Sela Tunnel: सेला सुरंग बढ़ाएगा चीन की टेंशन, पीएम मोदी ने किया उद्घाटन
Published by : Amitabh Kumar Updated At : 09 Mar 2024 1:56 PM
Sela Tunnel
Sela Tunnel 13000 फीट की ऊंचाई पर भारत की ओर से तैयार किया गया है. बॉर्डर पर भारत की मजबूत स्थिति को देखकर चीन बौखला गया है.
Sela Tunnel: सेला सुरंग की चर्चा लोगों के बीच चर्चा का केंद्र बनी हुई है. देश के लोग जानना चाहते हैं कि आखिर यह कहां है और भारत के लिए यह कैसे महत्वपूर्ण साबित होने वाला है. दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अरुणाचल प्रदेश में सेला सुरंग का उद्घाटन शनिवार को किया जिसका इंतजार काफी दिनों से किया जा रहा था. यहां बता दें कि सेला सुरंग चीन बॉर्डर के बहुत करीब है और भारत के लिए सुरक्षा के लिजाह से बहुत ही खास है. आइए सेला सुरंग की खास बातें जानते हैं.
पीएम मोदी ने किया कांग्रेस पर प्रहार
सुरंग का उद्घाटन करने के बाद पीएम मोदी ने एक जनसभा को संबोधित किया. अपने संबोधन में उन्होंने कांग्रेस पर जमकर प्रहार किया. पीएम मोदी ने कहा कि परिवारवादियों को केवल अपने परिवार की चिंता रहती है. कांग्रेस की सरकार केवल घोटाले करने में व्यस्त थी. अरुणाचल कह रहा है- हर घर मोदी का परिवार…
अरुणाचल में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कहा कि पूर्वोत्तर राज्य दक्षिण एशिया और पूर्वी एशिया के साथ व्यापार, पर्यटन, अन्य क्षेत्रों में देश के संबंधों में मजबूत कड़ी बनने जा रहा है. हमने पूर्वोत्तर में पिछले पांच वर्ष में जो किया है उसे करने में कांग्रेस को 20 साल लग जाते. उन्होंने कहा कि पूरा पूर्वोत्तर देख रहा है कि मोदी की गारंटी कैसे काम कर रही है.
सेना को मिलेगी ताकत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अरुणाचल प्रदेश में सेला टनल को देश को समर्पित किया जिससे अब तवांग तक हर मौसम में आवाजाही आसान हो जाएगी. अभी तक सर्दियों में बर्फबारी की वजह से तवांग तक पहुंचने का सड़क मार्ग बंद होने की वजह से दिक्कत आती थी. यदि मौसम खराब हो तो इस इलाके में हेलिकॉप्टर भी उड़ान भरने में सक्षम नहीं होते. सेना की ताकत बढ़ाने के लिहाज से इस सुरंग को अहम माना जा रहा है क्योंकि पड़ोसी मुल्क चीन हमेशा भारत को परेशान करता रहा है. इस सुरंग से सेना का मूवमेंट तेज हो जाएगा.
खास बातें
- सेला सुरंग करीब 825 करोड़ रुपये की लागत से तैयार की गई है.
- 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तवांग तक हर मौसम में सड़क सुविधा बनाने के लिए सेला सुरंग प्रोजेक्ट की आधारशिला रखने का काम किया था.
- तवांग तक जाने का एक ही रास्ता है जो सेला पास यानी सेला दर्रे से होकर गुजरता है. यह 13000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है.
- मौसम खराब होने की वजह से तवांग से आगे लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (भारत-चीन बॉर्डर) पर तैनात भारतीय सेना के मूवमेंट में परेशानी होती है.
- हर मौसम में सेना का मूवमेंट रहे इसके लिए सेला सुरंग पर काम शुरू किया गया.
- सुरंग के बन जाने के बाद तवांग तक की दूरी करीब 6 किलोमीटर कम हो जाएगी.
- सुरंग को स्नो लाइन से इतने नीचे बनाया गया है ताकि सर्दियों में बर्फबारी के दौरान बर्फ हटाने की आवश्यकता ना पड़े.
- इस परियोजना की बात करें तो इसमें दो सुरंगें शामिल हैं. पहली 980 मीटर लंबी सिंगल-ट्यूब सुरंग है जबकि दूसरी 1.5 किमी लंबी है.
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भारत के इस कदम से तमतमाया चीन
इस बीच चीन की ओर से एक बयान दिया गया है. उसने कहा है कि विवादित सीमा पर और सैनिक तैनात भारत की ओर से किया जा रहा है जिससे तनाव कम नहीं होगा. आपको बता दें कि भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख की सीमा पर पिछले कई सालों से तनाव की स्थिति बनी हुई है. भारत ने चीन की हरकतों को देखते हुए और सैनिकों की तैनाती करने का निर्णय लिया है जिससे चीन तमतमा गया है. चीनी के विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने शुक्रवार को कहा कि विवादित सीमा पर और सैनिक तैनात करने का भारत का कदम तनाव कम करने के लिए अनुकूल नहीं है.
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By Amitabh Kumar
अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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