महाराष्ट्र: स्पीकर नार्वेकर के फैसले को उद्धव ठाकरे गुट ने दिया चैलेंज, सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल
Published by : ArbindKumar Mishra Updated At : 15 Jan 2024 3:59 PM
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को बड़ी राहत देते हुए 10 जनवरी को विधानसभा अध्यक्ष नार्वेकर ने फैसला सुनाया था और कहा था कि 21 जून, 2022 को जब प्रतिद्वंद्वी समूह अस्तित्व में आये तो शिवसेना का उनके (शिंदे के) नेतृत्व वाला धड़ा ही ‘असली राजनीतिक दल’ (असली शिवसेना) था.
अयोग्यता मामले में महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर के फैसले के खिलाफ उद्धव ठाकरे गुट ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. स्पीकर के फैसले के खिलाफ शिवसेना (UBT) ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी अर्जी दाखिल की है.
स्पीकर ने एकनाथ शिंदे गुट को ही असली शिवसेना बताया
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को बड़ी राहत देते हुए 10 जनवरी को विधानसभा अध्यक्ष नार्वेकर ने फैसला सुनाया था और कहा था कि 21 जून, 2022 को जब प्रतिद्वंद्वी समूह अस्तित्व में आये तो शिवसेना का उनके (शिंदे के) नेतृत्व वाला धड़ा ही ‘असली राजनीतिक दल’ (असली शिवसेना) था. राहुल नार्वेकर ने करीब 105 मिनट तक आदेश के अहम बिंदू पढ़ते हुए शिंदे समेत 16 शिवसेना विधायकों को अयोग्य ठहराने की उद्धव ठाकरे गुट की याचिका भी खारिज कर दी थी.
स्पीकर ने कहा था उद्धव ठाकरे के पास किसी भी नेता को पार्टी से निकालने का पावर नहीं है
विधानसभाध्यक्ष ने अपने फैसले में कहा था कि शिवसेना प्रमुख के पास किसी भी नेता को पार्टी से निकालने की शक्ति नहीं है. उन्होंने इस तर्क को भी स्वीकार नहीं किया कि पार्टी प्रमुख की इच्छा और पार्टी की इच्छा पर्यायवाची हैं. उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग को सौंपा गया 1999 का पार्टी संविधान मुद्दों पर निर्णय लेने के लिए वैध संविधान था और ठाकरे समूह का यह तर्क कि 2018 के संशोधित संविधान पर भरोसा किया जाना चाहिए, स्वीकार्य नहीं था. उन्होंने कहा कि 1999 के संविधान ने ‘राष्ट्रीय कार्यकारिणी’ को सर्वोच्च निकाय बनाया था.
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1999 का शिवसेना संविधान ही असली संविधान : नार्वेकर
नार्वेकर ने कहा कि वह याचिकाकर्ता (उद्धव गुट) के इस तर्क को स्वीकार नहीं कर सकते कि 2018 पार्टी संविधान पर भरोसा किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा, निर्वाचन आयोग द्वारा प्रदत्त 1999 का शिवसेना संविधान ही असली संविधान है. नार्वेकर ने कहा कि जून 2022 में जब प्रतिद्वंद्वी गुट उभरा तो शिंदे समूह के पास 54 में से 37 विधायकों का भारी बहुमत था.
नार्वेकर के आदेश को उद्धव ठाकरे ने लोकतंत्र की हत्या करार दिया था
स्पीकर नार्वेकर के आदेश को उद्धव ठाकरे ने लोकतंत्र की हत्या करार देते हुए कहा था कि उनकी पार्टी इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगी. ठाकरे ने कहा था कि शीर्ष अदालत ने स्पष्ट दिशानिर्देश दिए थे, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने प्रतिद्वंद्वी शिवसेना गुटों द्वारा दायर अयोग्यता याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाते समय उन्हें नजरअंदाज कर दिया. मूल मामला दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता के बारे में था, लेकिन किसी भी पक्ष के एक भी विधायक को अयोग्य नहीं ठहराया गया. उन्होंने कहा था कि आदेश जिस आधार पर टिका है वह गलत है. यह लोकतंत्र की हत्या है और उच्चतम न्यायालय का अपमान है. उन्होंने कहा कि न तो शीर्ष अदालत और न ही लोग इस फैसले को स्वीकार करेंगे. ठाकरे ने कहा था, शिवसेना कभी खत्म नहीं होगी और महाराष्ट्र की जनता इन गद्दारों की सेना को स्वीकार नहीं करेगी.
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अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.
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