अब तो आंखें खोलो

Published at :10 Aug 2016 5:45 AM (IST)
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अब तो आंखें खोलो

अगर ऐसी मुश्किल आ जाये िक मुझे ईश्वर और गुरु, इन दोनों में से किसी एक को अंतत: चुनना ही पड़ जाये, तो मैं गुरु को चुनूंगी, क्योंकि गुरु के द्वारा ही मैं ईश्वर को समझ लूंगी. अगर मेरे पास गुरु नहीं है, तो मुझे कुछ भी पता नहीं चल पायेगा. क्योंकि ईश्वर तो गूंगा […]

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अगर ऐसी मुश्किल आ जाये िक मुझे ईश्वर और गुरु, इन दोनों में से किसी एक को अंतत: चुनना ही पड़ जाये, तो मैं गुरु को चुनूंगी, क्योंकि गुरु के द्वारा ही मैं ईश्वर को समझ लूंगी. अगर मेरे पास गुरु नहीं है, तो मुझे कुछ भी पता नहीं चल पायेगा. क्योंकि ईश्वर तो गूंगा है, वह बोल ही नहीं सकता है. सत्य तो गूंगा है, सत्य को जुबान चाहिए होता है, और जुबान तो गुरु ही देता है. जिस तरह से सवाल उठता है कि राग बांसुरी के भीतर होते हैं क्या?

इसका जवाब है कि- नहीं. राग बांसुरी के अंदर नहीं, बल्कि राग तो बांसुरी बजानेवाले के कंठ में होते हैं. बांसुरी चुरा लेने से तुम उसके राग नहीं चुरा सकते. इसी तरह से ज्ञान, देनेवाले उस व्यक्ति के हृदय में है, ज्ञान शब्दों में नहीं होता. शब्द तो सिर्फ बाहरी माध्यम हैं. जैसे बांंसुरी सिर्फ माध्यम है. सारे ग्रंथ, सारे शब्द, उस बांसुरी की तरह से हैं. पुस्तकों में लिखे शब्द उस बांसुरी की तरह ही हैं. तुमने दो टके में ज्ञान की किताब तो खरीद ली, पर इस भ्रम में मत रहना कि उसमें से ज्ञान का राग भी निकलने लग जायेगा. ज्ञान का राग तो गुरु के मुखारविंद से ही निकले, तो असर करता है.

सबके लिए मैं हृदय से मंगल कामना करती हूं कि सबका अंधकार दूर हो, सबका तमस दूर हो, सबकी साधना का मार्ग प्रशस्त हो, सबके संकल्प बलवती हों, और सब लोग बंधनों से मुक्त हो जीवन के अमृत लाभ को ले सकें. यह रोशनी जो अभी बाहर है, यह तो कल तक नहीं थी, आज है और फिर खत्म हो जायेगी. सुबह में भुवन भास्कर सूर्य देवता जब उदय होंगे, तो इनकी रोशनी की चमक क्या रह जायेगी सूर्य के सामने! यह अभी इतनी प्यारी जो लग रही हैं रोशनियां, छोटी-छोटी टिमटिमाती पीली-लाल-नीली रोशनियां, ये सब सूरज के सामने फीकी हो जायेंगी. तुम्हारी इंद्रियों के छोटे-छोटे सुख, तुम्हारे अभिमान और तुम्हारे मन की ममता के सुख इन जलती हुई छोटी-छोटी बत्तियों की तरह ही हैं.

तुम्हारे अंदर आनंद का जब महा सूर्य उदय हो सकता है, तो इन बुझ जानेवाली छोटी-छोटी चमकदार संसार की सुख की घड़ियों के पीछे अपने जीवन को अंधकार से क्यों भरना! जीवन को उज्ज्वल बनाओ. बहुत भटक लिए अंधकार में, अब तो आंखें खोलो.

आनंदमूर्ति गुरु मां

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