ग्रहण के दिन होलिका दहन शुभ है या अशुभ? जानें पौराणिक मान्यता
Published by : Shaurya Punj Updated At : 28 Feb 2026 1:06 PM
होलिका दहन के दिन चंद्रग्रहण शुभ या अशुभ
Chandra Grahan on Holika Dahan: आने वाले 3 मार्च 2026 को चंद्र ग्रहण के दिन होलिका दहन कब करें? जानें ग्रहण का सही समय, शुभ मुहूर्त, क्या करें और किन कार्यों से बिल्कुल बचें.
Chandra Grahan 2026: फाल्गुन पूर्णिमा के दिन होलिका दहन का पर्व मनाया जाता है. यह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है. लेकिन जब इसी दिन चंद्र ग्रहण भी लग जाए, तो लोगों के मन में सवाल उठता है कि ऐसे समय में होलिका दहन करना शुभ है या अशुभ? धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहण काल को संवेदनशील और अशुभ समय माना जाता है. इसलिए इस दौरान किसी भी प्रकार का शुभ या मांगलिक कार्य करने की मनाही होती है. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि ग्रहण के दिन होलिका दहन कैसे करें और किन बातों का ध्यान रखें.
चंद्र ग्रहण का समय और सूतक काल: क्या रखें सावधानी?
चंद्र ग्रहण मंगलवार को दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से शुरू होगा और शाम 6 बजकर 47 मिनट पर समाप्त होगा. यानी यह ग्रहण कुल 3 घंटे 27 मिनट तक रहेगा. इस दौरान धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुछ नियमों का पालन करना जरूरी होता है. ग्रहण के समय वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ने की बात कही जाती है, इसलिए इस समय सावधानी बरतना आवश्यक माना जाता है.
सूतक काल कब से शुरू होगा?
चंद्र ग्रहण से लगभग 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है. 3 मार्च को सुबह 6 बजकर 20 मिनट से सूतक काल प्रारंभ हो जाएगा. सूतक काल के दौरान कोई भी शुभ या मांगलिक कार्य नहीं किया जाता. विवाह, पूजा, हवन, गृह प्रवेश जैसे धार्मिक कार्य इस समय वर्जित माने जाते हैं. मंदिरों के कपाट भी सूतक लगते ही बंद कर दिए जाते हैं.
ग्रहण के समय होलिका दहन क्यों नहीं?
चंद्र ग्रहण के दौरान राहु और केतु का प्रभाव बढ़ जाता है. शास्त्रों में कहा गया है कि इस समय वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा सक्रिय रहती है. इसलिए ग्रहण काल में पूजा-पाठ, हवन, विवाह या अन्य शुभ कार्य नहीं किए जाते.
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होलिका दहन एक धार्मिक अनुष्ठान है, इसलिए इसे चंद्र ग्रहण के दौरान करना अशुभ माना जाता है. यदि ग्रहण और होलिका दहन एक ही दिन हों, तो पहले ग्रहण समाप्त होने का इंतजार करना चाहिए.
तो क्या ग्रहण के दिन होलिका दहन किया जा सकता है?
हां, किया जा सकता है — लेकिन ग्रहण समाप्त होने के बाद. यदि ग्रहण शाम तक चलता है, तो उसके खत्म होने के बाद स्नान करके, शुद्ध वस्त्र पहनकर और घर में गंगाजल का छिड़काव कर होलिका दहन करना चाहिए. ध्यान रखें कि चंद्र ग्रहण के दौरान या सूतक काल में होलिका जलाना उचित नहीं है. ग्रहण समाप्ति के बाद ही शुभ मुहूर्त में दहन करना शास्त्रसम्मत माना जाता है.
ग्रहण के दिन क्या करें?
ग्रहण का समय भले ही शुभ कार्यों के लिए उचित न हो, लेकिन आध्यात्मिक साधना के लिए इसे अच्छा माना गया है.
- भगवान शिव या विष्णु जी के मंत्रों का जाप करें.
- “ॐ नमः शिवाय” या “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का मानसिक जप करें.
- ध्यान और प्रार्थना करें.
- ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान अवश्य करें.
- जरूरतमंद लोगों को दान दें.
- होलिका दहन से पहले विधि-विधान से पूजा करें और फिर अग्नि प्रज्वलित करें.
- इन उपायों से ग्रहण का नकारात्मक प्रभाव कम होता है.
ग्रहण के दिन क्या ना करें?
- ग्रहण के दौरान होलिका दहन न करें.
- कोई भी शुभ या मांगलिक कार्य न करें.
- भोजन पकाने और खाने से बचें.
- मंदिर की मूर्तियों को स्पर्श न करें.
- गर्भवती महिलाएं विशेष सावधानी रखें और नुकीली वस्तुओं का उपयोग न करें.
- शास्त्रों में कहा गया है कि ग्रहण के समय नियमों का पालन करने से ही दोष से बचाव संभव है.
धार्मिक दृष्टि से क्या सही है?
धार्मिक दृष्टि से ग्रहण के दिन होलिका दहन स्वयं में अशुभ नहीं है, लेकिन ग्रहण के समय इसे करना अशुभ माना जाता है. इसलिए सही तरीका यही है कि ग्रहण समाप्त होने के बाद ही होलिका दहन किया जाए. होलिका दहन का उद्देश्य नकारात्मकता को जलाकर सकारात्मकता का स्वागत करना है. इसलिए शुद्ध मन, श्रद्धा और सही समय का ध्यान रखना जरूरी है.
ग्रहण के दिन होलिका दहन करना पूरी तरह अशुभ नहीं है, लेकिन ग्रहण काल में इसे करना उचित नहीं माना जाता. पहले ग्रहण समाप्त होने दें, फिर स्नान और शुद्धि के बाद शुभ मुहूर्त में होलिका दहन करें. नियमों का पालन करने से त्योहार का धार्मिक महत्व भी बना रहेगा और किसी प्रकार का दोष भी नहीं लगेगा.
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By Shaurya Punj
शौर्य पुंज डिजिटल मीडिया में पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर हैं. उन्हें न्यूज वर्ल्ड में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. शौर्य खबरों की नब्ज को समझकर उसे आसान और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. साल 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांसिंग की. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में दो महीने की इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन के लिए कार्य करना शुरू किया. उस समय उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस बिजनेस और एंटरटेनमेंट गॉसिप जैसी खबरों पर काम किया. साल 2020 में कोरोना काल के दौरान उन्हें लाइफस्टाइल, धर्म-कर्म, एजुकेशन और हेल्थ जैसे नॉन-न्यूज सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. उन्होंने लाइफस्टाइल कैटेगरी के कई महत्वपूर्ण सेक्शनों में योगदान दिया. Health & Fitness सेक्शन में डाइट, योग, वेट लॉस, मानसिक स्वास्थ्य और फिटनेस टिप्स से जुड़े उपयोगी कंटेंट पर कार्य किया. Beauty & Fashion सेक्शन में स्किन केयर, हेयर केयर, मेकअप और ट्रेंडिंग फैशन विषयों पर लेख तैयार किए. Relationship & Family कैटेगरी में पति-पत्नी संबंध, डेटिंग, पैरेंटिंग और दोस्ती जैसे विषयों पर जानकारीपूर्ण कंटेंट लिखा. Food & Recipes सेक्शन में हेल्दी फूड, रेसिपी और किचन टिप्स से संबंधित सामग्री विकसित की. Travel सेक्शन के लिए घूमने की जगहों, बजट ट्रिप और ट्रैवल टिप्स पर लेखन किया. Astrology / Vastu में राशिफल, वास्तु टिप्स और ज्योतिष आधारित कंटेंट पर काम किया. Career & Motivation सेक्शन में सेल्फ-इम्प्रूवमेंट, मोटिवेशन और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट विषयों पर योगदान दिया. Festival & Culture सेक्शन में त्योहारों की परंपराएं, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त से संबंधित कंटेंट पर कार्य किया. इसके अलावा Women Lifestyle / Men Lifestyle और Health Education & Wellness जैसे विषयों पर भी मर्यादित एवं जानकारीपूर्ण लेखन के माध्यम से योगदान दिया. साल 2023 से शौर्य ने पूरी तरह से प्रभातखबर.कॉम के धर्म-कर्म और राशिफल सेक्शन में अपना योगदान देना शुरू किया. इस दौरान उन्होंने दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों पर विशेष फोकस किया. साथ ही पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए सरल, सहज और जानकारीपूर्ण धार्मिक कंटेंट तैयार करने पर लगातार कार्य किया. रांची में जन्मे शौर्य की प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एण्ड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की. यह शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें हिंदी पत्रकारिता की वह विशेषज्ञता प्रदान करती है, जो पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे — के आधार पर प्रभावी और तथ्यपूर्ण समाचार लेखन के लिए आवश्यक मानी जाती है.
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