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संजय गांधी का जामा मस्जिद प्रेम, झुग्गी झोपड़ियों पर चला बुल्डोजर, 50 साल बाद जगीं इमरजेंसी की भयानक यादें!

Turkman Gate Bulldozer Controversy: दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में आधी रात चले बुलडोजर, फैज-ए-इलाही मस्जिद को लेकर फैली अफवाह और पुलिस पर पत्थरबाजी ने 1976 की इमरजेंसी की डरावनी यादें ताजा कर दीं. जानिए क्या हुआ 6-7 जनवरी की रात, क्यों बिगड़े हालात, क्या कहती है पुलिस और एमसीडी और कैसे जुड़ता है यह मामला संजय गांधी के दौर से.

Turkman Gate Bulldozer Controversy: दिल्ली का तुर्कमान गेट. एक ऐसा इलाका, जिसने इतिहास में दर्द, डर और बुलडोजर की आवाज बहुत करीब से देखी है. करीब 50 साल पहले, इमरजेंसी के दौर में, यहीं पहली बार सरकारी बुलडोजर चला था. अब साल 2025 में, एक बार फिर इसी इलाके में रात के अंधेरे में बुलडोजर पहुंचे. वजह बताई गई अवैध कब्जा हटाना. लेकिन हालात ऐसे बिगड़े कि पत्थर चले, आंसू गैस छोड़ी गई और पुलिसकर्मी घायल हो गए. सवाल वही पुराना है कि क्या इतिहास खुद को दोहरा रहा है?

Turkman Gate Bulldozer Controversy: 1976 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बेटे संजय गांधी का आदेश

तुर्कमान गेट का नाम आते ही 1976 की इमरजेंसी की याद ताजा हो जाती है. तब देश में लोकतंत्र लगभग थम चुका था. विपक्षी नेता जेल में थे और विरोध करने की आजादी नहीं थी. अप्रैल 1976 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बेटे संजय गांधी, डीडीए के वाइस चेयरमैन जगमोहन मल्होत्रा के साथ तुर्कमान गेट पहुंचे. वहीं संजय गांधी ने कहा कि मैं चाहता हूं कि तुर्कमान गेट से जमा मस्जिद साफ दिखाई दे. जगमोहन ने इस बात को आदेश मान लिया. (Sanjay Gandhi Dream Seeing Jama Masjid in Hindi)

13 अप्रैल 1976 को बुलडोजर चला

बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, 13 अप्रैल 1976 की सुबह तुर्कमान गेट पर एक बुलडोजर पहुंचा. पहले लोगों को भरोसा दिलाया गया कि घर नहीं तोड़े जाएंगे, लेकिन देखते ही देखते झुग्गियां और मकान गिराए जाने लगे. लोग रोते रहे, चिल्लाते रहे, लेकिन बुलडोजर नहीं रुका. 19 अप्रैल 1976 को करीब 500 महिलाएं, बच्चों के साथ, काले पट्टे बांधकर बुलडोजर के सामने खड़ी हो गईं. इसके बाद सीआरपीएफ को बुलाया गया. हालात बिगड़े, पत्थर चले और पुलिस ने गोली चला दी. यहां मौजूद लोगों ने जब तुर्कमान गेट से न हटने की गुहार लगाई, तो जगमोहन ने कहा कि क्या हम इतने पागल हैं कि एक पाकिस्तान तोड़कर दूसरा पाकिस्तान बनने दें? लोगों को त्रिलोकपुरी और खिचड़ीपुर भेजने का आदेश दिया गया.

मौतों का आंकड़ा आज भी विवादित है

सरकारी रिकॉर्ड में बताया गया कि 14 राउंड फायरिंग हुई, 6 लोगों की मौत हुई. लेकिन वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नायर ने अपनी किताब ‘The Judgement’ में लिखा कि इस फायरिंग में करीब 150 लोग मारे गए. इमरजेंसी में कितनी तोड़फोड़ हुई? शाह आयोग (1977) की रिपोर्ट के मुताबिक 1975 से 1977 के बीच दिल्ली में 1,50,105 ढांचे तोड़े गए. करीब 7 लाख लोग बेघर हुए और यहां तक की कई जगहों पर कानूनी प्रक्रिया का पालन भी नहीं किया गया.

Turkman Gate Bulldozer Controversy in Hindi: 2025 की रातों ने पुरानी यादें ताजा कर दीं

6-7 जनवरी की रात को दिल्ली के रामलीला मैदान इलाके में स्थित तुर्कमान गेट के पास माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया. फैज-ए-इलाही मस्जिद के नजदीक एमसीडी (दिल्ली नगर निगम) की टीम अवैध कब्जे हटाने पहुंची थी. यह कार्रवाई दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर की जा रही थी. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इसी दौरान सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हो गई. इस पोस्ट में दावा किया गया कि फैज-ए-इलाही मस्जिद को तोड़ा जा रहा है. इस अफवाह के बाद इलाके में तेजी से भीड़ जमा होने लगी. कुछ ही समय में वहां 100 से 150 लोग इकट्ठा हो गए.

पत्थरबाजी और हिंसा की शुरुआत

भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने पुलिस और एमसीडी कर्मचारियों पर पत्थर और कांच की बोतलें फेंकनी शुरू कर दीं. हालात इतने बिगड़ गए कि पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए. पुलिस के मुताबिक, ज्यादातर लोगों को समझा-बुझाकर हटा दिया गया, लेकिन कुछ लोगों ने हंगामा किया और हिंसा पर उतर आए. दिल्ली पुलिस ने स्थिति संभालने के लिए हल्का बल प्रयोग किया और आंसू गैस के गोले छोड़े. इसके बाद भीड़ को तितर-बितर किया गया और इलाके में हालात सामान्य किए गए. पुलिस ने इस मामले में पांच लोगों को हिरासत में लिया, जिनमें एक नाबालिग भी शामिल है.

दिल्ली पुलिस ने बयान जारी कर कहा कि

यह जांच की जा रही है कि यह हिंसा अचानक हुई या फिर पहले से किसी साजिश के तहत की गई. आंसू गैस के इस्तेमाल के बाद स्थिति पर पूरी तरह नियंत्रण पा लिया गया. एमसीडी के डिप्टी कमिश्नर विवेक कुमार ने साफ किया कि फैज-ए-इलाही मस्जिद को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया गया है और कार्रवाई मस्जिद से सटी जमीन और कब्रिस्तान के पास की गई है. इस दौरान एक डायग्नोस्टिक सेंटर और एक बैंक्वेट हॉल को तोड़ा गया. एमसीडी के मुताबिक, यह पूरी कार्रवाई कानूनी आदेशों के तहत की जा रही थी.

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Govind Jee
Govind Jee
गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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