चैत्र नवरात्रि और हिंदू नववर्ष: जानिए विक्रम संवत की शुरुआत का रहस्य

Edited by Shaurya Punj
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चैत्र नवरात्रि और चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का संबंध

Chaitra Navratri 2026: हिंदू नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होता है. इसी दिन से विक्रम संवत का आरंभ और चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होती है. यह दिन सृष्टि निर्माण और देवी उपासना से जुड़ा माना जाता है.

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रघोत्तम शुक्ल पूर्व पीसीएस, लखनऊ

Chaitra Navratri 2026: भारतीय परंपरा में काल यानी समय को अनंत माना गया है, लेकिन पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर गति के आधार पर समय को अलग-अलग भागों में बांटा गया है. इनमें वर्ष (Year) समय की एक महत्वपूर्ण इकाई है, जो पृथ्वी द्वारा सूर्य की एक परिक्रमा पूरी करने में लगने वाले समय को दर्शाता है. भारतीय संस्कृति में कई प्रकार के कैलेंडर प्रचलित रहे हैं, लेकिन हिंदू समाज में विक्रम संवत को विशेष महत्व दिया जाता है. हिंदू नववर्ष की शुरुआत चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से होती है और इसी दिन से चैत्र नवरात्रि का पर्व भी प्रारंभ होता है.

विक्रम संवत क्या है?

विक्रम संवत हिंदू पंचांग का एक प्रमुख कालगणना प्रणाली है. मान्यता है कि उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य ने शकों को पराजित करने के बाद अपनी विजय की स्मृति में इस संवत की शुरुआत की थी. यह ईसा से लगभग 57 वर्ष पहले प्रारंभ हुआ था. विक्रम संवत को चंद्र आधारित वर्ष भी कहा जाता है क्योंकि इसके महीनों का निर्धारण चंद्रमा की स्थिति के आधार पर किया जाता है. इस पंचांग में वर्ष लगभग 354 दिनों का होता है.

हिंदू महीनों के नाम कैसे पड़े?

हिंदू पंचांग में 12 महीने होते हैं और इनका नाम पूर्णिमा के दिन चंद्रमा जिस नक्षत्र में होता है, उसी के आधार पर रखा गया है. कुल 27 नक्षत्र माने गए हैं.

हिंदू कैलेंडर के प्रमुख महीने हैं—

  • चैत्र
  • वैशाख
  • ज्येष्ठ
  • आषाढ़
  • श्रावण
  • भाद्रपद
  • आश्विन
  • कार्तिक
  • मार्गशीर्ष
  • पौष
  • माघ
  • फाल्गुन

इन महीनों की पूर्णिमा के समय चंद्रमा क्रमशः चित्रा, विशाखा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढ़ा, श्रवण, पूर्व भाद्रपद, अश्विनी, कृतिका, मृगशिरा, पुष्य, मघा और पूर्व फाल्गुनी नक्षत्रों में स्थित होता है.

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का धार्मिक महत्व

पौराणिक मान्यता के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन ही ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी. इसलिए इस दिन को सृष्टि का प्रारंभ माना जाता है और इसे हिंदू नववर्ष के रूप में मनाया जाता है. इसी दिन से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होती है, जो नौ दिनों तक चलती है. इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है.

नवरात्र में देवी के नौ रूप

चैत्र नवरात्रि के दौरान भक्त मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं. प्रत्येक दिन देवी के एक विशेष रूप की आराधना की जाती है.

  • मां शैलपुत्री
  • मां ब्रह्मचारिणी
  • मां चंद्रघंटा
  • मां कूष्मांडा
  • मां स्कंदमाता
  • मां कात्यायनी
  • मां कालरात्रि
  • मां महागौरी
  • मां सिद्धिदात्री

इन नौ दिनों में उपवास, पूजा और भक्ति के माध्यम से देवी शक्ति की आराधना की जाती है.

नवरात्र में देवी शक्ति के विभिन्न रूप

शास्त्रों में देवी के कई स्वरूपों का उल्लेख मिलता है. देवी के तीन प्रमुख रूप माने जाते हैं—

  • महासरस्वती – ज्ञान और विद्या की देवी
  • महालक्ष्मी – धन और समृद्धि की देवी
  • महाकाली – शक्ति और संरक्षण की देवी

इसके अलावा देवी के दस महाविद्या स्वरूप भी बताए गए हैं—

  • काली
  • तारा
  • त्रिपुर सुंदरी
  • भुवनेश्वरी
  • छिन्नमस्ता
  • त्रिपुर भैरवी
  • धूमावती
  • बगलामुखी
  • मातंगी
  • कमला

इन सभी रूपों के माध्यम से देवी शक्ति की अलग-अलग शक्तियों की पूजा की जाती है.

विक्रम संवत 2083 और ज्योतिषीय संकेत

इस वर्ष विक्रम संवत 2083 का नाम रौद्र संवत्सर बताया गया है. ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इस वर्ष के राजा देवगुरु बृहस्पति और मंत्री मंगल माने गए हैं. बृहस्पति को ज्ञान, धर्म और विद्वत्ता का प्रतीक माना जाता है. इसलिए इस वर्ष आध्यात्मिक गतिविधियों में वृद्धि होने की संभावना मानी जाती है. वहीं मंगल को शक्ति और युद्ध का ग्रह माना जाता है. इसलिए कुछ क्षेत्रों में संघर्ष या राजनीतिक हलचल भी देखने को मिल सकती है.

चैत्र नवरात्रि 2026 के नौ दिन

चैत्र नवरात्रि के नौ दिनों में देवी के अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है.

  • 19 मार्च – प्रतिपदा: मां शैलपुत्री की पूजा और घटस्थापना
  • 20 मार्च – द्वितीया: मां ब्रह्मचारिणी की पूजा
  • 21 मार्च – तृतीया: मां चंद्रघंटा की पूजा
  • 22 मार्च – चतुर्थी: मां कूष्मांडा की पूजा
  • 23 मार्च – पंचमी: मां स्कंदमाता की पूजा
  • 24 मार्च – षष्ठी: मां कात्यायनी की पूजा
  • 25 मार्च – सप्तमी: मां कालरात्रि की पूजा
  • 26 मार्च – अष्टमी: मां महागौरी की पूजा
  • 27 मार्च – नवमी: कन्या पूजन और नवरात्र समापन

कलश स्थापना का महत्व

नवरात्र की शुरुआत कलश स्थापना से होती है. इसे घटस्थापना भी कहा जाता है. मान्यता है कि कलश में सभी देवताओं का वास होता है. पूजा के दौरान कलश में जल भरकर उसमें आम के पत्ते लगाए जाते हैं और ऊपर नारियल रखा जाता है. इसके बाद देवी का आह्वान कर नौ दिनों तक उनकी पूजा की जाती है.

नवरात्र में पूजा और साधना

चैत्र नवरात्र के दौरान भक्त दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं. यदि पूरा पाठ संभव न हो तो भक्त रोज थोड़ा-थोड़ा पाठ भी कर सकते हैं. पूजा के समय मन को शांत रखकर देवी का ध्यान करना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है. शास्त्रों के अनुसार देवी भक्ति में भावना का महत्व कर्मकांड से अधिक होता है.

नवार्ण मंत्र का महत्व

नवरात्र में साधक नवार्ण मंत्र का जप भी करते हैं—

ये भी पढ़ें: चैत्र नवरात्र 2026: शक्ति, साधना और सकारात्मकता का संदेश

“ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे”

यह मंत्र देवी शक्ति का अत्यंत प्रभावशाली मंत्र माना जाता है. श्रद्धा और नियम के साथ इसका जप करने से मानसिक शक्ति और आत्मबल बढ़ता है. चैत्र नवरात्रि केवल एक धार्मिक पर्व नहीं बल्कि हिंदू नववर्ष की शुरुआत का भी प्रतीक है. इस दिन से नया संवत्सर प्रारंभ होता है और देवी शक्ति की आराधना के साथ नए वर्ष का स्वागत किया जाता है. नवरात्र के नौ दिनों में भक्त उपवास, पूजा और साधना के माध्यम से मां दुर्गा की कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं. यह पर्व हमें आध्यात्मिक ऊर्जा, सकारात्मकता और नए संकल्पों के साथ जीवन की शुरुआत करने की प्रेरणा देता है.

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लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

शौर्य पुंज विशेष रूप से दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों एवं लेखों पर फोकस कर रहे हैं. वो डिजिटल मीडिया जगत के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. पाठकों की रुचि और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए वे सरल, सहज और तथ्यपूर्ण धार्मिक एवं ज्योतिषीय कंटेंट तैयार करते हैं. डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ शौर्य खबरों की नब्ज को समझने और जटिल विषयों को आसान भाषा में प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांस लेखन से की थी. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में कार्य करने का अवसर मिला और अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन में काम शुरू किया. यहां उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट और मनोरंजन जगत की प्रमुख खबरों पर लेखन किया. साल 2020 के दौरान उन्होंने लाइफस्टाइल, हेल्थ, एजुकेशन और अन्य नॉन-न्यूज कैटेगरी में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया. Health & Fitness, Beauty & Fashion, Relationship & Family, Food & Recipes, Travel, Astrology & Vastu, Career & Motivation, Festival & Culture जैसे विषयों पर उन्होंने सैकड़ों उपयोगी और जानकारीपूर्ण लेख तैयार किए. शिक्षा शौर्य पुंज का जन्म रांची, झारखंड में हुआ. उनकी प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. (ऑनर्स) की डिग्री प्राप्त की. पत्रकारिता की उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें समाचार लेखन के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे के आधार पर तथ्यपूर्ण, संतुलित और प्रभावी कंटेंट तैयार करने में सक्षम बनाती है. विशेषज्ञता के क्षेत्र दैनिक राशिफल साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल ज्योतिषीय उपाय पूजा-पाठ एवं धार्मिक अनुष्ठान व्रत-त्योहार एवं शुभ मुहूर्त वास्तु शास्त्र धार्मिक मान्यताएं एवं परंपराएं लाइफस्टाइल एवं वेलनेस हेल्थ एवं फिटनेस डिजिटल कंटेंट राइटिंग एवं SEO पाठकों तक विश्वसनीय, उपयोगी और आसान भाषा में जानकारी पहुंचाना शौर्य पुंज की लेखन शैली की सबसे बड़ी विशेषता है.

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