कौन हैं अयातुल्ला अलीरेजा अराफी, जिन्हें बनाया गया है ईरान का कार्यवाहक सुप्रीम लीडर

Edited by Rajneesh Anand
Updated:
विज्ञापन

अयातुल्ला अलीरेजा, फोटो एक्स

Ayatollah Arafi : ईरान में कार्यवाहक सुप्रीम लीडर के तौर पर अयातुल्ला अलीरेजा अराफी की नियुक्ति कर दी गई है. अराफी अयातुल्ला अली खामेनेई की जगह अभी ईरान की व्यवस्था संभालेंगे. ईरान के इतिहास में अबतक सिर्फ दो सुप्रीम लीडर हुए हैं. पहले अयातुल्ला रुहोल्ला खोमैनी थे, जिन्होंने इस्लामिक क्रांति के बाद 1979 में ईरान की कमान संभाली थी और दूसरे अयातुल्ला खामेनेई थे, जिनकी मौत अमेरिका और इजरायल के सैन्य हमलों में हुई है.

विज्ञापन

Ayatollah Arafi : 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद उनके उत्तराधिकारी और कार्यवाहक सुप्रीम लीडर के रूप में अयातुल्ला अलीरेजा अराफी को ईरान की बागडोर सौंपी गई है. अयातुल्ला अराफी एक मौलवी हैं और उनकी उम्र 67 वर्ष है.

कौन हैं अयातुल्ला अलीरेजा अराफी?

अयातुल्ला अलीरेजा अराफी पेशे से एक अनुभवी मौलवी हैं. उनके बारे में यह कहा जा रहा है कि वे अयातुल्ला खामेनेई के काफी करीबी थे. ईरानी स्टूडेंट्स न्यूज एजेंसी (ISNA) की ओर से यह जानकारी सामने आयी है कि अयातुल्ला अराफी को लीडरशिप काउंसिल का ज्यूरिस्ट सदस्य नियुक्त किया गया है. तीन सदस्यों वाली लीडरशिप काउंसिल में राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और चीफ जस्टिस घोलमहुसैन मोहसेनी एजेई भी शामिल हैं. अराफी अभी असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के डिप्टी चेयरमैन के तौर पर काम कर रहे हैं, जो सुप्रीम लीडर को नियुक्त करती है. उनकी उम्र 67 साल है.

विभिन्न विषयों पर एक्सप्लेनर और विशेष आलेख पढ़ने के लिए क्लिक करें


ईरान में सुप्रीम लीडर का पद खाली हो जाये , तो क्या है व्यवस्था?

ईरान के संविधान के अनुसार अगर वहां के सुप्रीम लीडर का पद खाली हो जाए तो एक अस्थायी लीडरशिप काउंसिल बनाई जाती है, जिसमें राष्ट्रपति, न्यायपालिका प्रमुख और गार्जियन काउंसिल का एक ज्यूरिस्ट सदस्य शामिल हो सकता है. अराफी की नियुक्ति इसी ज्यूरिस्ट सदस्य के तौर पर हुई है जो यह सुनिश्चित करेगा कि देश के फैसले इस्लामी कानून और संविधान के अनुरूप हों. ईरान का सुप्रीम लीडर देश की मिलिट्री का कमांडर-इन-चीफ होता है, इसके अलावा ताकतवर रिवोल्यूशनरी गार्ड भी उनके असर वाले सर्कल का हिस्सा होता है.

ये भी पढ़ें : क्या ईरान को नेस्तनाबूद करने के लिए सऊदी अरब और यूएई ने अमेरिका और इजरायल को उकसाया?

एसआईआर के बाद बंगाल में जारी होना शुरू हुआ वोटरलिस्ट, किन लोगों को नहीं मिलेगा वोट देने का मौका?

टी20 विश्व कप के सेमीफाइनल में कौन-कौन सी 4 टीम खेलेगी मुकाबला, जानिए समीकरण

 क्या थी दिल्ली सरकार की शराब नीति, जिसने अरविंद केजरीवाल को पहुंचाया था जेल, अब हुए बरी

विज्ञापन
Rajneesh Anand

लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola