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सड़क दुर्घटना में घायलों का नि:शुल्क उपचार

Updated at : 13 Jan 2025 12:05 AM (IST)
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Treatment in hospital

घायलों का नि:शुल्क उपचार

health scheme : योजना को लागू करने की जिम्मेदारी राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) की होगी. एनएचए पुलिस, अस्पताल और राज्य स्वास्थ्य एजेंसियों के साथ मिलकर इस योजना के कार्यान्वयन की निगरानी करेगी.

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Health Scheme: सड़क दुर्घटना में घायलों को नि:शुल्क उपचार मिले, इसके लिए भारत सरकार एक नयी योजना लाने जा रही है. इस योजना के बारे में बीते सप्ताह केंद्रीय केंद्रीय सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने जानकारी दी. गडकरी ने कहा कि यदि दुर्घटना के बाद पुलिस को 24 घंटे के भीतर सूचित किया जाता है, तो योजना के अंतर्गत सात दिनों तक पीड़ित का नि:शुल्क उपचार किया जायेगा. यह एक कैशलेस स्कीम है, जिसके तहत घायल के उपचार पर सरकार अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक खर्च करेगी. जो व्यक्ति घायल की जान बचायेगा, उसे भी सरकार की ओर से पांच हजार रुपये का पुरस्कार दिया जायेगा. इसके अतिरिक्त, हिट-एंड-रन मामलों में मृत व्यक्ति के परिवारों को दो लाख लाख रुपये का मुआवजा भी दिया जायेगा.

योजना को लागू करने की जिम्मेदारी राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) की होगी. एनएचए पुलिस, अस्पताल और राज्य स्वास्थ्य एजेंसियों के साथ मिलकर इस योजना के कार्यान्वयन की निगरानी करेगी. सूचना मिलने के बाद पुलिस अस्पतालों को सभी जरूरी दस्तावेज उपलब्ध करायेगी ताकि नि:शुल्क इलाज की व्यवस्था हो सके. घायलों का नि:शुल्क इलाज एनएचए में पंजीकृत अस्पतालों में ही हो सकेगा. मार्च से यह योजना राष्ट्रीय स्तर पर लागू की जायेगी. हालिया घोषित योजना नयी नहीं है, बल्कि इसकी शुरुआत 14 मार्च, 2024 को चंडीगढ़ में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में की गयी थी, जिसे बाद में छह अन्य राज्यों में विस्तारित कर दिया गया था.

इस योजना का मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं मे घायलों को शीघ्रातिशीघ्र चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है और पीड़ित के परिवार पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करना है. राज्य परिवहन मंत्रियों के साथ बैठक के बाद गडकरी ने कहा कि सड़क सुरक्षा हमारी पहली प्राथमिकता है. गडकरी ने सड़क दुघर्टना के जो आंकड़े बताये वे चिंता उत्पन्न करने वाले हैं.

इन आंकड़ों के अनुसार अकेले 2024 में ही सड़क दुर्घटना में 1.8 लाख लोगों ने अपनी जान गंवायी है. इनमें से 30,000 लोगों की जान केवल हेलमेट न पहनने के कारण हुई. सड़क हादसों में मरने वालों में 66 प्रतिशत 18 से 34 आयु वर्ग के लोग थे. वहीं 10,000 बच्चों की मौत स्कूलों और कॉलेजों में गलत एंट्री और एग्जिट प्वाइंट के चलते हुई. सुरक्षित ड्राइविंग और दुर्घटनाओं की तुरंत रिपोर्ट के लिए जागरूकता अभियान शुरू करने के साथ ही दुर्घटनाओं को कम करने के लिए बेहतर सड़क बुनियादी ढांचे और चेतावनी संकेतक में निवेश और वाहन सुरक्षा सुविधाओं को लेकर सख्त नियम लागू करना भी सरकार की प्राथमिकता में शामिल है.

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