हिंदू धर्म के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं शंकराचार्य, कैसे होता है चयन और क्यों पड़ी थी जरूरत?

Updated at : 27 Jan 2026 2:51 PM (IST)
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Shankaracharya and Yogi Adityanath

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और योगी आदित्यनाथ

Shankaracharya in India : आदि शंकराचार्य ने हिंदू धर्म को एकसूत्र में पिरोने और उसकी रक्षा के लिए पूरे देश में चार पीठ की स्थापना की थी और वहां अपने शिष्यों को संत के रूप में नियुक्त किया था, जिनके ऊपर हिंदू धर्म और वेदों की रक्षा का भार था. इन्हीं संतों को शंकराचार्य कहा जाता है. शंकराचार्य का पद पूरी तरह धार्मिक होता है और यह गुरु–शिष्य की परंपरा से चलता है. इस पद का राजनीति से कोई लेना–देना नहीं है.

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 Shankaracharya in India : प्रयागराज के माघ मेले के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और यूपी सरकार के बीच ठन गई. वजह, स्नान से जुड़ा था. विवाद इतना बढ़ा कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आमने–सामने आ गए. शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने सीएम योगी से इस्तीफा मांगा, तो सीएम योगी ने भी किसी का नाम लिए बिना यह कहा कि सनातन धर्म को कालनेमियों से बचाने की जरूरत है.

सीएम योगी के इस बयान से अच्छा–खाना बवाल मच गया है और विपक्ष इसे शंकराचार्य और सनातन धर्म का अपमान बता रहा है. यहां सवाल यह है कि जिस शंकराचार्य पर सनातन की रक्षा का भार था, आखिर वही शंकराचार्य इसके खिलाफ कैसे हो गए?   यहां यह भी समझने की जरूरत है कि आखिर शंकराचार्य हैं कौन और इनका चयन कैसे होता है?

आदि शंकराचार्य ने की थी शंकराचार्य बनाने की शुरुआत

Adi-Shankaracharya
आदि शंकराचार्य अपने शिष्यों के साथ

आदि शंकराचार्य, महान दार्शनिक और हिंदू धर्म के ज्ञाता थे. वे जिस काल में हुए उस वक्त देश में हिंदू धर्म या सनातन धर्म खतरे में था. बौद्ध और जैन धर्म का प्रभाव बहुत बढ़ गया था और सनातन धर्म बिलकुल बिखर गया था. उस वक्त आदि शंकराचार्य ने सनातन धर्म को एकसूत्र में पिरोने और इसकी रक्षा के लिए देश की चारों दिशाओं में मठ स्थापित किया, जिसे पीठ कहा जाता है और वहां अपने शिष्यों को संत के रूप में स्थापित किया, जो शंकराचार्य कहलाए. इन संतों के ऊपर सनातन धर्म के आधार वेदों की रक्षा का भार था. शंकराचार्य आजीवन संन्यासी रहते हैं.

पीठस्थानसंबंधित वेदशंकराचार्य की जिम्मेदारी
श्रृंगेरी पीठकर्नाटकयजुर्वेदवेदांत, संन्यास परंपरा
पुरी गोवर्धन पीठओडिशाऋग्वेदमंत्र परंपरा, यज्ञ दर्शन
द्वारिका शारदा पीठगुजरातसामवेदउपासना, भक्ति, गायन
ज्योतिर्मठबद्रीनाथअथर्ववेददर्शन, तंत्र, सामाजिक धर्म

गुरु–शिष्य परंपरा के तहत होती है शंकराचार्य की नियुक्ति

आदि शंकराचार्य ने अपने चार शिष्यों पद्मपाद,सुरेश्वराचार्य,हस्तामलक और तोटकाचार्य का पट्टाभिषेक कर उन्हें शंकराचार्य बनाया था. यह पट्टाभिषेक कोई बड़ा आयोजन या समारोह नहीं था, बल्कि यह सिर्फ और सिर्फ एक गुरु द्वारा अपने शिष्य को प्रदान की गई एक जिम्मेदारी थी. इस जिम्मेदारी के तहत चारों पीठों के शंकराचार्यों पर सनातन धर्म की रक्षा और चारों वेदों में से एक वेद की रक्षा और उसकी व्याख्या का प्रभार था. जब शंकराचार्य का पट्टाभिषेक होता है, जो उसे अपने गुरु से यह सहमति मिलती है कि वह उनके बाद सनातन की रक्षा का प्रभार संभालेगा. इसी वजह से शंकराचार्य के पद का सनातन धर्म में बहुत आदर रहा है.

कौन है कालनेमि, जिसके आधुनिक स्वरूपों से सीएम योगी ने किया सावधान?

कालनेमि रामायण के काल का एक मायावी राक्षस था. वह रावण का बहुत खास था. जब राम–रावण युद्ध के दौरान रावण के बेटे मेघनाद के शक्तिबाण से लक्ष्मण मूर्छित हो गए थे, तो उनके इलाज के लिए संजीवनी बूटी की जरूरत थी और रामभक्त हनुमान उसे लेने गए थे. हिमालय के द्रोणगिरि पर्वत से जब हनुमान संजीवनी बूटी लाने गए और रावण को इसकी सूचना मिली, तो उसने अपने मायावी राक्षस कालनेमि को वहां भेजा, ताकि वह उन्हें रोक सके. कालनेमि ने अपनी माया से इसका प्रयास भी किया, लेकिन हनुमान उसे पहचान गए और उसकी हत्या कर दी. कालनेमि को धूर्त और पाखंडी माना जाता है. 

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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर क्या है विवाद?

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को उनके गुरु ने अपने जीवन काल में अपना उत्तराधिकारी घोषित नहीं किया था. उनकी मृत्यु के बाद अविमुक्तेश्वरानंद को उत्तराधिकारी घोषित किया गया और पट्टाभिषेक की विधि पूरी हुई. उनकी नियुक्ति से संत समाज के कुछ लोगों में असंतोष था, जिसकी वजह से उनके उत्तराधिकार का मामला कोर्ट तक पहुंचा था.

शंकराचार्य कहां-कहां होते हैं?

देश में कुल चार स्थानों पर शंकराचार्य होते हैं. श्रृंगेरी पीठ, पुरी गोवर्धन पीठ, द्वारिका पीठ और ज्योतिर्मठ.

चारों पीठों के पहले शंकराचार्य कौन-कौन थे?

पद्मपाद,सुरेश्वराचार्य,हस्तामलक और तोटकाचार्य.

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Rajneesh Anand

लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

राजनीति,सामाजिक, इतिहास, खेल और महिला संबंधी विषयों पर गहन लेखन किया है. तथ्यपरक रिपोर्टिंग और विश्लेषणात्मक लेखन में रुचि. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक. IM4Change, झारखंड सरकार तथा सेव द चिल्ड्रन के फेलो के रूप में कार्य किया है. पत्रकारिता के प्रति जुनून है. प्रिंट एवं डिजिटल मीडिया में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव.

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