मृत्यु के बाद मृतक के पलंग और बिस्तर का क्या करना चाहिए? जानें क्या कहता है गरुड़ पुराण
Published by : Neha Kumari Updated At : 05 Jun 2026 11:11 AM
मृतक के कपड़े, बिस्तर और अन्य निजी वस्तुओं की सांकेतिक तस्वीर (एआई)
Garud Puran: मृत्यु के बाद मृतक के कपड़े, बिस्तर और अन्य निजी वस्तुओं के उपयोग को लेकर विशेष नियम बताए गए हैं. मान्यता है कि इन नियमों का पालन करने से घर में सकारात्मकता बनी रहती है, वहीं इनके उल्लंघन से घर में नकारात्मकता और मानसिक तनाव का वातावरण बन सकता है.
Garud Puran: सनातन धर्म में मृत्यु को जीवन का अंत नहीं, बल्कि आत्मा की एक नई यात्रा की शुरुआत माना गया है. हिंदू धर्म के 18 पुराणों में से एक गरुड़ पुराण में जन्म, मृत्यु और उसके बाद की अवस्थाओं का विस्तृत वर्णन मिलता है. अक्सर किसी प्रियजन के निधन के बाद परिवार के लोग उनकी यादों को संजोने के लिए उनके कपड़े, बिस्तर और रोजमर्रा की उपयोगी वस्तुओं को अपने पास रख लेते हैं या उनका इस्तेमाल करने लगते हैं. लेकिन क्या शास्त्रों के अनुसार ऐसा करना उचित है? गरुड़ पुराण में मृतक की व्यक्तिगत वस्तुओं के उपयोग को लेकर कुछ नियम बताए गए हैं. मान्यता है कि इन नियमों का पालन न करने पर घर में नकारात्मकता और मानसिक अशांति का वातावरण बन सकता है. आइए जानते हैं इस विषय में गरुड़ पुराण क्या कहता है.
मृतक के कपड़े और बिस्तर का क्या करें?
कपड़े और बिस्तर (बेडशीट, चादर, कंबल आदि) किसी भी व्यक्ति के सबसे निकट रहने वाली वस्तुएं होती हैं. गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु के बाद भी कुछ समय तक व्यक्ति की सूक्ष्म ऊर्जा और सांसारिक मोह इन वस्तुओं से जुड़ा रह सकता है.
मान्यता है कि यदि परिवार का कोई सदस्य मृत व्यक्ति के कपड़े पहनता है या उसके बिस्तर का उपयोग करता है, तो वह उसकी ऊर्जा से प्रभावित हो सकता है. इससे मानसिक तनाव, डरावने सपने, भय या चिड़चिड़ापन जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं. कुछ मान्यताओं में इसे पितृ दोष से भी जोड़कर देखा जाता है, क्योंकि इससे आत्मा का सांसारिक मोह समाप्त होने में बाधा आ सकती है.
गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु के बाद मृतक के कपड़ों और बिस्तर को अच्छी तरह साफ करके किसी गरीब, जरूरतमंद व्यक्ति या आश्रम में दान कर देना चाहिए. इन वस्तुओं को लंबे समय तक घर में रखने से बचने की सलाह दी जाती है.
मृतक के पलंग का क्या करें?
गरुड़ पुराण के अनुसार, यदि संभव हो तो मृतक का पलंग किसी जरूरतमंद व्यक्ति या ब्राह्मण को दान कर देना चाहिए. माना जाता है कि व्यक्ति अपने जीवन का बड़ा हिस्सा इसी पर विश्राम करते हुए बिताता है, इसलिए उसकी शारीरिक और मानसिक ऊर्जा इससे जुड़ी रहती है. यदि आर्थिक या अन्य कारणों से पलंग का दान करना संभव न हो, तो उसे घर में रखा जा सकता है. हालांकि, बिना शुद्धिकरण के उसका उपयोग नहीं करना चाहिए.
इसके लिए पलंग को धूप में अच्छी तरह सुखाएं, उसकी साफ-सफाई करें और उस पर गंगाजल का छिड़काव कर शुद्ध करें. शुद्धिकरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही परिवार का कोई अन्य सदस्य उसका उपयोग कर सकता है.
शुद्धिकरण के बाद करें दान
हिंदू परंपराओं के अनुसार, परिवार में किसी सदस्य के निधन के बाद लगभग 10 से 13 दिनों तक सूतक काल (शोक अवधि) माना जाता है. इस दौरान पूजा-पाठ और अन्य शुभ कार्यों से परहेज किया जाता है. मान्यता है कि इस अवधि में घर का वातावरण शोकमय और भारी रहता है.
सूतक काल समाप्त होने के बाद पूरे घर का शुद्धिकरण किया जाता है. इसके पश्चात मृतक की वस्तुओं, कपड़ों और बिस्तर आदि का दान करना शुभ माना जाता है. गरुड़ पुराण के अनुसार, ऐसा करने से मृत आत्मा का सांसारिक वस्तुओं और अपने परिजनों के प्रति मोह कम होता है, जिससे उसकी आगे की यात्रा सरल और बाधारहित बनती है.
यहां पढ़ें धर्म से जुड़ी बड़ी खबरें: Religion News in Hindi – Spiritual News, Hindi Religion News, Today Panchang, Astrology at Prabhat Khabar
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Neha Kumari
नेहा कुमारी प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं. उन्हें लेखन के क्षेत्र में एक वर्ष से अधिक का अनुभव है. पिछले छह महीनों से वे राशिफल और धर्म से जुड़ी खबरों पर काम कर रही हैं. उनका मुख्य कार्य व्रत-त्योहारों, पौराणिक कथाओं और भारतीय रीति-रिवाजों से जुड़ी जानकारी को सरल भाषा में लोगों तक पहुंचाना है. नेहा का हमेशा यह प्रयास रहता है कि वे कठिन से कठिन विषय को भी इतना आसान और रोचक बना दें कि हर कोई उसे सहजता से पढ़ और समझ सके. उनका मानना है कि यदि धर्म और संस्कृति से जुड़ी जानकारी सरल शब्दों में मिले, तो लोग अपनी परंपराओं से बेहतर तरीके से जुड़ पाते हैं. डिजिटल मीडिया में अपने करियर की शुरुआत उन्होंने प्रभात खबर में ही ‘नेशनल’ और ‘वर्ल्ड’ डेस्क पर छह महीने की इंटर्नशिप के साथ की थी. इस दौरान उन्होंने रियल-टाइम खबरों पर काम करना, तेजी और सटीकता के साथ कंटेंट लिखना, ट्रेंडिंग विषयों की पहचान करना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा. इस अनुभव ने उनकी न्यूज़ सेंस, लेखन क्षमता और खबरों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने की समझ को और अधिक मजबूत बनाया.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










