इन लोगों की वजह से उजड़ सकती है घर की सुख-शांति, चाणक्य ने किया बड़ा खुलासा

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Chanakya Niti: चाणक्य की नीतियां आज भी हमारी जिंदगी में उतनी ही काम की हैं. इस आर्टिकल में जानिए घर की सुख-शांति किन लोगों की वजह से भंग होती है और कैसे उनका स्वभाव रिश्तों, माहौल और पैसों पर असर डालता है. अगर आप भी अपने घर में शांति बनाए रखना चाहते हैं, तो यह जानकारी आपके लिए बेहद जरूरी है.
Chanakya Niti: आचार्य चाणक्य, जिन्हें हम कौटिल्य के नाम से भी जानते हैं, वे सिर्फ एक महान पॉलिटिशियन ही नहीं थे बल्कि एक कमाल के शिक्षक भी थे. उन्हें अपने समय के सबसे ज्ञानी और बुद्धिमान पुरुष के तौर पर भी जाना जाता है. मानवजाति को सही रास्ता दिखाने के लिए उन्होंने कई तरह की बातों का जिक्र भी किया था जिन्हें आज के समय में हम चाणक्य नीति के नाम से भी जानते हैं. अपनी नीतियों में आचार्य चाणक्य ने परिवार के कुछ ऐसे सदस्यों का भी जिक्र किया है जिनकी वजह से अक्सर घर की सुख-शांति भंग होती है. चाणक्य के अनुसार घर पर मौजूद इस तरह के लोग सिर्फ शांति को ही भंग नहीं करते हैं बल्कि पैसों और सुविधाओं पर भी काफी बुरा असर डालते हैं. तो चलिए जानते हैं घर की शांति भंग करने वाले लोगों के बारे में विस्तार से.
गुस्सैल स्वभाव वाले लोग
आचार्य चाणक्य के अनुसार जो भी इंसान छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करता है, वह हर समय घर के माहौल को खराब ही करता है. उसकी हर समय चिल्लाने की आदत, बातों को न सुनने की आदत और दूसरों से अपनी बातों को मनवाने की आदत पूरे घर में एक तनाव का माहौल बना पैदा कर देता है. अगर आपके घर पर एक इस तरह का इंसान है तो बाकी सभी सदस्य उससे डरेंगे या फिर दबाव में रहना शुरू कर देंगे. अगर आपके घर में शांति की जगह पर डर हो, तो वहां सुख कभी ठहर ही नहीं सकता है.
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चुगली और निगेटिव बातें फैलाने वाले
कुछ ऐसे लोग भी होते हैं जिन्हें इधर की बातें उधर करने की आदत होती है. इस तरह के लोग परिवार के एक सदस्य की बातों को अपने हिसाब से तोड़-मरोड़कर दूसरे सदस्य तक पहुंचाने का काम करते हैं. आचार्य चाणक्य के अनुसार इस तरह के जो लोग होते हैं वे परिवार को अंदर से खोखला करके तोड़ देते हैं. उनके अनुसार चुगली और गलतफहमी की वजह से रिसगतों में दूरी बढ़ती चली जाती है और साथ ही भरोसा भी खत्म हो जाता है. जब भरोसा टूटता है तो शांति भी भंग हो जाती है.
स्वार्थी और सिर्फ अपने बारे में सोचने वाले
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि कोई भी घर या परिवार सिर्फ सहयोग के दम पर ही चलता है. लेकिन अगर कोई व्यक्ति हर समय सिर्फ अपने फायदे के बारे में ही सोचता रहता है, वह परिवार का बैलेंस बिगाड़ देता है. इस तरह के लोग दूसरों के इमोशंस की कद्र नहीं करते हैं जिससे बाड़ी सभी सदस्यों के मन में दुख और नाराजगी की भावना बढ़ने लगती है. जब ऐसा होता है तो घर का माहौल भी भारी लगने लगता है.
आलसी और जिम्मेदारी से भागने वाले
आपका घर और परिवार सही तरह से चलता रहे इसके लिए यह काफी जरूरी हो जाता है कि परिवार में मौजूद हर सदस्य सहयोग करे. अगर कोई सदस्य अपनी जिम्मेदारियों को नहीं निभाता है और सारा काम दूसरों के भरोसे छोड़ देता है तो इसकी वजह से असंतोष की भावना जन्म लेती है. चाणक्य नीति के अनुसार जो लोग अपनी जिम्मेदारियों से भागते हैं वे परिवार पर बोझ बनकर रह जाते हैं. इन लोगों की वजह से कई बार घर में तनाव और तकरार का भी माहौल बन जाता है.
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Disclaimer: यह आर्टिकल सामान्य जानकारियों और मान्यताओं पर आधारित है. प्रभात खबर इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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लेखक के बारे में
By Saurabh Poddar
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