धन पर फोकस बनाये रखें
Author Prabhat khabar digital desk
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आलोक पुराणिक वरिष्ठ व्यंग्यकार [email protected] आज धनतेरस है. धन के बगैर न तेरस मनायी जा सकती है, न चतुर्दशी, न अमावस्या. रोज ही धन की दरकार होती है, इसलिए इन्हें धन-एकादशी, धन-द्वितीया, धन-तृतीया, धन-चतुर्थी आिद संबोधन देना चाहिए. धन के बगैर किसी का काम ना चलना है. साधु-संत अपवाद हैं, क्योंकि वह छोटे-मोटे धन नहीं […]
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आलोक पुराणिक
वरिष्ठ व्यंग्यकार
आज धनतेरस है. धन के बगैर न तेरस मनायी जा सकती है, न चतुर्दशी, न अमावस्या. रोज ही धन की दरकार होती है, इसलिए इन्हें धन-एकादशी, धन-द्वितीया, धन-तृतीया, धन-चतुर्थी आिद संबोधन देना चाहिए. धन के बगैर किसी का काम ना चलना है. साधु-संत अपवाद हैं, क्योंकि वह छोटे-मोटे धन नहीं मोटे माल पकड़ने के चक्कर में होते हैं. भांति-भांति के बाबा इन दिनों अरेस्ट हो रहे हैं.
धन के चक्कर में आदमी क्या-क्या नहीं कर रहा है. 76 साल के अमिताभ बच्चन एक इश्तेहार में एक स्कूटर के पास खड़े होकर उसकी तारीफ कर रहे हैं. बच्चन साहब 76 में स्कूटर चलाओगे, तो जमाना क्या कहेगा और विदेशी क्या कहेंगे? इतनी कमाई पूरी जिंदगी करनेवाला बंदा भारत में इतना तक ना हिसाब-किताब जमा पाया कि उम्र के इस दौर में आराम कर लेता. अमिताभ बच्चन शायद ही किसी को कभी स्कूटर पर चलते दिखायी दें, पर वह स्कूटर की तारीफ जरूर करते दिखते हैं. जो काम आपको कभी करना ही नहीं है, काहे को उसका बखान इश्तेहार में कर रहे हैं भाई साब!
एक सुपरस्टार एक ट्रक चलाते दिखते हैं. ओ भाई, तू कभी ना चलानेवाला ट्रक, फिर क्यों झूठ सबको बताता है. अमिताभ बच्चन तो तमाम चैनलों पर स्कूटर ही नहीं च्यवनप्राश, ज्वेलरी, तेल वगैरह की दुकान चलाते हुए दिखते हैं.
इतनी उम्र में इतना काम? मतलब सवाल उठता है कि इनके घरवाले इतनी उम्र में इनको इतनी मेहनत करने क्यों दे रहे हैं. अब वक्त उनके आराम का है. क्यों वे इतनी दुकानें चलाते दिखते हैं. क्योंकि वे रोज धन-एकादशी, धन-द्वितीया आदि मनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.
साधु-संतों का इधर पतन हो गया है. पहले वे चरित्रवान होते थे, सिर्फ धन पर ध्यान लगाते थे और लोगों से रकम ऐंठते थे. पर इधर साधुओं ने अपना ध्यान सुंदरियों पर लगा दिया है. गौर से देखें, तमाम तरह के महाराज-वारदाती महाराज से लेकर अलां बाबा या फलां बाबा रेप वगैरह के चक्कर में अंदर जा रहे हैं. ठगी वगैरह के मामलों में बाबा साधु अंदर नहीं हो रहे हैं. ठगी सहज कर्म है, बाबा करेगा ही, ऐसी जनसामान्य में मान्यता है.
पर रेप वगैरह बाबा करे, यह बात अभी जनसामान्य को मंजूर नहीं है. इसलिए जब से बाबा ठगी के रास्ते से विमुख होकर रेप वगैरह के रास्ते पर चल पड़े, वे अंदर जाने लगे. सिर्फ धन पर फोकस रखते, तो बाबा पतन से बच सकते थे. सिर्फ धन पर ध्यान लगानेवाले बाबा लगातार फल-फूल रहे हैं.
हम कह सकते हैं कि आम आदमी के लिए तो धन का महत्व है ही, बाबाओं के लिए धन का विशेष महत्व है. धन के अलावा किसी और चीज पर ध्यान लगाने से बाबा भटक जाते हैं, पतित हो जाते हैं और अंतत: किसी जेल में इतने लंबे नपते हैं कि बड़े-बड़े वकील भी उनकी जमानत ना करा पाते.
तो धनतेरस पर आम आदमी और बाबा साधु सबको यही संकल्प लेना चाहिए कि सिर्फ और सिर्फ धन पर फोकस बनाये रखेंगे, अपने ध्यान को और कहीं न भटकने देंगे.
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