सुंदरबन के लोगों तक नहीं पहुंच पायेंगे बाघ, लग रहे 300 फिशिंग सेंसर लाइट

नदी के रास्ते सुंदरबन की बस्तियों में पहुंच जाते हैं बाघ.
Sundarban News: पश्चिम बंगाल के सुंदरबन इलाके में बाघ की वजह से लोग परेशान हैं. आये दिन बस्तियों में बाघ के आ जाने की घटनाएं सामने आती रहतीं हैं. इससे लोगों में दहशत का माहौल रहता है. उत्तर प्रदेश के कतर्नियाघाट में हुए सफल प्रयोग को अब सुुंदरबन में पायलट प्रोजेक्ट के तौर प शुरू किया गया है. आइए, जानते हैं कि क्या है यह एक्सपेरिमेंट.
खास बातें
Sundarban News: पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के सुंदरबन के जंगलों से सटे गांवों में बाघ की घुसपैठ रोकने की तैयारी चल रही है. इन इलाकों में बाघ को आने से रोकने के लिए हाईटेक कवच की व्यवस्था की जा रही है.
सोलर लाइट से चलते हैं ANIDERS
वन विभाग ने तकनीक आधारित नयी रणनीति बनायी है. जंगल की सीमा पर अत्याधुनिक ‘फिशिंग सेंसर लाइट’ और सोलर लाइट से चलने वाले एनिमल इंट्रूजन डिटेक्शन एंड रिपेलेंट सिस्टम (एएनआईडीईआरएस) लगाये जा रहे हैं.
26 किलोमीटर के एरिया में 300 फिशिंग सेंसर लाइट
वन विभाग ने बताया है कि कुलतली बीट कार्यालय क्षेत्र में करीब 26 किलोमीटर इलाके में करीब 300 विशेष फिशिंग सेंसर लाइट लगाये जा रहे हैं. जंगल से सटे खाल (बड़े नालों को बंगाल में खाल कहते हैं) और खाड़ियों के किनारे, जहां सुरक्षा जाल या नेट लगाये गये हैं, वहां ऊंचे पेड़ों की डालियों और जाल पर इन लाइट्स को लगाया जा रहा है.
शाम ढलते ही जल उठती है लाइट
वन विभाग के मुताबिक, शाम ढलते ही ये लाइटें स्वत: जल उठेंगी. इनसे लाल, नीली, पीली और हरी रोशनी निकलेंगी. अधिकारियों का दावा है कि अचानक बदलती तेज रोशनी बाघ को बस्तियों की ओर बढ़ने से रोकेगी. पाथरप्रतिमा क्षेत्र के एक गांव में एक्सपेरिमेंट के दौरान इसके पॉजिटिव रिजल्ट्स आये हैं. अब इस सिस्टम को कुलतली में भी लागू किया जा रहा है.
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बाघ को आने से रोकने के लिए 10 फुट ऊंचे नेट लगाये
दक्षिण 24 परगना वन विभाग के अधिकारियों ने बताया है कि बाघ को रोकने के लिए जंगल से सटे इलाकों में करीब 10 फुट ऊंचे नेट पहले ही लगाये जा चुके हैं. अब उन्हीं के पास और पेड़ों पर ये सेंसर लाइट लगाकर सुरक्षा घेरा को और मजबूत किया जा रहा है. स्थानीय निवासियों ने इसे राहत देने वाला कदम बताया है.
Sundarban News: हेरोवांगा-9 कंपार्टमेंट में लग रहा सिस्टम
इसी क्रम में रायदिघी रेंज के हेरोवांगा-9 वन कंपार्टमेंट के संवेदनशील इलाकों में वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया और दक्षिण 24 परगना वन विभाग की संयुक्त पहल पर एएनआईडीईआरएस प्रणाली स्थापित की जा रही है. यह गैर-घातक, तकनीक आधारित सिस्टम है, जो 180 डिग्री कोण में 25 से 30 मीटर तक की गतिविधि पहचान सकता है.
जानवर की मौजूदगी का संकेत देता है इंस्ट्रूमेंट
सौर पैनल से चलने वाले ये इंस्ट्रूमेंट्स किसी पशु या जानवर की मौजूदगी का संकेत मिलते ही वनकर्मियों को सतर्क कर देता है. फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के कर्मचारी अलर्ट हो जाते हैं और समय रहते उचित एक्शन लेते हैं, जिससे बाघों और अन्य जंगली जानवरों का आतंक कम होता.
कतर्नियाघाट की सफलता के बाद सुंदरबन में चल रहा प्रयोग
फिलहाल ऐसे 4 उपकरण लगाये गये हैं. पायलट प्रोजेक्ट के तहत इसकी तकनीकी क्षमता, पहचान की सटीकता और बाघ की घुसपैठ रोकने में यह कितना प्रभावी साबित हुआ है, इसका आकलन अभी किया जा रहा है. उत्तर प्रदेश के पीलीभीत और कतर्नियाघाट में सफल प्रयोग के बाद पहली बार सुंदरबन में इसे लागू किया गया है. वन विभाग का मानना है कि यदि यह प्रयोग सफल रहा, तो ह्यूमन-टाईगर कॉनफ्लिक्ट में कमी आयेगी. जंगल से सटे गांवों में सुरक्षा का नया मॉडल डेवलप होगा.
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By Mithilesh Jha
मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
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