनका साथ होना यह दर्शाता है कि उन्हें संगठन और आम जनता का भारी समर्थन प्राप्त होगा.

​चंद्रमा और राहु की स्थिति

चंद्रमा वर्तमान में कुंभ राशि में राहु के साथ हैं. यह ‘ग्रहण दोष’ जैसी स्थिति पैदा करता है, जो दर्शाता है कि राह इतनी आसान नहीं होगी. उन्हें गुप्त शत्रुओं और राजनीतिक षड्यंत्रों से सावधान रहने की आवश्यकता होगी, लेकिन राहु का साथ कभी-कभी अचानक और अप्रत्याशित राजनैतिक लाभ भी दिलाता है.

नामाक्षर ‘राकेश’ और ‘सम्राट’ का प्रभाव

​उनका बचपन का नाम राकेश है (राशि – तुला, स्वामी – शुक्र). वर्तमान में शुक्र मेष राशि में सूर्य के साथ विराजमान हैं. शुक्र और सूर्य की यह स्थिति लोकप्रियता में वृद्धि करती है.

​नाम का बल

‘सम्राट’ नाम अपने आप में प्रभुत्व और शासन का प्रतीक है. जब व्यक्ति अपने कर्मों से नाम की सार्थकता सिद्ध करता है, तो ग्रहों की अनुकूलता और बढ़ जाती है.

देव गुरु बृहस्पति का संरक्षण

​गुरु वर्तमान में मिथुन राशि में स्थित हैं. मिथुन वायु तत्व की राशि है और यहां से गुरु की दृष्टि महत्वपूर्ण भावों पर पड़ रही है. गुरु का यह गोचर उन्हें सही निर्णय लेने की क्षमता और सलाहकार परिषद् से उचित सहयोग दिलाने में सहायक होगा.

आने वाला समय

​ग्रहों की वर्तमान स्थिति–विशेषकर सूर्य का मेष में गोचर और मंगल-शनि की युति–यह स्पष्ट करती है कि सम्राट चौधरी के लिए यह समय “सिंहासनारूढ़” होने के लिए अत्यंत उपयुक्त है.

चंद्रमा और राहु की युति का प्रभाव

चंद्रमा और राहु की कुंभ राशि में युति मानसिक तनाव दे सकती है. इस अवधि में उन्हें निर्णय लेते समय धैर्य और कूटनीति का संतुलन बनाए रखना होगा. सूर्य की मेष राशि में उपस्थिति उन्हें एक प्रखर और ओजस्वी मुख्यमंत्री के रूप में स्थापित करने की क्षमता रखती है.

सौर नववर्ष और मेष संक्रांति का प्रभाव

​विशेष: 14 अप्रैल का दिन भारतीय कैलेंडर में सौर नववर्ष और मेष संक्रांति का प्रतीक है, जो नए युग के आरंभ का सूचक है. राजनीति के पटल पर यह गोचर बिहार में एक नई कार्य सुबह लेकर आया है. आने वाले समय में ग्रह दशा अंकित कर रहे हैं कि सम्राट चौधरी के लिए समय इतना आसान नहीं होगा.

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Radheshyam Kushwaha

लेखक के बारे में

By Radheshyam Kushwaha

पत्रकारिता की क्षेत्र में 13 साल का अनुभव है. इस सफर की शुरुआत राज एक्सप्रेस न्यूज पेपर भोपाल से की. यहां से आगे बढ़ते हुए समय जगत, राजस्थान पत्रिका, हिंदुस्तान न्यूज पेपर के बाद वर्तमान में प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में धर्म अध्यात्म एवं राशिफल डेस्क पर कार्यरत हैं. ज्योतिष शास्त्र, व्रत त्योहार, राशिफल के आलावा राजनीति, अपराध और पॉजिटिव खबरों को लिखने में रुचि हैं.

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