चुनाव आयोग की कोशिशें रंग लायीं

लोकसभा चुनाव 2014 के लिए चुनाव आयोग की जितनी भी तारीफ की जाये, कम होगी. जिस प्रकार आयोग ने टीवी, रेडियो तथा प्रिंट मीडिया के जरिये जनता को जागरूक किया तथा मॉडल मतदान केंद्रों व अन्य बूथों पर विकलांगों की सुविधा के लिए व्हील चेयर की सुविधा या वृद्धों की सहायता के लिए सहायकों की […]
लोकसभा चुनाव 2014 के लिए चुनाव आयोग की जितनी भी तारीफ की जाये, कम होगी. जिस प्रकार आयोग ने टीवी, रेडियो तथा प्रिंट मीडिया के जरिये जनता को जागरूक किया तथा मॉडल मतदान केंद्रों व अन्य बूथों पर विकलांगों की सुविधा के लिए व्हील चेयर की सुविधा या वृद्धों की सहायता के लिए सहायकों की व्यवस्था की, वह वास्तव में एक सराहनीय कदम है.
इस चुनाव में कई बार चुनाव आयोग ने प्रत्याशियों पर कड़ा रुख भी दिखाया. उसकी सख्ती के कारण इस बार चुनाव खर्च पर भी लगाम लग पाया. नहीं तो हर चुनाव में उम्मीदवार पानी की तरह पैसे बहाते थे. इतना पैसा अगर गरीबों में बांट दिया जाये तो कितनों का ही पेट भर जाये. चुनाव आयोग के जागरूकता कार्यक्रम के कारण महिलाओं ने भी इस बार पुरुषों को पीछे छोड़ दिया है. खास कर ग्रामीण इलाकों में रिकॉर्डतोड़ मतदान हुआ है.
वीर सिंह, कडरू, रांची
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