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किन ग्रहों के योग से जीवन में आती है कटुता

Updated at : 10 Aug 2019 3:09 AM (IST)
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किन ग्रहों के योग से जीवन में आती है कटुता

डॉ एनके बेरा, ज्योतिषाचार्य भारतीय ज्योतिष में प्रत्येक ग्रह का अपना एक विशेष लक्षण तथा स्वभाव होता है. ये ग्रह मनुष्य पर अपना अच्छा-बुरा प्रभाव डालते हैं. ज्योतिषशास्त्र में असंख्य योगों का उल्लेख है. इनमें से कुछ विशेष अनिष्टकारी योग होते हैं. जन्मकुंडली में जब भी राहु के साथ कई ग्रह योग बनाते हैं, तो […]

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डॉ एनके बेरा, ज्योतिषाचार्य

भारतीय ज्योतिष में प्रत्येक ग्रह का अपना एक विशेष लक्षण तथा स्वभाव होता है. ये ग्रह मनुष्य पर अपना अच्छा-बुरा प्रभाव डालते हैं. ज्योतिषशास्त्र में असंख्य योगों का उल्लेख है. इनमें से कुछ विशेष अनिष्टकारी योग होते हैं. जन्मकुंडली में जब भी राहु के साथ कई ग्रह योग बनाते हैं, तो प्रायः अपनी शुभता खो देते हैं.
ऐसे योगों में उत्पन्न व्यक्ति को अपने जीवन में काफी संघर्ष करना पड़ता है. प्रगति में रुकावटें आती हैं. विलंब से यश प्राप्त होता है. मानसिक, शारीरिक एवं आर्थिक रूप से वह व्यक्ति परेशान रहता है. उसका विवाह नहीं होता. विवाह हो भी जाये, तो दांपत्य में कलह व संतान सुख में बाधा आती है. वैवाहिक जीवन में कटुता आकर अलगाव तक हो सकता है. कर्ज का बोझ उसके कंधों पर होता है.
जन्मपत्रिका के अनुसार जब-जब राहु एवं केतु की महादशा, अंतर्दशा आदि आती है तब-तब यह योग असर दिखाता है. गोचर में राहु व केतु का जन्मकालिक चंद्र पर भ्रमण पर इस अनिष्टकारी योग को सक्रिय कर देता है. वैसे राहु-केतु को छाया ग्रह कहते हैं.
उनकी अपनी कोई राशि नहीं होती. जिस ग्रह के साथ जिस राशि में बैठे, उसके स्वामी की स्थिति व योगानुसार फल देते हैं. राहु का जन्म नक्षत्र भरणी और देवता काल है. केतु का जन्म नक्षत्र अश्लेषा और देवता सर्प है. जानिए किन ग्रहों के साथ राहु क्या योग बनाते हैं.
ग्रहण योग : जन्म कुंडली में राहु व सूर्य एक साथ हों या राहु व चंद्रमा एक साथ होने पर भी ग्रहण योग होता है.
चांडाल योग : राहु व गुरु एक साथ होने पर.
अंगारक योग : राहु व मंगल एक साथ होने से.
जड़त्व योग : जन्म पत्रिका में राहु व बुध एक साथ होने पर.
नंदी योग : राहु व शनि एक साथ हों, तो नंदी योग होता है.
शकट योग : जब लग्न कुंडली में चंद्रमा से छठे या आठवें स्थान में गुरु हो तथा यह गुरु लग्न से केंद्रासीन न हो तब.
रंध्र मालिका योग : कुंडली में अष्टम भाव से लगातार सात भावों में सातों ग्रह हों, तो यह रंध्र मालिका योग कहलाता है.
राज भंग योग : लग्न कुंडली में सूर्य तुला राशि में परम नीच अंशों (0 से 10 अंशों तक) में हो, मंगल से दृष्ट हो या शनि जन्म लग्न या केंद्र स्थान में हो, उसको शुभ ग्रह न देखते हों तथा मंगल की काल होरा में जन्म हो तो राजभंग योग होगा.
अनिष्टकारी योग से छुटकारे का उपाय
नियमित रामरक्षा स्त्रोत का पाठ करें.
हर सोमवार को शंकरजी को बिल्वपत्र चढ़ाएं. रोज ऊँ हौं जूं सः मंत्र का 5 माला जप करें.
विधिपूर्वक रूद्राभिषेक कराएं.
घर के मंदिर में श्रीकृष्ण भगवान का चित्र रखकर नियमित ‘ऊँ नमः भगवते वासुदेवाय नमः मंत्र’ का 1 माला जप करें.
विधिपूर्वक महामृत्युज्जयं मंत्र का सवा लाख जाप करवाएं.
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