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श्रीमद्भागवतगीता के इस अध्याय का करें रोजाना पाठ, इसमें हैं समस्त उपदेशों का सार

Updated at : 20 Feb 2025 4:30 PM (IST)
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Bhagavad Gita Gyan

Bhagavad Gita Gyan

Bhagavad Gita paath: भगवत गीता को अपने जीवन में उतारने के लिए यह सुझाव दिया जाता है कि इसे प्रतिदिन और बार-बार पढ़ा जाए. हालांकि, कई व्यक्तियों के मन में यह प्रश्न उठता है कि गीता के किस अध्याय का नियमित पाठ करना चाहिए और कौन सा अध्याय विशेष रूप से महत्वपूर्ण है. आइए, इस विषय पर जानकारी प्राप्त करते हैं.

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Bhagavad Gita: श्रीमद्भागवतगीता के किस अध्याय का प्रतिदिन पाठ करना शुभ माना जाता है, इस पर कई बार संदेह उत्पन्न होता है. यहां इस विषय पर जानकारी प्रस्तुत की जा रही है. श्रीमद्भागवतगीता हिंदू धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रंथ है. महाभारत के युद्ध के पूर्व भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को जो ज्ञान उपदेश के रूप में दिया है, वही गीता के रूप में जाना जाता है.

गीता के सभी उपदेशों का सार और निष्कर्ष

गीता में कुल 18 अध्याय और 700 श्लोक हैं. गीता का अध्ययन, पाठ और मनन करने से मानवता के धर्म को गहराई से समझा जा सकता है. हर अध्याय का अपना महत्व है, लेकिन कुछ लोग गीता के अंतिम अध्याय, अर्थात् 18वें अध्याय को विशेष मानते हैं. इसका कारण यह है कि इसमें गीता के सभी उपदेशों का सार और निष्कर्ष प्रस्तुत किया गया है. यह अध्याय पिछले सभी अध्यायों का संक्षेप में वर्णन करता है, जिससे आप इस अध्याय के माध्यम से गीता के मुख्य सिद्धांतों को समझ सकते हैं.

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इस अध्याय में भगवान ने जीवन के लिए व्यावहारिक मार्ग का उपदेश दिया है. ईश्वर, जो प्रत्येक प्राणी के हृदय या केंद्र में विराजमान हैं, उसमें विश्वास रखे, उसका अनुभव करें. वहीं कुछ लोग पांचवें अध्याय को खास मानते हैं. इस अध्याय में बताया गया है कि हर प्राणी को समदर्शी होना चाहिए. ये अध्याय उन लोगों को सन्देश देता है जो छुआ-छूत और धार्मिक भेदभाव को मानते हैं.

श्रीमद्भागवतगीता हिंदू धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रंथ है. महाभारत के युद्ध से पूर्व, इस ग्रंथ में भगवान ने जीवन के लिए व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान किया है. ईश्वर, जो प्रत्येक जीव के हृदय में निवास करते हैं, पर विश्वास करना और उनका अनुभव करना आवश्यक है. कुछ लोग पांचवें अध्याय को विशेष महत्व देते हैं. इस अध्याय में यह बताया गया है कि प्रत्येक प्राणी को समदर्शिता का पालन करना चाहिए. यह अध्याय उन व्यक्तियों के लिए एक संदेश है जो छुआ-छूत और धार्मिक भेदभाव को स्वीकार करते हैं.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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