हमारी प्रकृति का नियम

Published at :13 Sep 2016 5:52 AM (IST)
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हमारी प्रकृति का नियम

आपके कंधों पर भारत देश की समृद्धि का दायित्व है और संस्कृति का गौरव बढ़ाने की जिम्मेवारी भी. जिम्मेवारी जितनी बड़ी है, आपको अपने कंधे भी उतने ही मजबूत रखने होंगे. आप युवा हो. पूरी तरह परिपक्व हो. आपको पता है कि क्या करना है और क्या छोड़ना. कौन-सी प्रवृत्ति फायदेमंद है और किसमें नुकसान. […]

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आपके कंधों पर भारत देश की समृद्धि का दायित्व है और संस्कृति का गौरव बढ़ाने की जिम्मेवारी भी. जिम्मेवारी जितनी बड़ी है, आपको अपने कंधे भी उतने ही मजबूत रखने होंगे. आप युवा हो. पूरी तरह परिपक्व हो. आपको पता है कि क्या करना है और क्या छोड़ना. कौन-सी प्रवृत्ति फायदेमंद है और किसमें नुकसान. फिर भी, अध्ययन आपकी प्राथमिकता होना चाहिए.

अध्ययन के साथ जरूरी है कि आप सत्संगति में भी दिलचस्पी रखो. आध्यात्मिकता हर दुख और समस्या को मिटाने की कुंजी है. मन की शांति के लिए इसके सिवा दूसरा कोई उपाय नहीं है. अपना जीवन संयमी और सादगीपूर्ण बनाओ. क्या जिंदगी केवल खाने-पीने, नाचने-गाने और मौज-मस्ती में गंवाने के लिए मिली है! हमारे पास परमार्थ का, राष्ट्रसेवा का, परिवार सेवा का और सत्संग सेवा का लक्ष्य होना चाहिए. संयम और सादगी इसका सबसे बड़ा शृंगार है. यदि आप राष्ट्र एवं परिवार, संस्कृति के मूल्यों और आर्थिक प्रतिमानों को स्थापित करना चाहते हो, तो आपको परमात्मा, संत, मंदिर, साधना, अध्यात्म से जुड़ना होगा. आपको अपनी इंद्रियां संयमित करनी होंगी वरना स्वच्छंद मुक्ताचार आपकी शक्ति को दीमक की तरह खोखली कर देगी. चरित्र की ताकत ही आपकी असल शक्ति है.

आप में उच्च ध्येय पाने की लगन होनी चाहिए. एकाग्रता के साथ पुरुषार्थ में दिन-रात लगे रहो और उसे पूरा हासिल करने के आत्मविश्वास के साथ परमात्मा के आशीर्वाद पर भरोसा रखो. निष्फलता के आंसू बहाते रहना कायरता है. वर्तमान में जीना सीखो. आपको समझना होगा कि केवल भौतिकता जिंदगी के जहर के सिवा कुछ भी नहीं है. यह परिवार में आग लगाती है. अशांति और कलह को जन्म देती है.

समाज के अधम विचारों के अनुकरण से नहीं, महापुरुषों के आदेशों के अनुसरण से हम मानव बनते हैं. आधुनिक भोगवाद का अंधानुकरण आपकी शक्ति, पवित्रता और इज्जत तीनों को सोख लेने के बाद संताप के सिवा कुछ नहीं. आदर्श युवा शुद्ध चरित्र से संपन्न, धार्मिंक संस्कारों से युक्त, राष्ट्रीय अस्मिता से भरा हुआ और देश-सेवा के लिए तत्पर रहता है. उसका जीवन पवित्र है.

– प्रमुख स्वामी महाराज

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