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प्राणशक्ति के क्षय को रोकें

यह हम सबके लिए विचार करने योग्य विषय है कि मांस का एक टुकड़ा अगर कहीं रख दिया जाये, तो कुछ समय बाद वह सड़ने लगता है और उसमें कीड़े भी पड़ जाते हैं. इसके विपरीत हमारे शरीर में जो मांस है, उसमें वर्षो कीड़े नहीं पड़ते और न ही वह सड़ता है. अब सोचनेवाली […]

यह हम सबके लिए विचार करने योग्य विषय है कि मांस का एक टुकड़ा अगर कहीं रख दिया जाये, तो कुछ समय बाद वह सड़ने लगता है और उसमें कीड़े भी पड़ जाते हैं. इसके विपरीत हमारे शरीर में जो मांस है, उसमें वर्षो कीड़े नहीं पड़ते और न ही वह सड़ता है. अब सोचनेवाली बात है कि ऐसा क्यों होता है?
इसका कारण यह है कि शरीर के मांस में प्राणशक्ति अथवा अग्नि निहित है, परंतु जो मांस का टुकड़ा कहीं अन्यत्र रखा हुआ है, उसमें प्राण-ऊर्जा अथवा अग्नि नहीं है. इस क्रम में एक और बात ध्यान देनेवाली है कि जिन लोगों का शरीर बेडौल हो जाता है या शरीर में कोई विकृति पैदा हो जाती है, भूख कम हो जाती है, चेहरे की लालिमा कम हो जाती है, आंख की रोशनी कम हो जाती है, इन सबका एक ही कारण है कि उन अंगों में प्राण-ऊर्जा की कमी हो गयी है.
अब जानने योग्य बात है कि जीव को प्राण-ऊर्जा प्रकृति से प्राप्त होती है. हमारे शरीर को जितनी प्राण-ऊर्जा की जरूरत है, उतनी प्रकृति ने पहले से ही उसमें भर दी है. अब हमारा काम है कि उसका संतुलन बनाये रखें या उसे असंतुलित नहीं होने दें. शरीर से प्रतिक्षण ऊर्जा का क्षरण होता रहता है और उसे पूरा करने के लिए प्राणायाम की आवश्यकता होती है. योग और व्यायाम एवं प्राणायाम के माध्यम से ही हम अपनी प्राणशक्ति अथवा प्राण-ऊर्जा को बढ़ा सकते हैं. यदि प्राणशक्ति का क्षय हो रहा है और हम बाहर से शक्ति ग्रहण करें, तो निश्चित रूप से हमारा शरीर बिगड़ जायेगा, हमारा शरीर बेडौल हो जायेगा.
आचार्य सुदर्शन
Prabhat Khabar Digital Desk
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