Kharmas 2025: क्या है खरमास, इसमें क्यों नहीं होते शुभ कार्य? जानें गुर्वादित्य योग का रहस्य
Published by : Shaurya Punj Updated At : 13 Dec 2025 2:33 PM
खरमास 2025: गुर्वादित्य योग
Kharmas 2025: ज्योतिष शास्त्र में खरमास को गुर्वादित्य योग से जोड़ा जाता है. इस दौरान सूर्य और गुरु की विशेष स्थिति के कारण शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं. जानिए खरमास क्या है, यह कब लगता है और इसके पीछे की धार्मिक व ज्योतिषीय मान्यताएं.
रघोत्तम शुक्ल
पूर्व पीसीएस, लखनऊ
Kharmas 2025: ज्योतिष शास्त्र में सभी राशियों को स्त्री स्वरूप माना गया है, जबकि उनके संचालन की जिम्मेदारी ग्रहों को दी गई है. हर राशि का एक स्वामी ग्रह होता है, जो उसके स्वभाव और फलादेश को तय करता है. जैसे सिंह राशि के स्वामी सूर्य, कर्क के चंद्रमा, मेष और वृश्चिक के मंगल, मिथुन और कन्या के बुध, धनु और मीन के बृहस्पति, वृष और तुला के शुक्र तथा मकर और कुंभ के स्वामी शनि माने जाते हैं. राहु और केतु को छाया ग्रह कहा गया है, इसलिए वे किसी भी राशि के स्वामी नहीं होते.
खरमास का ज्योतिषीय अर्थ क्या है?
खरमास को ज्योतिष में गुर्वादित्य योग कहा जाता है. यह योग तब बनता है जब सूर्य और गुरु एक-दूसरे की राशि में गोचर करते हैं. यानी या तो सूर्य गुरु की राशि धनु या मीन में प्रवेश करते हैं या फिर गुरु सूर्य की राशि सिंह में आ जाते हैं. यही स्थिति खरमास की शुरुआत मानी जाती है.
साल में कितनी बार लगता है खरमास?
सूर्य हर राशि में लगभग एक माह रहते हैं, जबकि गुरु एक राशि में लगभग 12 से 13 महीने तक विराजमान रहते हैं. इसी कारण वर्ष में दो बार एक-एक महीने का खरमास आता है. वहीं, जब गुरु पूरे एक वर्ष के लिए सिंह राशि में स्थित हो जाते हैं, तो यह विशेष स्थिति सिंहस्थ कहलाती है, जो लगभग 12 वर्ष में एक बार बनती है.
क्यों वर्जित होते हैं मांगलिक कार्य?
खरमास के दौरान शुभ ग्रहों की ऊर्जा कमजोर मानी जाती है. सूर्य को अग्नि तत्व प्रधान और पाप ग्रह माना गया है, जबकि गुरु को सौम्य और अत्यंत शुभ ग्रह कहा जाता है. जब ये दोनों एक-दूसरे की राशि में होते हैं, तो उनके शुभ प्रभाव में कमी आ जाती है. इसी कारण विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश और नए कार्यों की शुरुआत जैसे मांगलिक कार्यों को इस काल में वर्जित बताया गया है.
फिर क्या करना होता है शुभ?
खरमास में धार्मिक कार्य, दान-पुण्य, पूजा-पाठ और आवश्यक वस्तुओं की खरीद को शुभ माना गया है. यह समय आत्मचिंतन और आध्यात्मिक उन्नति के लिए उपयुक्त होता है.
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वर्जना का समाधान और खास मान्यता
मान्यता है कि गुर्वादित्य कुयोग का प्रभाव मुख्य रूप से गंगा और गोदावरी के बीच के क्षेत्र में अधिक होता है. इसके बाहर शुभ कार्य किए जा सकते हैं. प्रयागराज का प्रह्लाद घाट विशेष रूप से इस उद्देश्य के लिए उपयोगी माना जाता है.
खरमास में जन्मे जातक कैसे होते हैं?
खरमास में जन्म लेने वाले जातक कुछ मामलों में कठोर स्वभाव के हो सकते हैं, लेकिन वे बुद्धिमान, धनवान और साधु-संतों का सम्मान करने वाले भी होते हैं. अपनी समझ और विवेक से वे दूसरों को भी मार्गदर्शन देने की क्षमता रखते हैं. खरमास केवल वर्जनाओं का समय नहीं, बल्कि आत्मिक और आध्यात्मिक उन्नति का अवसर भी है. सही जानकारी और समझ के साथ इस काल का सदुपयोग किया जा सकता है.
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By Shaurya Punj
शौर्य पुंज डिजिटल मीडिया में पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर हैं. उन्हें न्यूज वर्ल्ड में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. शौर्य खबरों की नब्ज को समझकर उसे आसान और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. साल 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांसिंग की. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में दो महीने की इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन के लिए कार्य करना शुरू किया. उस समय उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस बिजनेस और एंटरटेनमेंट गॉसिप जैसी खबरों पर काम किया. साल 2020 में कोरोना काल के दौरान उन्हें लाइफस्टाइल, धर्म-कर्म, एजुकेशन और हेल्थ जैसे नॉन-न्यूज सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. उन्होंने लाइफस्टाइल कैटेगरी के कई महत्वपूर्ण सेक्शनों में योगदान दिया. Health & Fitness सेक्शन में डाइट, योग, वेट लॉस, मानसिक स्वास्थ्य और फिटनेस टिप्स से जुड़े उपयोगी कंटेंट पर कार्य किया. Beauty & Fashion सेक्शन में स्किन केयर, हेयर केयर, मेकअप और ट्रेंडिंग फैशन विषयों पर लेख तैयार किए. Relationship & Family कैटेगरी में पति-पत्नी संबंध, डेटिंग, पैरेंटिंग और दोस्ती जैसे विषयों पर जानकारीपूर्ण कंटेंट लिखा. Food & Recipes सेक्शन में हेल्दी फूड, रेसिपी और किचन टिप्स से संबंधित सामग्री विकसित की. Travel सेक्शन के लिए घूमने की जगहों, बजट ट्रिप और ट्रैवल टिप्स पर लेखन किया. Astrology / Vastu में राशिफल, वास्तु टिप्स और ज्योतिष आधारित कंटेंट पर काम किया. Career & Motivation सेक्शन में सेल्फ-इम्प्रूवमेंट, मोटिवेशन और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट विषयों पर योगदान दिया. Festival & Culture सेक्शन में त्योहारों की परंपराएं, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त से संबंधित कंटेंट पर कार्य किया. इसके अलावा Women Lifestyle / Men Lifestyle और Health Education & Wellness जैसे विषयों पर भी मर्यादित एवं जानकारीपूर्ण लेखन के माध्यम से योगदान दिया. साल 2023 से शौर्य ने पूरी तरह से प्रभातखबर.कॉम के धर्म-कर्म और राशिफल सेक्शन में अपना योगदान देना शुरू किया. इस दौरान उन्होंने दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों पर विशेष फोकस किया. साथ ही पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए सरल, सहज और जानकारीपूर्ण धार्मिक कंटेंट तैयार करने पर लगातार कार्य किया. रांची में जन्मे शौर्य की प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एण्ड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की. यह शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें हिंदी पत्रकारिता की वह विशेषज्ञता प्रदान करती है, जो पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे — के आधार पर प्रभावी और तथ्यपूर्ण समाचार लेखन के लिए आवश्यक मानी जाती है.
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