Calendar Vastu: 2025 का पुराना कैलेंडर दीवार पर टांगा है? यह आदत रोक सकती है आपकी तरक्की

Published by : Shaurya Punj Updated At : 09 Jan 2026 10:43 AM

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पुराने कैलेंडर को हटाएं

Calendar Vastu: अगर आपके घर या ऑफिस में अब भी 2025 का पुराना कैलेंडर टंगा हुआ है, तो यह अनजाने में आपकी तरक्की, मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा को रोक सकता है. वास्तु और सनातन धर्म के अनुसार बीते समय को थामे रखना भविष्य में परेशानी का कारण बन सकता है. जानिए इसे हटाने का सही समय और तरीका.

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Calendar Vastu: अगर आपके घर या ऑफिस में अब भी 2025 का पुराना कैलेंडर टंगा हुआ है, तो यह अनजाने में आपकी तरक्की और मानसिक शांति को प्रभावित कर सकता है. वास्तु और सनातन धर्म में बीते समय को थामे रखना अशुभ माना गया है. जानिए पुराने कैलेंडर से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं और इसे हटाने का सही तरीका.

पुराने कैलेंडर से जुड़ी धार्मिक मान्यता

हिंदू धर्म में समय को काल कहा गया है और काल को साक्षात भगवान का स्वरूप माना जाता है. जो समय बीत चुका है, उसे सम्मानपूर्वक विदा देना आवश्यक होता है. बीता हुआ कैलेंडर दीवार पर टंगा रहना यह दर्शाता है कि व्यक्ति पुराने समय से बाहर नहीं निकल पा रहा, जिससे मानसिक और आध्यात्मिक प्रगति बाधित होती है. शास्त्रों में स्पष्ट संकेत मिलते हैं कि पुरानी तिथियां और बीते वर्ष की स्मृतियां घर में नकारात्मक कंपन पैदा करती हैं.

पुराने कैलेंडर को अशुभ क्यों माना जाता है? जानिए धार्मिक कारण

वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में हर वस्तु का सीधा संबंध ऊर्जा प्रवाह से होता है. पुराना कैलेंडर ठहरी हुई ऊर्जा (Stagnant Energy) का प्रतीक माना जाता है. यह न केवल निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित करता है, बल्कि आर्थिक अड़चन, काम में रुकावट और पारिवारिक तनाव का कारण भी बन सकता है. विशेषकर अगर कैलेंडर में उदास चेहरे, सूखे पेड़ या अस्त होते सूर्य का चित्र हो, तो उसका प्रभाव और भी नकारात्मक माना जाता है.

क्या पुराना कैलेंडर बन सकता है वास्तु दोष का कारण?

धार्मिक दृष्टि से नया वर्ष नई संभावनाओं और नए कर्मों का प्रतीक होता है. जब घर में पुराने वर्ष का कैलेंडर बना रहता है, तो वह अवचेतन मन को पीछे की ओर खींचता है. इससे व्यक्ति अनजाने में पुराने डर, असफलता और नकारात्मक अनुभवों को दोहराता रहता है. यही कारण है कि शास्त्रों में नववर्ष से पहले या नववर्ष के तुरंत बाद पुराने कैलेंडर को हटाने की परंपरा बताई गई है.

नया साल आने पर कैलेंडर न हटाने से क्या होता है?

धर्मशास्त्रों के अनुसार पुराने कैलेंडर को फेंकने के बजाय सम्मानपूर्वक नष्ट करना चाहिए. अगर संभव हो तो उसे कागज के रूप में रीसायकल करें या किसी पवित्र दिन, जैसे अमावस्या या शनिवार को हटाएं. इसके बाद घर में नया कैलेंडर लगाने से पहले दीपक जलाना शुभ माना जाता है, ताकि नई सकारात्मक ऊर्जा का स्वागत हो सके.

समय के साथ चलना ही जीवन का धर्म है. इसलिए पुराने कैलेंडर को हटाकर नए समय और नए भविष्य का स्वागत करें, तभी सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है.

अगर आपके घर या ऑफिस में अब भी 2025 का पुराना कैलेंडर टंगा हुआ है, तो यह अनजाने में आपकी तरक्की, मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा को रोक सकता है. वास्तु और सनातन धर्म के अनुसार बीते समय को थामे रखना भविष्य में परेशानी का कारण बन सकता है. जानिए इसे हटाने का सही समय और तरीका.

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लोग अक्सर पुराने कैलेंडर को लेकर ये सवाल पूछते हैं—

पुराने कैलेंडर को घर में रखना क्यों अशुभ माना जाता है?

धार्मिक और वास्तु मान्यताओं के अनुसार पुराना कैलेंडर बीते समय और रुकी हुई ऊर्जा का प्रतीक होता है. इसे टांगे रखने से नकारात्मक कंपन बढ़ते हैं, जिससे कार्यों में बाधा, मानसिक तनाव और प्रगति में रुकावट आ सकती है.

पुराने कैलेंडर को कब और कैसे हटाना चाहिए?

पुराने कैलेंडर को नववर्ष की शुरुआत में या उसके तुरंत बाद हटाना शुभ माना जाता है. इसे फेंकने के बजाय सम्मानपूर्वक नष्ट करना या रीसायकल करना चाहिए. हटाने के बाद दीपक जलाकर नए कैलेंडर को लगाना सकारात्मक ऊर्जा को आमंत्रित करता है.

क्या ऑफिस में भी पुराना कैलेंडर रखने से नुकसान होता है?

हां, वास्तु शास्त्र के अनुसार ऑफिस में पुराना कैलेंडर निर्णय क्षमता और कार्यक्षमता को प्रभावित करता है. इससे काम में रुकावट, आर्थिक अड़चन और प्रोफेशनल ग्रोथ में बाधा आ सकती है.

अगर आपको वास्तु और सनातन धर्म से जुड़े ऐसे ही रोचक और उपयोगी विषय पढ़ना पसंद है, तो इस जानकारी को जरूर शेयर करें.

Disclaimer:  यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और वास्तु शास्त्र पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी देना है, न कि किसी प्रकार का दावा या सलाह।

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

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शौर्य पुंज डिजिटल मीडिया में पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर हैं. उन्हें न्यूज वर्ल्ड में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. शौर्य खबरों की नब्ज को समझकर उसे आसान और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. साल 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांसिंग की. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में दो महीने की इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन के लिए कार्य करना शुरू किया. उस समय उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस बिजनेस और एंटरटेनमेंट गॉसिप जैसी खबरों पर काम किया. साल 2020 में कोरोना काल के दौरान उन्हें लाइफस्टाइल, धर्म-कर्म, एजुकेशन और हेल्थ जैसे नॉन-न्यूज सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. उन्होंने लाइफस्टाइल कैटेगरी के कई महत्वपूर्ण सेक्शनों में योगदान दिया. Health & Fitness सेक्शन में डाइट, योग, वेट लॉस, मानसिक स्वास्थ्य और फिटनेस टिप्स से जुड़े उपयोगी कंटेंट पर कार्य किया. Beauty & Fashion सेक्शन में स्किन केयर, हेयर केयर, मेकअप और ट्रेंडिंग फैशन विषयों पर लेख तैयार किए. Relationship & Family कैटेगरी में पति-पत्नी संबंध, डेटिंग, पैरेंटिंग और दोस्ती जैसे विषयों पर जानकारीपूर्ण कंटेंट लिखा. Food & Recipes सेक्शन में हेल्दी फूड, रेसिपी और किचन टिप्स से संबंधित सामग्री विकसित की. Travel सेक्शन के लिए घूमने की जगहों, बजट ट्रिप और ट्रैवल टिप्स पर लेखन किया. Astrology / Vastu में राशिफल, वास्तु टिप्स और ज्योतिष आधारित कंटेंट पर काम किया. Career & Motivation सेक्शन में सेल्फ-इम्प्रूवमेंट, मोटिवेशन और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट विषयों पर योगदान दिया. Festival & Culture सेक्शन में त्योहारों की परंपराएं, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त से संबंधित कंटेंट पर कार्य किया. इसके अलावा Women Lifestyle / Men Lifestyle और Health Education & Wellness जैसे विषयों पर भी मर्यादित एवं जानकारीपूर्ण लेखन के माध्यम से योगदान दिया. साल 2023 से शौर्य ने पूरी तरह से प्रभातखबर.कॉम के धर्म-कर्म और राशिफल सेक्शन में अपना योगदान देना शुरू किया. इस दौरान उन्होंने दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों पर विशेष फोकस किया. साथ ही पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए सरल, सहज और जानकारीपूर्ण धार्मिक कंटेंट तैयार करने पर लगातार कार्य किया. रांची में जन्मे शौर्य की प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एण्ड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की. यह शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें हिंदी पत्रकारिता की वह विशेषज्ञता प्रदान करती है, जो पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे — के आधार पर प्रभावी और तथ्यपूर्ण समाचार लेखन के लिए आवश्यक मानी जाती है.

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