पश्चिमी सिंहभूम में बड़ा हादसा टला: पटरियों पर उतरे ‘गजराज’ तो रेलवे ने दिखाया बड़ा दिल, 20 की स्पीड से रेंगी ट्रेनें
हाथियों को बचाने के लिए ट्रेन को रोक दी गयी आधे घंटे तक, Pic Credit- Chatgpt AI
Chakradharpur Railway Division: चक्रधरपुर रेल मंडल ने मंगलवार देर रात वन्यजीव संरक्षण की एक मिसाल पेश की. भालूलता-जरायकेला रेलखंड के महपानी गेट के पास हाथियों का झुंड (बच्चे समेत) पटरियों पर आने की सूचना मिलते ही रेलवे ने मुंबई और हावड़ा मेल सहित कई ट्रेनों को आधे घंटे तक पूरी तरह रोक दिया.
Chakradharpur Railway Division, चक्रधरपुर : रेलवे ट्रैक पर भटक रहे हाथियों की जान बचाने के लिए रेलवे ने मंगलवार देर रात बड़ा और संवेदनशील फैसला लिया. चक्रधरपुर रेल मंडल ने हावड़ा–मुंबई मुख्य रेल मार्ग पर करीब आधे घंटे तक ट्रेनों का परिचालन पूरी तरह रोक दिया. इसके बाद सुरक्षा के मद्देनजर करीब चार घंटे तक इस ट्रैक पर ट्रेनों को 20 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलाया गया. रेलवे की इस त्वरित कार्रवाई से हाथी के एक बच्चे की जान बच गयी.
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महपानी गेट के पास धूमते मिले हाथियों का झुंड
जानकारी के अनुसार, मंगलवार रात भालूलता–जरायकेला रेलखंड में महपानी गेट (किमी 389/5-7) के पास रेलवे ट्रैक पर पांच हाथियों का झुंड घूमता देखा गया. झुंड में एक हाथी का बच्चा भी शामिल था. रात करीब 2.50 बजे ट्रैक पर हाथियों की मौजूदगी की सूचना मिलते ही रेलवे ने तत्काल मुंबई मेल, हावड़ा मेल, बिलासपुर–टाटानगर एक्सप्रेस सहित छह मालगाड़ियों का मूवमेंट करीब आधे घंटे के लिए रोक दिया.
कोल्ड वेदर पेट्रोलमैन की सतर्कता आई काम
रेल मंडल के एलीफेंट जोन में तैनात कोल्ड वेदर ट्रैक पेट्रोलमैन नियमित गश्ती पर थे. पेट्रोलिंग के दौरान उन्होंने ट्रैक पर हाथियों को देखा और तुरंत वरीय अनुभाग अभियंता को सूचना दी. सूचना मिलते ही रेलवे ने त्वरित निर्णय लेते हुए ट्रेनों का परिचालन रोक दिया. सतर्कता के कारण हाथियों, विशेषकर बच्चे की जान बच सकी. हालांकि, अचानक ट्रैक पर आ रहे हाथियों से ट्रैकमेंटनर, गेटमैन और की-मैन दहशत में हैं. रेलकर्मियों का कहना है कि रात में पेट्रोलिंग और ड्यूटी के दौरान हाथियों का सामना होना जानलेवा हो सकता है. उन्होंने रेलवे से अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम की मांग की है.
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ट्रैक के आसपास डटे रहे हाथी
हाथियों का झुंड ट्रैक पार करने के बाद भी काफी देर तक आसपास विचरण करता रहा. सुबह होते-होते झुंड पास के जंगल में चला गया. बावजूद इसके, हाथियों के दोबारा ट्रैक पर लौटने की आशंका को देखते हुए रेलवे ने परिचालन और ट्रैक गश्ती दलों को अलर्ट पर रखा है, ताकि किसी भी मूवमेंट की सूचना तुरंत मिल सके.
चार घंटे तक धीमी रफ्तार से चला परिचालन
पेट्रोलमैन की सूचना के बाद हाथियों के ट्रैक से हटने पर रेलवे ने कॉशन ऑर्डर जारी किया. रात 12.20 बजे से सुबह चार बजे तक इस रेलखंड पर सभी ट्रेनों को 20 किमी प्रति घंटे की गति से चलाने का निर्देश दिया गया. लोको पायलटों ने लगातार हॉर्न बजाते हुए और आसपास पैनी नजर रखते हुए ट्रेनों को आगे बढ़ाया.
महपानी गेट रहा बंद
हाथियों की मौजूदगी को देखते हुए महपानी गेट को रात में बंद कर दिया गया, जिससे सड़क यातायात पूरी तरह ठप रहा. गेट पर तैनात रेलकर्मी भी सुरक्षा के लिहाज से सुरक्षित स्थानों पर चले गए. रेलवे की इस मानवीय और सतर्क पहल की स्थानीय स्तर पर सराहना की जा रही है. यह घटना एक बार फिर दर्शाती है कि वन्यजीव संरक्षण और रेल परिचालन के बीच संतुलन बनाना कितना जरूरी है.
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