Basant Panchami 2026: सबसे पहले किस भगवान ने की माता सरस्वती की पूजा? जानें पौराणिक कथाओं में छिपा रहस्य

Published by : Neha Kumari Updated At : 22 Jan 2026 12:29 PM

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बसंत पंचमी कथा

Basant Panchami 2026: बसंत पंचमी के दिन स्कूलों, घरों और कार्यालयों में माता सरस्वती की प्रतिमा स्थापित कर विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि बसंत पंचमी के दिन माता सरस्वती की पूजा करने की परंपरा की शुरुआत कैसे हुई और सबसे पहले माता सरस्वती की पूजा किसने की? अगर हां, तो आइए एक पौराणिक कथा के माध्यम से इसके पीछे छिपे रहस्य को जानते हैं.

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Basant Panchami 2026: कल, शुक्रवार को बसंत पंचमी का त्योहार मनाया जाएगा. इस दिन भक्त विशेष रूप से माता सरस्वती की पूजा-अर्चना करते हैं. माता सरस्वती को ज्ञान, वाणी, संगीत और विद्या की देवी माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता सरस्वती के आशीर्वाद के बिना ज्ञान और विद्या की प्राप्ति संभव नहीं है.इसी कारण विद्यार्थी विशेष रूप से बसंत पंचमी के दिन माता सरस्वती को प्रसन्न करने और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए श्रद्धा और धूमधाम से पूजा करते हैं. वैसे तो बसंत पंचमी पर माता सरस्वती की पूजा से जुड़ी कई प्रचलित कथाएं हैं, जिनमें से एक के बारे में आज हम इस लेख के माध्यम से जानेंगे.

पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, जब सृष्टि की रचना हुई, तब पूरे ब्रह्मांड में हर ओर सन्नाटा छाया हुआ था. चारों ओर केवल शांति ही शांति थी. ऐसे में भगवान ब्रह्मा ने अपने कमंडल से जल निकाला और मंत्रों का उच्चारण करते हुए उस जल का छिड़काव किया. उसी जल से एक दिव्य शक्ति का प्राकट्य हुआ, जो आगे चलकर माता सरस्वती के नाम से जानी गईं.

कथा के अनुसार, जब माता सरस्वती ने पहली बार भगवान श्रीकृष्ण को देखा, तो उनके मन में उन्हें पति रूप में प्राप्त करने की इच्छा उत्पन्न हुई. जब भगवान श्रीकृष्ण को माता की इस इच्छा के बारे में ज्ञात हुआ, तो उन्होंने आदरपूर्वक कहा कि वे राधा जी के प्रति समर्पित हैं, जो माता लक्ष्मी का स्वरूप हैं, इसलिए वे उनकी इच्छा पूरी नहीं कर सकते.

इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण ने माता सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए उन्हें वरदान दिया कि हर वर्ष उनके प्रकट होने की तिथि, यानी माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को उनकी पूजा की जाएगी. भगवान श्रीकृष्ण ने माता सरस्वती से यह भी कहा कि उनके आशीर्वाद से आज से लेकर प्रलय तक हर युग में सभी प्राणी उनकी पूजा करेंगे.

मनुष्य, देवता, ऋषि-मुनि, योगी, नाग, गंधर्व और राक्षस सभी श्रद्धा और भक्ति के साथ सोलह प्रकार के पूजा-विधानों से माता सरस्वती की आराधना करेंगे. इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं सबसे पहले माता सरस्वती की पूजा की. तभी से माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को माता सरस्वती की विशेष पूजा होने लगी.

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल मान्यताओं और परंपरागत जानकारियों पर आधारित है. प्रभात खबर किसी भी तरह की मान्यता या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

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नेहा कुमारी प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं. उन्हें लेखन के क्षेत्र में एक वर्ष से अधिक का अनुभव है. पिछले छह महीनों से वे राशिफल और धर्म से जुड़ी खबरों पर काम कर रही हैं. उनका मुख्य कार्य व्रत-त्योहारों, पौराणिक कथाओं और भारतीय रीति-रिवाजों से जुड़ी जानकारी को सरल भाषा में लोगों तक पहुंचाना है. नेहा का हमेशा यह प्रयास रहता है कि वे कठिन से कठिन विषय को भी इतना आसान और रोचक बना दें कि हर कोई उसे सहजता से पढ़ और समझ सके. उनका मानना है कि यदि धर्म और संस्कृति से जुड़ी जानकारी सरल शब्दों में मिले, तो लोग अपनी परंपराओं से बेहतर तरीके से जुड़ पाते हैं. डिजिटल मीडिया में अपने करियर की शुरुआत उन्होंने प्रभात खबर में ही ‘नेशनल’ और ‘वर्ल्ड’ डेस्क पर छह महीने की इंटर्नशिप के साथ की थी. इस दौरान उन्होंने रियल-टाइम खबरों पर काम करना, तेजी और सटीकता के साथ कंटेंट लिखना, ट्रेंडिंग विषयों की पहचान करना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा. इस अनुभव ने उनकी न्यूज़ सेंस, लेखन क्षमता और खबरों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने की समझ को और अधिक मजबूत बनाया.

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