ePaper

सोशल मीडिया व जेनरेशन जेड

Updated at : 29 Jul 2025 6:00 AM (IST)
विज्ञापन
Generation Z

जेनरेशन जेड

Generation Z : लेकिन दुर्योग से यह वह पीढ़ी है, जो दुनियाभर में सांस्कृतिक पुनरुत्थान, राजनीतिक कट्टरवाद, वैश्विक संघर्ष, जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण के क्षरण तथा बेरोजगारी की गवाह है. राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर व्याप्त प्रवृत्तियों के कारण भी यह पीढ़ी बेचैन और हताश है.

विज्ञापन

Generation Z : यूरोपीय आयोग ने अपने नये अध्ययन में जिस तरह जेनरेशन जेड को सोशल मीडिया के कारण तनाव और थकान से जूझ रहा बताया है, वह बेहद चिंतित करने वाला है. वर्ष 1997 से 2010 के बीच पैदा हुए बच्चों की यह पीढ़ी पहली ऐसी पीढ़ी है, जिसे कम उम्र में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म मिला. डिजिटल युग में पली-बढ़ी यह पीढ़ी तकनीक, सोशल मीडिया और इंटरनेट के साथ सहज तो है ही, यह वह पीढ़ी भी है, जो पारंपरिक मानदंडों को चुनौती देती है तथा अपने मूल्यों, महत्वाकांक्षाओं व जीवनशैली में नये दृष्टिकोण का परिचय देने के कारण जानी जाती है.

लेकिन यूरोपीय आयोग का अध्ययन बताता है कि सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग के कारण इस पीढ़ी के किशोरों तथा युवाओं में मानसिक थकान, चिंता, फोमो (फियर ऑफ मिसिंग आउट), थकान और फोन में उलझे रहने जैसे व्यवहार तेजी से बढ़ रहे हैं. वर्ष 2024 की वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट से भी यह तथ्य सामने आया था कि जेनरेशन जेड आयुवर्ग के युवा सबसे दुखी हैं और उनमें तनाव या अवसाद की वजह पढ़ाई या करियर का दबाव नहीं, बल्कि सोशल मीडिया है. दरअसल कोविड महामारी के दौरान जब पूरी दुनिया में लॉकडाउन लग गया था और लोगों का जीवन इंटरनेट केंद्रित हो गया था, तब इस पीढ़ी के लिए पढ़ाई से लेकर मनोरंजन और सामाजिक जीवन-सब कुछ ऑनलाइन हो गया था. इस पीढ़ी पर शिक्षा से लेकर रोजगार तक के क्षेत्र में बेहतर करने का भारी दबाव है.

लेकिन दुर्योग से यह वह पीढ़ी है, जो दुनियाभर में सांस्कृतिक पुनरुत्थान, राजनीतिक कट्टरवाद, वैश्विक संघर्ष, जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण के क्षरण तथा बेरोजगारी की गवाह है. राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर व्याप्त प्रवृत्तियों के कारण भी यह पीढ़ी बेचैन और हताश है. चूंकि सोशल मीडिया के कंटेंट ज्यादातर काल्पनिक होते हैं, लेकिन यह पीढ़ी उसी सोशल मीडिया पर ज्यादा वक्त बिताती है, ऐसे में, दुनिया की कठोर वास्तविकताओं से सामना होने पर इस पीढ़ी का परेशान और नाखुश होना स्वाभाविक है.

सोशल मीडिया ने इस पीढ़ी के आत्मविश्वास को भी कम किया है. इसका समाधान क्या है? इस समस्या को देखते हुए कई देशों में, खासकर किशोरों के लिए, सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर सख्त नियम लागू किये गये हैं. सोशल मीडिया की लत कम करने के लिए इसका सही इस्तेमाल करना होगा. यानी सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि स्वस्थ संवाद और शिक्षा के लिए इसका उपयोग करना होगा तथा स्क्रीन टाइम बैलेंस का भी ध्यान रखना होगा.

विज्ञापन
संपादकीय

लेखक के बारे में

By संपादकीय

संपादकीय is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola