'EVM से फोन का कोई लेनादेना नहीं', चुनाव आयोग ने कहा- हैकिंग की खबर गलत, जांच के आदेश
Published by : ArbindKumar Mishra Updated At : 16 Jun 2024 6:27 PM
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EVM: लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे 4 जून को आये. जिसमें एनडीए को बहुमत मिली और इंडिया गठबंधन को 234 सीटें मिलीं. अब रिजल्ट के दो सप्ताह बाद ईवीएम हैकिंग का मामला सामने आया है.
EVM: ईवीएम हैकिंग की खबर को लेकर चुनाव आयोग का बयान सामने आया है. आयोग ने साफ कर दिया है कि ईवीएम का फोन से कोई लेनादेना नहीं है. ईवीएम के लिए ओटीपी जरूरी नहीं है. उन्होंने हैकिंग की खबर को फर्जी बताया. हालांकि चुनाव आयोग ने मामले की जांच का आदेश दे दिया है. मुंबई उपनगरीय निर्वाचन अधिकारी वंदना सूर्यवंशी ने कहा, ईवीएम को अनलॉक करने के लिए किसी ओटीपी की आवश्यकता नहीं है. ईवीएम को अनलॉक करने के लिए किसी मोबाइल ओटीपी की आवश्यकता नहीं है क्योंकि यह एक non-programmable offence है. इसमें एडवांस्ड टेक्नोलॉजी फीचर है और ईवीएम में कोई संचार उपकरण नहीं है. यह तकनीकी रूप से पूर्ण-प्रूफ प्रणाली है और ईवीएम एक स्टैंडअलोन प्रणाली है. इसमें किसी ओटीपी की आवश्यकता नहीं है.
राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने उठाए सवाल
ईवीएम को लेकर कांग्रेस सांसद राहुल और समाजवादी पार्टी के चीफ अखिलेश यादव ने बड़ा सवाल उठाया है. इधर शिवसेना नेता संजय निरुपम ने भी इस मामले में अपनी प्रतिक्रिया दी है और महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी और राहुल गांधी पर जमकर निशाना साधा है.
क्या है मामला
पहले जानते हैं मामला क्या है? दरअसल मुंबई पुलिस ने ईवीएम हैकिंग के मामले को लेकर एक एफआईआर दर्ज किया है. जिसमें मुंबई उत्तर पश्चिम सीट से नवनिर्वाचित शिवेसना शिंदे गुट के सांसद रवींद्र वायकर के रिश्तेदार पर गंभीर आरोप लगा है. वायकर के साले पर केस भी दर्ज किया गया है. मुंबई पुलिस ने मतगणना के दिन गोरेगांव सेंटर में पाबंदी होने के बाद भी मोबाइल का इस्तेमाल करने के आरोप में एफआईआर दर्ज की है. आरोप है कि चुनाव आयोग के अधिकारी के पास जो मोबाइल फोन था, उसमें ओटीपी जेनरेट होता था. उसी फोन का इस्तेमाल कथित रूप से सांसद के रिश्तेदार कर रहे थे. उत्तर पश्चिम सीट से रविंद्र वायकर दोबारा काउंटिंग के बाद केवल 48 वोटों से जीते थे.
कांग्रेस ने उठाये सवाल
कांग्रेस ने ईवीएम मामले को लेकर एक्स पर लंबा पोस्ट डाला, जिसमें कई सवाल पूछे. कांग्रेस ने अपने पोस्ट में लिखा, EVM से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है. मुंबई में NDA के कैंडिडेट रवींद्र वायकर के रिश्तेदार का मोबाइल फोन EVM से जुड़ा था. NDA के इस कैंडिडेट की जीत सिर्फ 48 वोट से हुई है. ऐसे में सवाल है कि आखिर NDA के कैंडिडेट के रिश्तेदार का मोबाइल EVM से क्यों जुड़ा था? जहां वोटों की गिनती हो रही थी, वहां मोबाइल फोन कैसे पहुंचा? सवाल कई हैं, जो संशय पैदा करते हैं. चुनाव आयोग को स्पष्टीकरण देना चाहिए.

भारत में ईवीएम ‘ब्लैक बॉक्स’ हैं, किसी को उनकी जांच की इजाजत नहीं: राहुल गांधी
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रविवार को कहा कि भारत में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) एक ‘ब्लैक बॉक्स’ है, जिसकी जांच करने की किसी को इजाजत नहीं है. उन्होंने कहा कि भारत की चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर ‘गंभीर चिंताएं’ जताई जा रही हैं. गांधी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा, जब संस्थाओं में जवाबदेही ही नहीं होती तो लोकतंत्र दिखावा बन कर रह जाता है और धांधली की आशंका बढ़ जाती है. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने ‘एक्स’ पर एलन मस्क की उस पोस्ट को भी साझा किया जिसमें मस्क ने ईवीएम को हटाने की बात कही थी. मस्क ने अपनी पोस्ट में कहा था, हमें ईवीएम को खत्म कर देना चाहिए. मुनष्यों या कृत्रिम मेधा (एआई) द्वारा हैक किए जाने का जोखिम, हालांकि छोटा है, फिर भी बहुत अधिक है.
संजय निरुपम ने क्या कहा?
रवींद्र वायकर मामले में शिवसेना, शिंदे गुट के नेता संजय निरुपम ने कहा, मोबाइल से ईवीएम संचालित नहीं होता. उन्होंने कहा, एमवीए झूठ फैला रहा है. दो बार वोटों की गिनती हुई थी. उन्होंने कहा, अगर ईवीएम में गड़बड़ थी, तो उनके प्रत्याशी कैसे जीत गए. निरुपम ने कहा, सीसीटीवी कैमरे के तहत मतगणना हुई थी.
अखिलेश यादव ने भी ईवीएम पर उठाया सवाल
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने ईवीएम पर सवाल उठाते हुए एक्स पर पोस्ट डाला. जिसमें उन्होंने लिखा, ‘टेक्नॉलजी’ समस्याओं को दूर करने के लिए होती है, अगर वही मुश्किलों की वजह बन जाए, तो उसका इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए. आज जब विश्व के कई चुनावों में EVM को लेकर गड़बड़ी की आशंका जाहिर की जा रही है और दुनिया के जाने-माने टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट्स EVM में हेराफेरी के खतरे की ओर खुलेआम लिख रहे हैं, तो फिर EVM के इस्तेमाल की जिद के पीछे की वजह क्या है, ये बात भाजपाई साफ करें. आगामी सभी चुनाव बैलेट पेपर (मतपत्र) से कराने की अपनी मांग को हम फिर दोहराते हैं.

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अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.
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