बंद होना चाहिए प्राकृतिक संसाधनों का दोहन

आज पूरा विश्व जलवायु में हो रहे व्यापक परिवर्तन के कारण उत्पन्न समस्याओं से जूझ रहा है. भारत भी इससे अछूता नहीं है. कहीं समुद्री लहरें व तूफान, कहीं व्यापक गर्मी, कहीं सूखा, तो कहीं बाढ़ जैसे हालात दिख रहे हैं. इन सभी का प्रमुख कारण जलवायु का परिवर्तन होना है. जलवायु में परिवर्तन के […]
आज पूरा विश्व जलवायु में हो रहे व्यापक परिवर्तन के कारण उत्पन्न समस्याओं से जूझ रहा है. भारत भी इससे अछूता नहीं है. कहीं समुद्री लहरें व तूफान, कहीं व्यापक गर्मी, कहीं सूखा, तो कहीं बाढ़ जैसे हालात दिख रहे हैं.
इन सभी का प्रमुख कारण जलवायु का परिवर्तन होना है. जलवायु में परिवर्तन के कारण मुख्य रूप से मौसमी दशाओं में ही परिवर्तन हो जाना है, जिसके कारण गर्मियों का मौसम प्रायः लंबा होना, सर्दियों का मौसम छोटा होना, वर्षा की मात्रा में कमी होना है.
जलवायु परिवर्तन बढ़ती जनसंख्या एवं मानव द्वारा प्राकृतिक संसाधनों के व्यापक दोहन से हो रहा है. इसका सबसे अधिक कुप्रभाव मानव जाति, जीव जंतुओं व परिस्थितिक तंत्रों पर पड़ता है. मानवीय क्रियाकलापों से वायुमंडल में हानिकारक गैसों की मात्रा बढ़ने से वायु प्रदूषण के अलावा अम्ल वर्षा व ग्रीन हाउस गैसों की मात्रा में वृद्धि होती जा रही है.
सौरभ भारद्वाज, रोसड़ा (समस्तीपुर)
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