शशि थरूर ने कहा- केरल ऐसा राज्य है जहां हिंदू बहुल इलाके से मुसलमान और मुस्लिम इलाके से हिंदू जीत दर्ज करता है

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शशि थरूर

Shashi Tharoor : केरल एक ऐसा राज्य है, जहां के लोग वोट करने से पहले जाति और धर्म को महत्व नहीं देते हैं,बल्कि विकास के लिए वोट देते हैं. जहां हिंदू इलाके से मुस्लिम और मुस्लिम इलाके से हिंदू उम्मीदवार जीत दर्ज करता है.

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Shashi Tharoor : कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता नेता शशि थरूर ने बृहस्पतिवार को केरल विधानसभा चुनाव परिणाम पर अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने एक्स पर पोस्ट लिखा कि केरल एक ऐसा राज्य है, जहां के लोग जाति और धर्म में विश्वास नहीं करते हैं और ना ही उसके आधार पर यहां वोटिंग होती है. थरूर ने कहा कि केरल के चुनाव को सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल कहा जा सकता है.

केरल का विधानसभा चुनाव असली केरला स्टोरी है

शशि थरूर ने कुछ दिनों पहले दि केरल स्टोरी 2 पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी और कहा था कि यह फिल्म केरल की कहानी नहीं कहती है. उन्होंने कहा था कि इस फिल्म में केरल में लव जेहाद को लेकर राज्य को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है. राज्य की स्थिति बिलकुल भी वैसी नहीं है, जैसा कि फिल्म मे दिखाया गया है. उन्होंने कहा कि केरल विधानसभा चुनाव का परिणाम सांप्रदायिक लोगों के लिए एक सबक है. उन्होंने बताया कि मुस्लिम बहुसंख्यक वाले निर्वाचन क्षेत्र थावनूर में एक ईसाई, वीएस जॉय को चुना गया, हिंदू बहुसंख्यक वाले निर्वाचन क्षेत्र कलामासेरी में मुस्लिम उम्मीदवार वीई अब्दुल गफूर को चुना गया और एक ईसाई बहुसंख्यक निर्वाचन क्षेत्र कोच्चि में मुस्लिम उम्मीदवार मुहम्मद शिया को चुना गया.

मुस्लिम इलाके में हिंदू को चुना गया

शशि थरूर ने अपने एक्स पोस्ट में यह लिखा है कि केरल के लोगों के लिए विकास पहले जरूरी है ना कि उनकी धर्म और जाति. अपने दूसरे पोस्ट में शशि थरूर ने त्रिकारिपुर विधानसभा क्षेत्र का जिक्र किया, जो मुस्लिम बहुल है और वहां से एक हिंदू उम्मीदवार जीतकर आया है. शशि थरूर ने यह पोस्ट तब किया, जब उनके पहले पोस्ट पर यह पूछा गया कि क्या वे कोई निर्वाचन क्षेत्र ऐसा बताएंगे जो मुस्लिम बहुल हो और वहां से एक हिंदू चुनकर आया हो. थरूर ने बताया कि त्रिकारिपुर से संदीप वेरियर ने यूडीएफ उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की. उन्होंने लिखा कि केरल में जो सांप्रदायिक सद्‌भाव है, यह उसका चौथा उदाहरण है.

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रजनीश आनंद

लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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