चैत्र नवरात्र 2026: शक्ति, साधना और सकारात्मकता का संदेश

Updated at : 18 Mar 2026 5:45 PM (IST)
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Chaitra Navratri for positive mindset

चैत्र नवरात्रि में मिलेगी सकारात्मक ऊर्जा

Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्र का पर्व मां दुर्गा की आराधना के माध्यम से नकारात्मकता पर विजय, आत्मशक्ति जागरण और स्वस्थ जीवन के लिए साधना, संयम और विवेक का संदेश देता है.

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सलिल पाण्डेय, मिर्जापुर

Chaitra Navratri 2026: साल 2026 में चैत्र नवरात्र 19 मार्च से शुरू होगी और 27 मार्च, राम नवमी के दिन समाप्त होगी. इन 9 दिनों में हर दिन मां दुर्गा के अलग-अलग रूप की पूजा की जाती है. सनातन संस्कृति में प्रत्येक पर्व केवल उत्सव नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला संदेश भी समाहित करता है. वसंतिक नवरात्र भी ऐसा ही पावन अवसर है, जो मानव को सत्य, संयम और शक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है. इस दौरान मां दुर्गा की आराधना कर उनसे आंतरिक शक्ति प्राप्त करने की कामना की जाती है.

नकारात्मकता पर विजय का प्रतीक

नवरात्र के नौ दिनों में माँ दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है. “या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता…” की प्रार्थना हमें यह स्मरण कराती है कि शक्ति हर जीव में विद्यमान है. मानव जीवन में नकारात्मक शक्तियाँ, जैसे क्रोध, मोह, लोभ और नशा, अक्सर प्रभाव डालती हैं. इनसे मुक्ति पाने के लिए पूजा-पाठ, व्रत-उपवास और धर्मग्रंथों का अध्ययन अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है.

दुर्गासप्तशती का गूढ़ संदेश

नवरात्र में श्रीदुर्गासप्तशती और रामचरितमानस का पाठ विशेष महत्व रखता है. दुर्गासप्तशती में ‘मधु’ और ‘कैटभ’ राक्षसों का वध, प्रतीकात्मक रूप से नशा और नकारात्मकता पर विजय को दर्शाता है. यह संदेश देता है कि जब जीवन में बुराइयाँ हावी होने लगें, तब ईश्वरीय शक्ति की शरण ही सर्वोत्तम मार्ग है.

सुरथ और समाधि की कथा का अर्थ

ग्रंथों में वर्णित राजा सुरथ और वैश्य समाधि की कथा भी गहरा जीवन संदेश देती है. जब बाहरी परिस्थितियाँ विपरीत हो जाएँ या अपने ही साथ छोड़ दें, तब व्यक्ति को ‘मेधा’ यानी विवेक और सुचिंतन का सहारा लेना चाहिए. ऋषि मेधा के आश्रम में जाकर दोनों ने यही मार्ग अपनाया और समाधान पाया.

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स्वस्थ शरीर और सशक्त मन का संबंध

नवरात्र केवल आध्यात्मिक साधना ही नहीं, बल्कि शारीरिक संतुलन का भी पर्व है. नौ द्वार वाले इस शरीर को स्वस्थ रखना आवश्यक है, क्योंकि स्वस्थ शरीर में ही मजबूत मन और जागृत बुद्धि का विकास संभव है. व्रत और संयम इसी संतुलन को बनाए रखने में सहायक होते हैं.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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