स्वास्थ्य देखभाल में अग्रणी भूमिका निभाता योग, पढ़ें केंद्रीय राज्यमंत्री प्रतापराव जाधव का आलेख

योग पर केंद्रीय राज्यमंत्री प्रतापराव जाधव का आलेख
आज 13 मार्च है, जो 21 जून को मनाये जाने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के 100 दिन के काउंटडाउन का संकेत है. यह हमें सोचने का अवसर देता है कि किस प्रकार योग एक प्राचीन पद्धति से लेकर वैश्विक रूप से मान्यता प्राप्त, साक्ष्य आधारित स्वास्थ्य और कल्याण मार्ग के रूप में विकसित हो गया है.
प्रतापराव जाधव
आयुष मंत्रालय में केंद्रीय राज्यमंत्री, स्वतंत्र प्रभार, तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में राज्यमंत्री
Yoga: बीते दशक में योग को केवल पारंपरिक स्वास्थ्य पद्धति के रूप में ही नहीं सराहा गया, बल्कि इसे स्वास्थ्य और कल्याण के लिए साक्ष्य आधारित दृष्टिकोण के रूप में भी पहचाना जाने लगा है. वैज्ञानिक अनुसंधान, डिजिटल नवाचार और वैश्विक सहयोग अब हमें योग को केवल देश की सांस्कृतिक विरासत के रूप में ही नहीं, एक सशक्त जन-स्वास्थ्य हस्तक्षेप के रूप में समझने में भी मदद कर रहे हैं. मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान (एमडीएनआइवाइ) को पारंपरिक चिकित्सा (योग) के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के सहयोगी केंद्र के रूप में नामित किया गया है, और योग अनुसंधान में भारत की नेतृत्वकारी भूमिका को और भी मजबूती प्रदान करते हुए 2025-2029 के लिए इसे फिर से नामित किया गया है.
यह पहचान गैर-संचारी रोग (एनसीडी) के लिए साक्ष्य आधारित योग हस्तक्षेपों को बढ़ावा देने में संस्थान की बढ़ती भूमिका को दिखाती है. इस पहल के प्रमुख साझेदारों में आयुष मंत्रालय, एम्स दिल्ली, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज, केंद्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान परिषद, और इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड एलाइड साइंसेज, दिल्ली शामिल हैं.
इन सहयोगों के माध्यम से केंद्र मधुमेह, मोटापा और तनाव से संबंधित विकारों जैसे गैर-संचारी रोगों के लिए योग आधारित हस्तक्षेपों पर तकनीकी दिशानिर्देश विकसित कर रहा है. इन प्रयासों में अंतरराष्ट्रीय संगठन भी साझेदारी कर रहे हैं. इससे योग की वैज्ञानिक आधारशिला और मजबूत हो रही है तथा निवारक स्वास्थ्य देखभाल के लिए व्यापक रूप से लागू किये जा सकने वाले, किफायती और साक्ष्य समर्थित प्रभावी साधन के तौर पर योग की क्षमता प्रदर्शित हो रही है. संस्थागत स्तर पर एमडीएनआइवाइ योग की वैज्ञानिक आधारशिला को मजबूती प्रदान करना जारी रखे हुए है.
शरीर क्रिया विज्ञान, जैव रसायन, बायोमैकेनिक्स और मनोविज्ञान की अनुसंधान प्रयोगशालाओं के माध्यम से यह संस्थान योग के मनो-शारीरिक और जैव-रासायनिक प्रभावों, उम्र बढ़ने में इसकी भूमिका तथा जीवनशैली से जुड़े विकारों पर इसके प्रभाव का अध्ययन करता है. यह कार्य पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ जोड़ने की दिशा में भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है. डिजिटल प्लेटफॉर्मों ने योग की पहुंच को और अधिक बढ़ाया है, जिससे साक्ष्य आधारित पद्धतियां लोगों के जीवन का हिस्सा बन रही हैं.
एम-योगा मोबाइल एप्लिकेशन और वाइ-ब्रेक प्रोटोकॉल जैसे प्रयास यह दिखाते हैं कि योग की प्रामाणिकता और चिकित्सकीय महत्व बनाये रखते हुए उसे बड़े स्तर पर पहुंचाया जा सकता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के सहयोग से विकसित किये गये एम-योगा प्लेटफॉर्म पर 1.1 लाख से अधिक डाउनलोड दर्ज किये जा चुके हैं, जो सुलभ डिजिटल वेलनेस टूल्स में बढ़ती रुचि को दर्शाता है.
वहीं कार्यस्थल योग कार्यक्रम वाइ-ब्रेक से, जो काम के दौरान पांच-दस मिनट का सरल योग ब्रेक है, अब तक 33 लाख से अधिक सरकारी अधिकारियों को लाभ मिल चुका है. इन पहलों से प्राप्त अनुसंधान निष्कर्ष और सहभागिता विश्लेषण अत्यंत उत्साहजनक हैं. वाइ ब्रेक अभ्यास से कुछ ही सप्ताहों में तनाव में लगभग 40 फीसदी तक कमी देखी गयी है. शारीरिक लाभों में गर्दन, कंधे और कमर के दर्द में कमी, श्वास अभ्यास से सांस लेने की क्षमता में सुधार और संपूर्ण जीवन शक्ति में वृद्धि शामिल हैं.
एमडीएनआइवाइ और केंद्रीय योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा अनुसंधान परिषद द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित राष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा सम्मेलन, 2026 के दौरान भी वैज्ञानिक प्रमाण के महत्व पर जोर दिया गया. विशेषज्ञों ने रेखांकित किया कि सुदृढ़ अनुसंधान, अंतरविषयक सहयोग, और प्रभावी डिजिटल सहभागिता आधुनिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों में योग को एकीकृत करने और स्पष्ट स्वास्थ्य परिणाम सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य हैं.
ये घटनाक्रम योग के प्रति वैश्विक दृष्टिकोण में महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाते हैं. अब योग जन-स्वास्थ्य, कौशल विकास और वेलनेस आधारित रोजगार के अवसरों के मार्ग के रूप में उभर रहा है. परंपरा को विज्ञान और प्रौद्योगिकी से जोड़ते हुए योग ग्लोबल योग क्रांति की प्रेरक शक्ति के रूप में उभर रहा है तथा अंतरराष्ट्रीय वेलनेस क्षेत्र में भारत के नेतृत्व को और मजबूत कर रहा है.
आज 13 मार्च है, जो 21 जून को मनाये जाने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के 100 दिन के काउंटडाउन का संकेत है. यह हमें सोचने का अवसर देता है कि किस प्रकार योग एक प्राचीन पद्धति से लेकर वैश्विक रूप से मान्यता प्राप्त, साक्ष्य आधारित स्वास्थ्य और कल्याण मार्ग के रूप में विकसित हो गया है. ये सौ दिन हमें याद दिलायेंगे कि हम दैनिक योग अभ्यास शुरू करें या उसे नवीनीकृत करें, और अपने परिवार, मित्रों और समुदायों को योग को जीवन जीने का तरीका बनाने के लिए प्रेरित करें.
योग को दैनिक जीवन में शामिल कर हम केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य को ही मजबूत नहीं करते, सामूहिक कल्याण, संगठनात्मक दक्षता और सामाजिक समरसता को भी बढ़ावा देते हैं. आज अनुसंधान, प्रौद्योगिकी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से भारत योग की अनंत ज्ञान परंपरा को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित और सार्वभौमिक रूप से सुलभ मार्ग में बदलने का अगला निर्णायक कदम उठा रहा है.
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