आधार सुरक्षा जरूरी

आधार परियोजना दुनिया की सबसे बड़ी बायोमेट्रिक डिजिटल पहचान प्रणाली है और इसके अंतर्गत भारत में निवास करनेवाले 90 फीसदी से अधिक लोग पंजीकृत हैं. कई महत्वपूर्ण सेवाओं से लोगों की आधार संख्या जुड़ी हुई है. ऐसे में डेटा सुरक्षा और पंजीकृत लोगों की निजता की सुरक्षा का प्रश्न हमेशा चर्चा में रहता है. पिछले […]
आधार परियोजना दुनिया की सबसे बड़ी बायोमेट्रिक डिजिटल पहचान प्रणाली है और इसके अंतर्गत भारत में निवास करनेवाले 90 फीसदी से अधिक लोग पंजीकृत हैं. कई महत्वपूर्ण सेवाओं से लोगों की आधार संख्या जुड़ी हुई है. ऐसे में डेटा सुरक्षा और पंजीकृत लोगों की निजता की सुरक्षा का प्रश्न हमेशा चर्चा में रहता है.
पिछले साल सितंबर में सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ के निर्णय के बाद ऐसा लगा था कि सुरक्षा को लेकर अब निश्चिंत हुआ जा सकता है, परंतु स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने आधार डेटा के दुरुपयोग के मामले लाकर इस मुद्दे को फिर बहस के घेरे में ला दिया है. आधार प्राधिकरण की ओर से बैंकों को आधार पंजीकरण का लक्ष्य दिया गया है. इसके तहत पंजाब, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा और चंडीगढ़ में स्टेट बैंक द्वारा काम पर लगाये गये वेंडरों के डेटा का इस्तेमाल कर फर्जी पंजीकरण करने और खाते से पैसा निकालने के मामले सामने आये हैं.
हालांकि, प्राधिकरण ने बैंक के इस आरोप को खारिज कर दिया है, पर इस मसले पर गंभीरता से विचार जरूरी है. डेटा के अनधिकृत उपयोग और इसे अवैध तरीके से निकालने का एक मुकदमा दिल्ली हाइकोर्ट में चल रहा है. आधार कानून में संशोधन करने का विधेयक भी संसद में विचाराधीन है. सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद कुछ बदलाव की जरूरत है, पर अनेक जानकारों ने यह भी रेखांकित किया है कि इसमें डेटा और निजता की सुरक्षा के लिए मजबूत प्रावधान नहीं हैं.
भारत में डिजिटल फर्जीवाड़े और हैकिंग की घटनाएं बढ़ रही हैं. पिछले साल के मध्य में आये आंकड़ों के मुताबिक साल 2011 के बाद से आधार से जुड़ी ऐसी 164 घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें ज्यादातर 2018 में घटी हैं. इनमें अनेक मामले बैंकिंग धोखाधड़ी के हैं.
डिजिटल लेन-देन की ओर बढ़ती हमारी आर्थिकी के लिए यह बहुत चिंताजनक है, क्योंकि अन्य तरीकों- फोन से सूचनाएं लेना, सिम कार्ड व एटीएम कार्ड की नकल, ऑनलाइन खातों की हैंकिंग आदि, से लोगों के खाते से निकासी और फर्जी कागजातों के आधार पर कर्ज लेने के मामलों से बैंक और उपभोक्ता पहले से ही बहुत परेशान हैं. सरकार और बैंकों ने अपने स्तर पर सुरक्षा सुनिश्चित करने के कुछ उपाय जरूर किये हैं, पर व्यापक नीतिगत पहल की कमी बनी हुई है.
संशोधन विधेयक में आधार निर्देशों की अवहेलना करनेवाली कंपनियों पर आर्थिक दंड लगाने का प्रावधान सराहनीय है, लेकिन सरकार को उन चिंताओं पर भी ध्यान देना चाहिए, जिनमें कहा गया है कि इस विधेयक से सुप्रीम कोर्ट के कुछ निर्देश प्रभावहीन हो जायेंगे. डेटा सुरक्षा के दो अहम हिस्से हैं.
एक तो यह राष्ट्रीय सुरक्षा और अर्थव्यवस्था से जुड़ा हुआ है और दूसरा यह कि अक्सर निम्न और मध्य आयवर्गीय लोग डेटा में सेंधमारी का शिकार होते हैं. आधार प्रणाली को अधिकाधिक उपयोगी बनाने के लिए उसकी सुरक्षा की लगातार समीक्षा होती रहनी चाहिए तथा आवश्यक कानूनी और तकनीकी उपाय किये जाते रहने चाहिए.
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