मई में कब है एकदंत संकष्टी चतुर्थी? यहां जानें पूजा की तारीख, शुभ मुहूर्त और विधि

Published by :Neha Kumari
Published at :02 May 2026 10:46 AM (IST)
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Sankashti Chaturthi

एकदंत संकष्टी चतुर्थी 2026

Sankashti Chaturthi May 2026: एकदंत संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित हिंदू धर्म का एक पवित्र पर्व है. इस दिन भक्त विधि-विधान से भगवान गणेश की पूजा करते हैं और व्रत रखते हैं. यदि आप भी यह व्रत करना चाहते हैं, तो जान लें कि इस दिन गणपति बप्पा की आराधना कैसे करनी चाहिए.

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Sankashti Chaturthi May 2026: हर साल ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को एकदंत संकष्टी चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है. साल 2026 में यह पावन पर्व 5 मई को मनाया जाएगा. इस बार यह चतुर्थी विशेष संयोग लेकर आ रही है, क्योंकि यह मंगलवार को पड़ रही है. जब संकष्टी चतुर्थी मंगलवार को होती है, तो उसे अंगारकी संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है, जिसे हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ माना जाता है.

एकदंत संकष्टी चतुर्थी 2026: तिथि और मुहूर्त

  • व्रत और पूजा की तारीख: 5 मई 2026, मंगलवार
  • चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 5 मई 2026 को सुबह 05:24 बजे से
  • चतुर्थी तिथि समाप्त: 6 मई 2026 को सुबह 07:51 बजे तक

पूजा के शुभ मुहूर्त

  • पहला मुहूर्त: सुबह 8:58 बजे से दोपहर 1:58 बजे तक
  • दूसरा मुहूर्त: रात 8:18 बजे से रात 9:13 बजे तक

चंद्रोदय का समय

संकष्टी चतुर्थी का व्रत चंद्रमा को अर्घ्य दिए बिना अधूरा माना जाता है.

  • 5 मई 2026 को चंद्रोदय का समय: रात 10:21 बजे
    (यह समय अलग-अलग शहरों के अनुसार कुछ मिनट कम या ज्यादा हो सकता है.)

एकदंत संकष्टी चतुर्थी का महत्व

भगवान गणेश के ‘एकदंत’ स्वरूप की पूजा मानसिक स्पष्टता और जीवन की बाधाओं को दूर करने के लिए की जाती है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान गणेश ने महाभारत लिखने के लिए अपना एक दांत त्याग दिया था, जो उनके त्याग और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक है. मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से घर में सुख-समृद्धि आती है और रुके हुए कार्य पूर्ण होते हैं.

पूजा विधि

  • ब्रह्म मुहूर्त में स्नान: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ लाल या पीले रंग के वस्त्र धारण करें.
  • व्रत का संकल्प: गणेश जी की प्रतिमा के सामने हाथ में जल और अक्षत लेकर व्रत का संकल्प लें.
  • दिनभर उपवास: यह व्रत सूर्योदय से शुरू होकर रात में चंद्र दर्शन तक चलता है. आप फलाहार कर सकते हैं.
  • शाम की मुख्य पूजा: शाम को गणेश जी को दूर्वा, फूल, धूप और दीप अर्पित करें. उन्हें भोग में मोदक या लड्डू चढ़ाएं.
  • कथा का श्रवण: ‘एकदंत संकष्टी चतुर्थी’ की व्रत कथा पढ़ें या सुनें.
  • चंद्र देव को अर्घ्य: रात में चंद्रमा के उदय होने पर चांदी या तांबे के लोटे में जल, दूध, चंदन और अक्षत मिलाकर अर्घ्य दें.
  • पारणा: अर्घ्य देने के बाद प्रसाद ग्रहण करें और सात्विक भोजन से व्रत खोलें.

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Neha Kumari

लेखक के बारे में

By Neha Kumari

प्रभात खबर डिजिटल के जरिए मैंने पत्रकारिता की दुनिया में अपना पहला कदम रखा है. यहां मैं धर्म और राशिफल बीट पर बतौर जूनियर कंटेंट राइटर के तौर पर काम कर रही हूं. इसके अलावा मुझे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों से जुड़े विषयों पर लिखने में रुचि है.

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