आवारा कुत्तों पर सख्त सुप्रीम कोर्ट: आदेश बरकरार, सार्वजनिक जगहों से हटेंगे आवारा कुत्ते
Published by : Amitabh Kumar Updated At : 19 May 2026 11:04 AM
सुप्रीम कोर्ट (File Photo)
सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के पुनर्वास और बंध्याकरण संबंधी सात नवंबर, 2025 के अपने आदेश में बदलाव करने और उसे वापस लेने के अनुरोध वाली सभी याचिकाएं और आवेदन खारिज किए.
सुप्रीम कोर्ट ने अपने नवंबर 2025 के आदेश में बदलाव करने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि अस्पताल, स्कूल, कॉलेज, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने का फैसला पहले जैसा ही लागू रहेगा.
Supreme Court refuses to modify its November 2025 order to remove stray dogs from public institutions like hospitals, schools, colleges, bus stations, railway stations etc. pic.twitter.com/sG8H975iug
— ANI (@ANI) May 19, 2026
सुप्रीम कोर्ट ने आवारा पशुओं पर पशु कल्याण बोर्ड की SOP को चुनौती देने वाली सभी याचिकाएं खारिज कर दीं. कोर्ट ने साफ कहा कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को संभालने के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में लगातार ढिलाई बरती है.
सम्मान के साथ जीने का मतलब सुप्रीम कोर्ट ने बताया
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ‘पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रम’ देशभर में ठीक से लागू नहीं हो रहा है. कहीं फंड की कमी है, तो कहीं व्यवस्था कमजोर है, और अलग-अलग जगहों पर इसे अलग तरीके से चलाया जा रहा है. इससे समस्या बनी हुई है. कोर्ट ने कहा कि सम्मान के साथ जीने का हक मतलब सिर्फ जीना नहीं, बल्कि बिना डर के जीना भी है. इसमें कुत्तों के हमलों के डर से मुक्त होकर खुलकर और सुरक्षित तरीके से जीवन जीने का अधिकार भी शामिल है.
फैसले को तीन हिस्सों में बांटा गया
एडवोकेट विवेक शर्मा ने इसे एक सराहनीय और मजबूत फैसला बताया. उन्होंने कहा कि इस फैसले को तीन हिस्सों में बांटा गया है. पहला हिस्सा पहले दिए गए आदेश में बदलाव से जुड़ी याचिकाओं पर है, दूसरा हिस्सा SOP यानी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर पर केंद्रित है, और तीसरा सबसे अहम हिस्सा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए अनुपालन (Compliance) को लेकर है.
#WATCH | Delhi: On Supreme Court refuses to modify directions to remove stray dogs from public places, Advocate Vivek Sharma says, "This is a commendable step and an excellent ruling by the judiciary. The judgment is divided into three parts. The first part pertains to the… pic.twitter.com/IHXelQxO8A
— ANI (@ANI) May 19, 2026
विवेक शर्मा ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 21 हर व्यक्ति को जीवन का अधिकार देता है, जिसमें बिना डर के कहीं भी आने-जाने की आजादी शामिल है. यानी लोग सड़क, स्कूल, कॉलेज या किसी भी सार्वजनिक जगह पर सुरक्षित महसूस करें, यह सरकार की जिम्मेदारी है. कोर्ट ने साफ कहा है कि राज्यों और नगर निकायों को पुराने और नए दोनों आदेशों का पालन करना होगा. साथ ही, इस फैसले में नगर निगम के कर्मचारियों को भी राहत दी गई है. अगर वे नियमों के तहत डॉग बाइट रोकने, एबीसी प्रोग्राम लागू करने या अन्य कदम उठाते हैं, तो उनके खिलाफ कोई आपराधिक कार्रवाई नहीं होगी.
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By Amitabh Kumar
अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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