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Mahabharata Vidur Niti: महाभारत का रहस्य, इन 6 आदतों से घटाती है आयु

Updated at : 03 Jan 2026 2:32 PM (IST)
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Mahabharata Vidur Niti

विदुर नीति: जीवन को काटने वाली छह अदृश्य तलवारें

Mahabharata Vidur Niti: महाभारत में विदुर नीति मनुष्य के जीवन से जुड़े गहरे रहस्यों को उजागर करती है. अभिमान, क्रोध और स्वार्थ जैसे दोष कैसे आयु को धीरे-धीरे नष्ट करते हैं, इसका स्पष्ट वर्णन मिलता है.

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Mahabharata Vidur Niti: महाभारत में एक अत्यंत विचारोत्तेजक प्रसंग मिलता है, जहां राजा धृतराष्ट्र महात्मा विदुर से यह प्रश्न करते हैं कि जब शास्त्रों में मनुष्य की आयु सौ वर्ष बताई गई है, तो अधिकांश लोग पूर्ण आयु क्यों नहीं जी पाते. इस पर विदुरजी मनुष्य के जीवन को क्षीण करने वाले छह गंभीर दोषों का उल्लेख करते हैं. विदुर स्वयं यमराज के अंशावतार माने जाते हैं, इसलिए उनके वचन जीवन और मृत्यु के गूढ़ रहस्यों को उजागर करते हैं.

विदुर का उत्तर: आयु को काटने वाली छह तलवारें

विदुरजी कहते हैं कि कुछ दोष ऐसे हैं जो तलवार की तरह मनुष्य के जीवन को काटते हैं. ये दोष बाहरी नहीं, बल्कि हमारे भीतर जन्म लेते हैं और धीरे-धीरे जीवन शक्ति को क्षीण कर देते हैं.

अभिमान: स्वयं को सबसे ऊपर समझना

अभिमान अर्थात घमंड, मनुष्य को अंधा बना देता है. ऊंचे पद, प्रशंसा और शक्ति मिलने पर व्यक्ति दूसरों को तुच्छ समझने लगता है. ऐसा व्यक्ति अनजाने में शत्रु बना लेता है और अंततः उसका घमंड ही उसके पतन का कारण बनता है.

अधिक बोलना: वाणी पर संयम का अभाव

जो व्यक्ति आवश्यकता से अधिक बोलता है, वह सत्य और मर्यादा दोनों से भटक जाता है. असंयमित वाणी से विवाद, अपमान और वैमनस्य जन्म लेता है. ऐसे लोग न तो विद्वानों को प्रिय होते हैं और न ही समाज में सम्मान पाते हैं.

क्रोध: सबसे बड़ा शत्रु

क्रोध को शास्त्रों में नरक का द्वार कहा गया है. क्रोधित व्यक्ति सही–गलत का विवेक खो देता है और ऐसे कर्म कर बैठता है जिनका परिणाम विनाशकारी होता है. जिसने क्रोध पर विजय पा ली, वही सच्चा सुखी और योगी कहलाता है.

त्याग का अभाव: संग्रह की भूख

रावण और दुर्योधन जैसे पात्रों का पतन त्याग की कमी के कारण हुआ. सांसारिक भोग मनुष्य की आयु को क्षीण करते हैं, जबकि त्याग जीवन को विस्तार देता है. जो केवल लेना जानता है, उसका जीवन शीघ्र सिमट जाता है.

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स्वार्थ: अधर्म की जड़

स्वार्थ और लालच ही अधिकांश संघर्षों और युद्धों की जड़ हैं. स्वार्थी व्यक्ति अपने लाभ के लिए किसी भी सीमा तक जा सकता है. ऐसा मनुष्य भीतर से अशांत रहता है और उसकी आयु भी घटती जाती है.

मित्रद्रोह: विश्वास का विनाश

मित्रों का साथ जीवन की सबसे बड़ी शक्ति होता है. जो अपने मित्रों से विश्वासघात करता है, उसका जीवन भय और अकेलेपन से भर जाता है. मित्रद्रोही व्यक्ति के लिए जीवन स्वयं नरक बन जाता है.

दोष आपस में जुड़े हैं

महात्मा विदुर के बताए ये छह दोष एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं. अभिमान से क्रोध, क्रोध से स्वार्थ और स्वार्थ से मित्रद्रोह जन्म लेता है. यदि मनुष्य इन दोषों से स्वयं को बचा ले, तो न केवल उसकी आयु बढ़ती है, बल्कि जीवन भी सार्थक बनता है.

डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और लोक विश्वासों पर आधारित है.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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