Ajit Pawar : सेल्फमेड नेता अजित पवार, जो पिता की असमय मौत के बाद टूटे नहीं; मजबूती से उभरे

Updated at : 29 Jan 2026 8:20 AM (IST)
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Ajit Pawar

अजित पवार

Ajit Pawar : अजित पवार यानी महाराष्ट्र की राजनीति का एक ऐसा सितारा जिसकी तूती बोलती थी और उन्होंने अपनी यह जगह मेहनत और संघर्ष से बनाई थी. भारतीय राजनीति के दिग्गज शरद पवार के भतीजे होने के बावजूद उन्होंने कभी भी उनकी पहुंच का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए नहीं किया. अजित पवार ने महाराष्ट्र की राजनीति में खुद को गढ़ा था.

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Ajit Pawar : महाराष्ट्र की राजनीति के एक होनहार नेता अजित पवार को 28 जनवरी 2026 को काल ने महज 66 वर्ष की उम्र में लील लिया. उनका विमान बारामती, महाराष्ट्र में लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें अजित पवार की मौत हो गई. अजित पवार एक ऐसे नेता थे, जिन्होंने अपने लिए जगह खुद बनाई. वे छह बार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री रहे, उन्होंने कम बोलने और ज्यादा काम करने को अपने जीवन का मूलमंत्र बनाया था.

पिता की असमय मौत से टूटे नहीं, परिवार का बने सहारा

अजित पवार जब काॅलेज में थे उसी वक्त उनके पिता की मौत हो गई. पिता की मौत के बाद अजित पवार को परिवार की जिम्मेदारी उठानी पड़ी और पढ़ाई छोड़नी पड़ी. उस वक्त शरद पवार राजनीति में अपनी जगह बना चुके थे, लेकिन अजित पवार ने उनका सहारा नहीं लिया, बल्कि अपने लिए राजनीति में खुद जगह बनाई. वे जमीन से जुड़े नेता थे और इसके लिए उन्होंने जमीन से जुड़कर काम किया.

बारामती में अजित पवार ने अपने लिए बनाई खास जगह

Ajit-Pawar-in-Pune
अजित पवार एक जननेता

पिता की मौत के बाद अजित पवार पर हर तरह की जिम्मेदारी आ गई थी, बारामती में उस समय किसान संकट में थे. चाचा शरद पवार के पदचिह्नों पर चलते हुए अजित पवार ने बारामती के किसानों के साथ काम किया और उनकी समस्याओं को अपना समझा. इस तरह वे एक जननेता के रूप में उभरे.

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बारामती विधानसभा क्षेत्र से 7 बार चुनाव जीते

अजित पवार ने 1982 में राजनीति में कदम रखा और बारामती विधानसभा क्षेत्र से 7 बार चुनाव जीते. उन्होंने 1991 में बारामती लोकसभा क्षेत्र से चुनाव जीता, लेकिन उन्होंने यह सीट अपने चाचा शरद पवार के लिए छोड़ दी थी.उन्होंने 1991 से 1992 तक सुधाकर राव नाइक की सरकार में कृषि और बिजली राज्य मंत्री के तौर पर काम किया. 1992 में शरद पवार मुख्यमंत्री बने, तो वे मृदा संरक्षण, बिजली और योजना राज्य मंत्री बने. 1999 में, INC-NCP गठबंधन सरकार के हिस्से के तौर पर, वे सिंचाई मंत्री बने. इसके अलावा, 2003 में वे ग्रामीण विकास मंत्री बने. 2004 के विधानसभा चुनावों में INC-NCP गठबंधन की जीत के बाद, वे देशमुख और बाद में अशोक चव्हाण की कैबिनेट में जल संसाधन मंत्री बनाए गए. अजित पवार महाराष्ट्र के सबसे लंबे समय तक उपमुख्यमंत्री रहने वाले नेता थे. वे छह बार प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बने. उन्होंने पृथ्वीराज चव्हाण, देवेंद्र फडणवीस, उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे के कार्यकाल में उपमुख्यमंत्री का पद संभाला.

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Rajneesh Anand

लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

राजनीति,सामाजिक, इतिहास, खेल और महिला संबंधी विषयों पर गहन लेखन किया है. तथ्यपरक रिपोर्टिंग और विश्लेषणात्मक लेखन में रुचि. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक. IM4Change, झारखंड सरकार तथा सेव द चिल्ड्रन के फेलो के रूप में कार्य किया है. पत्रकारिता के प्रति जुनून है. प्रिंट एवं डिजिटल मीडिया में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव.

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