West Singhbhum: गंभीर मामला आते ही जगन्नाथपुर सीएचसी में अफरा-तफरी, खुल गई स्वास्थ्य सिस्टम की पोल

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वीरान पड़ा जगन्नाथपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र

West Singhbhum: जगन्नाथपुर प्रखंड के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की हालत खराब है. वहां कई दिनों से न तो डॉक्टर हैं और न ही पर्याप्त संख्या में मेडिकल स्टाफ हैं. अगर कोई गंभीर मामला आता है तो पूरे परिसर में अफरा-तफरी मच जाती है. रेफर करने के लिए भी कोई डॉक्टर नहीं है.

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West Singhbhum: झारखंड के स्वास्थ्य सिस्टम की खोखली हकीकत एक बार फिर पश्चिमी सिंहभूम के जगन्नाथपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में देखने को मिली है. पिछले 48 घंटे से यह अस्पताल पूरी तरह से भगवान भरोसे है. कोई डॉक्टर नहीं है. लाखों की आबादी को स्वास्थ्य सेवा देने का दम भरने वाला यह केंद्र आज खुद आइसीयू में नजर आ रहा है. जहां चतुर्थवर्गीय कर्मचारी ही व्यवस्था संभाल रहे हैं.

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इलाज के अभाव में तड़पता रहा मासूम

छत में खेल रहा एक बच्चा छत से गिरा गया, जिससे वह बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया. परिजन जब उसे लेकर अस्पताल पहुंचे तो वहां कोई डॉक्टर नहीं था. विडंबना देखिये बच्चे की स्थिति इतनी नाजुक थी कि उसे रेफर करने के लिए कोई जिम्मेदार अधिकारी मौजूद नहीं था. इस स्थिति की वजह से परिजनों ने काफी आक्रोश देखने को मिला. वह अपने बच्चों को लेकर चिंतित थे, जो काफी गंभीर हालत में था और रेफर करने या इलाज करने के लिए कोई डॉक्टर नहीं था. परिजनों ने गुस्से में आकर अस्पताल बंद करने तक की धमकी दी.

पिछले 24 घंटे से कोई डॉक्टर नहीं

पिछले 24 घंटे से अधिक समय से स्वास्थ्य केंद्र में न तो कोई डॉक्टर मौजूद है और न ही पर्याप्त स्वास्थ्यकर्मी, जिसके कारण दूर-दराज के गांवों से इलाज कराने पहुंचे मरीजों को निराश होकर वापस लौटना पड़ रहा है. प्रखंड मुख्यालय का महत्वपूर्ण अस्पताल होने के नाते यहां लोग काफी उम्मीद से आते हैं, लेकिन अस्पताल परिसर पूरी तरह वीरान नजर आ रहा है. जिससे क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं. स्थानीय लोगों के अनुसार, स्वास्थ्य केंद्र में सन्नाटा पसरा हुआ है. मरीज घंटों इंतजार करने के बाद भी जब किसी डॉक्टर या कर्मी को नहीं देख पा रहे हैं, तो उन्हें मजबूरी में घर लौटना पड़ रहा है या प्राइवेट अस्पतालों में जाना पड़ रहा है.

डीसी के आदेश की अनदेखी

हाल ही में पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन द्वारा एक आधिकारिक पत्र जारी कर स्पष्ट निर्देश दिया गया था कि आगामी नगरपालिका आम निर्वाचन 2026, मैट्रिक एवं इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 और मुख्यमंत्री के प्रस्तावित दौरे को देखते हुए जिले के सभी पदाधिकारी एवं कर्मी अपने-अपने मुख्यालय में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहेंगे और किसी प्रकार का अवकाश स्वीकृत नहीं किया जाएगा. इसके बावजूद जगन्नाथपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों और कर्मियों की अनुपस्थिति प्रशासनिक आदेशों की सीधी अवहेलना है.

स्वास्थ्यकर्मियों में भी डर का माहौल

स्वास्थ्य केंद्र में मौजूद कुछ कर्मियों का कहना है कि डॉक्टर की अनुपस्थिति में वे स्वयं को असहाय महसूस कर रहे हैं. उनका कहना है कि यदि कोई गंभीर आपातकालीन मामला आ जाता है तो स्थिति संभालना मुश्किल हो जाएगा और जनता का आक्रोश उन पर ही फूट सकता है.

परीक्षा काल में और भी गंभीर स्थिति

वर्तमान समय में मैट्रिक एवं इंटर की परीक्षाएं चल रही हैं. ऐसे संवेदनशील समय में स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों की अनुपस्थिति छात्रों, अभिभावकों और आम नागरिकों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है. यदि किसी प्रकार की आकस्मिक दुर्घटना या स्वास्थ्य आपात स्थिति उत्पन्न होती है, तो तत्काल उपचार न मिल पाना बड़ी अनहोनी को जन्म दे सकता है.

मरीजों की पीड़ा

इलाज के लिए आए ग्रामीणों ने बताया कि वे घंटों से अस्पताल में इंतजार कर रहे हैं, लेकिन न तो कोई डॉक्टर दिखाई दे रहा है और न ही कोई जिम्मेदार कर्मचारी. कुछ मरीजों ने यह भी चिंता जताई कि अस्पताल पूरी तरह खाली रहने के कारण यहां चोरी या अन्य अप्रिय घटना होने की भी आशंका बनी रहती है.

प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग

स्थानीय जनता ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से तत्काल हस्तक्षेप कर डॉक्टरों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने की मांग की है. लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र की ऐसी स्थिति क्षेत्र की जनता के स्वास्थ्य अधिकारों का खुला उल्लंघन है और इस पर जल्द से जल्द सख्त कार्रवाई होनी चाहिए.

क्या कहा सिविल सर्जन ने

जिले के सिविल सर्जन ने कहा कि जगन्नाथपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रतिनियुक्त डॉक्टर जयंत कुमार है. उन्होंने बताया कि डॉक्टर 7 से 12 फरवरी तक अवकाश पर चले गये हैं. उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है. सीएस ने बताया कि वर्तमान में सीएचसी में आयुष के एक डॉक्टर इकबाल हैं. उन्होंने कहा कि जिले में डॉक्टरों की घोर कमी है. एक डॉक्टर को 24 घंटे ड्यूटी करना पड़ रहा है. उन्होंने यह भी बताया कि पांच साल से डॉक्टरों के लिए सरकार को पत्र लिखा जा रहा है.

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