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महिला को हिरासत में रखाना पड़ा भारी, अब पुलिस को भरना होगा भारी जुर्माना

Updated at : 11 Apr 2023 9:09 PM (IST)
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महिला को हिरासत में रखाना पड़ा भारी, अब पुलिस को भरना होगा भारी जुर्माना

सुनवाई के दौरान पीठ ने पुलिस अधिकारियों की ओर से पेश वकील से कहा, आपको (प्रतिवादियों को) अपनी जेब से मुआवजा देना होगा. पीठ ने कहा, याचिकाकर्ता को एक दिन की अवैध हिरासत के लिए 15,000 रुपये की राशि का मुआवजा दिया जाएगा.

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महाराष्ट्र में एक महिला को अंतरिम संरक्षण दिये जाने के बावजूद उसे अवैध रूप से हिरासत में रखने पुलिस को भारी पड़ गया है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में पुलिस पर भारी जुर्माना लगा दिया है. कोर्ट ने महिला को हिरासत में रखने पर नाराजगी भी जमाया.

15000 रुपये भरना होगा जुर्माना

सुनवाई के दौरान पीठ ने पुलिस अधिकारियों की ओर से पेश वकील से कहा, आपको (प्रतिवादियों को) अपनी जेब से मुआवजा देना होगा. पीठ ने कहा, याचिकाकर्ता को एक दिन की अवैध हिरासत के लिए 15,000 रुपये की राशि का मुआवजा दिया जाएगा, जिसे दोनों प्रतिवादियों द्वारा साझा किया जाएगा और भुगतान आज से दो सप्ताह की अवधि के भीतर किया जाएगा. कोर्ट ने भविष्य में सावधान रहने की चेतावनी दी.

कोर्ट ने महिला को अंतरिम संरक्षण प्रदान किया था

सुप्रीम कोर्ट ने एक आपराधिक मामले की आरोपी महिला को आत्मसमर्पण करने और नियमित जमानत के लिए अर्जी दायर करने के वास्ते दो सप्ताह के लिए अंतरिम संरक्षण प्रदान किया था. जस्टिस संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति ए अमानुल्लाह की पीठ ने इस घटना को घोर लापरवाही बताते हुए कहा कि आपराधिक मामले में आरोपी एक महिला को 17 नवंबर, 2021 को अंतरिम सुरक्षा मिली थी और शीर्ष अदालत ने उसे दो सप्ताह का अंतरिम संरक्षण दिया था. पीठ ने सोमवार को पारित अपने आदेश में उल्लेख किया, “हमने याचिकाकर्ता को अंतरिम संरक्षण दिया था और उसके बावजूद याचिकाकर्ता को हिरासत में ले लिया गया. याचिकाकर्ता का मामला यह है कि उन्होंने अदालत का आदेश भी दिखाया था. याचिकाकर्ता को अगले दिन जमानत दे दी गई, यानी उसे 24 घंटे के लिए हिरासत में रखा गया.

सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस अधिकारियों को लगायी फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, प्रतिवादियों (दो पुलिस अधिकारियों) ने बिना शर्त माफी मांगने के लिए अपना हलफनामा दायर किया है। हम कम से कम यह उम्मीद नहीं करते हैं कि पुलिस अधिकारी इस तरह से व्यवहार करेंगे और वह भी इस अदालत के आदेश के बावजूद.

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