Shivraj Patil : नहीं रहे कांग्रेस के दिग्गज नेता शिवराज पाटिल, जानिए; मुंबई आतंकी हमले और मालेगांव विस्फोट से क्या था कनेक्शन?
शिवराज पाटिल
Shivraj Patil : शिवराज पाटिल का नाम जेहन में आते ही कुछ घटनाएं तेजी से हमारे दिमाग में कौंध जाती हैं, उनमें से सबसे प्रमुख है मुंबई आतंकी हमला और मालेगांव विस्फोट. ये दोनों ऐसी घटनाएं थीं, जिन्होंने शिवराज पाटिल को 2008 में गृहमंत्री के पद से इस्तीफा देने पर मजबूर किया था. पाटिल को हम लोकसभा अध्यक्ष और पंजाब के राज्यपाल के रूप में भी याद करते हैं.
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Shivraj Patil : कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व गृहमंत्री रहे शिवराज पाटिल का शुक्रवार 12 दिसंबर की सुबह निधन हो गया. शिवराज पाटिल 90 साल के थे. उनका निधन बुढ़ापा संबंधित बीमारियों की वजह से हुआ, वे महाराष्ट्र के लातूर में रह रहे थे. शिवराज पाटिल 2004 में मनमोहन सिंह की सरकार में गृहमंत्री बने थे. हालांकि उनका कार्यकाल बहुत विवादित रहा, क्योंकि 2008 में मुंबई बम धमाका हुआ और उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था.
क्या शिवराज पाटिल के कार्यकाल की सबसे दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी मुंबई बम धमाका?
शिवराज पाटिल कांग्रेस के वैसे वरिष्ठ नेताओं में से एक थे, जिनके बारे में यह कहा जाता है कि अगर वे 2004 का चुनाव जीत गए होते, तो मनमोहन सिंह नहीं वे प्रधानमंत्री होते. 2004 में जब वे गृहमंत्री बने, उस वर्ष वे लोकसभा का चुनाव हार गए थे, बावजूद इसके उन्हें गृहमंत्री बनाया गया, जो पार्टी में उनके कद को बताने के लिए पर्याप्त है. गृहमंत्री के रूप में शिवराज पाटिल का कार्यकाल बहुत विवादित रहा. इसमें जिस बात को लेकर उनकी सबसे ज्यादा निंदा की जाती है, वो है मुंबई बम धमाका.
पाकिस्तानी आतंकवादियों ने जिस तरह समुद्र के रास्ते मुंबई में घुसकर सीरियल हमला किया और ताज होटल, स्टेशन और अन्य भीड़भाड़ वाले इलाके में बम विस्फोट और हमलाा किया, उससे गृहमंत्री की छवि को बहुत नुकसान पहुंचा. यह कहा जाने लगा कि उनके कार्यकाल में सुरक्षा एजेंसियां बेकार थीं और सरकार को आतंकवादियों की गतिविधियों की कोई जानकारी नहीं थी. चूंकि मुबई बम हमले में सैकड़ों लोगों की जान गई थी, इसलिए इसे सरकार की बड़ी विफलता माना गया और शिवराज पाटिल को इस्तीफा देना पड़ा.

मालेगांव बम विस्फोट और नंदीग्राम से क्या है शिवराज पाटिल का कनेक्शन?
मालेगांव बम विस्फोट और नंदीग्राम से भी शिवराज पाटिल का गहरा रिश्ता है. दरअसल 2008 में मालेगांव में मुस्लिम बहुल इलाके में बम धमाका हुआ था. इस धमाके में 6 लोगों की मौत हुई थी और सैकड़ों घायल हुए थे. इस हमले के बाद हिंदू आतंकवाद शब्द चलन में आया और पाटिल पर यह आरोप लगा कि उन्होंने इस केस को सही तरीके से हैंडिल नहीं किया.
2007 में नंदीग्राम में जब भूमि अधिग्रहण का मामला बहुत गरमाया तो उस वक्त की बंगाल सरकार ने गृह मंत्रालय से सेंट्रल रिजर्व फोर्स को वहां भेजने का आग्रह किया, लेकिन पाटिल ने ऐसा नहीं किया. इस वजह से भी उनकी आलोचना हुई थी.
क्या पंजाब के गवर्नर भी रहे थे शिवराज पाटिल?
शिवराज पाटिल को गांधी परिवार के करीबी लोगों में गिना जाता है. वे इंदिरा गांधी से सोनिया गांधी तक परिवार के साथ रहे और विभिन्न मंत्रालयों को संभाला. वे देश के रक्षा मंत्री भी रहे थे. 2010 में उन्हें पंजाब का राज्यपाला बनाया गया था. 1991 में वे लोकसभा के अध्यक्ष भी रहे थे. वे महाराष्ट्र के लातूर से 7 बार निर्वाचित हुए थे. उस्मानिया यूनिवर्सिटी से साइंस ग्रेजुएट थे, बाद में उन्होंने मुंबई विश्वविद्यालय से लाॅ की डिग्री ली थी.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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