धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की पहल है रामायण सर्किट योजना

रामायण सर्किट योजना , एआई फोटो
Ramayana Circuit Yojana: रामायण सर्किट योजना के तहत भगवान राम से जुड़े प्रमुख धार्मिक स्थलों- अयोध्या, चित्रकूट, श्रृंगवेरपुर, नासिक, रामेश्वरम समेत अन्य स्थानों का विकास किया जा रहा है. स्वदेश दर्शन योजना के तहत यूपी में दो परियोजनाओं को 196.66 करोड़ रुपये मिले हैं. अयोध्या, चित्रकूट और श्रृंगवेरपुर में पर्यटन सुविधाओं, घाटों, मार्गों और बुनियादी ढांचे का विस्तार हुआ.
अंजनी कुमार सिंह
Ramayana Circuit Yojana: रामायण सर्किट, केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय के स्वदेश दर्शन योजना, प्रसाद योजना और वैश्विक स्तर पर प्रसिद्ध पर्यटन स्थल के विकास के लिए राज्यों को पूंजी निवेश के तहत विशेष सहायता योजना और अन्य योजनाओं के तहत विकसित किया जा रहा है. इस योजना के तहत बौद्ध, जैन और सिख सर्किट का विकास करने के साथ अन्य धार्मिक और पर्यटन स्थल का भी विकास किया जा रहा है. रामायण सर्किट योजना का मकसद भगवान राम से जुड़े धार्मिक स्थलों का विकास करना है. ताकि धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिल सके. इसके लिए केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय की अन्य योजना के तहत भी विकास हो रहा है.
रामायण सर्किट का मतलब भगवान राम से जुड़े वह स्थान, जहां पर किसी न किसी रूप में उनका आगमन हुआ है. योजना के तहत चयनित स्थानों को रेल, रोड और हवाई मार्ग से जोड़ना है. रामायण सर्किट के प्रमुख स्थल है अयोध्या, चित्रकूट, श्रृंगवेरपुर, सीतामढ़ी, नासिक, रामेश्वरम, हम्पी (किष्किंधा क्षेत्र) और भद्राचलम. स्वदेश दर्शन योजना के पहले चरण के तहत 5290.33 करोड़ रुपये की 76 परियोजना को मंजूरी दी गयी, जिसमें से 75 योजना पूरी हो हो चुकी है. इसमें कई थीम सर्किट है, जिसमें रामायण सर्किट भी शामिल है. दूसरे चरण के तहत नये प्रोजेक्ट के लिए 2200 करोड़ रुपये आवंटित किया गया है. इस योजना के तहत राज्यों को भी विकास के लिए खर्च करना होता है. स्वदेश दर्शन 2.0 के तहत वर्ष 2023-24 में 29, वर्ष 2024-25 में 19 और वर्ष 2025-26(अक्टूबर 2025) के दौरान 5 परियोजना को मंजूरी दी गयी है.
रामायण सर्किट के लिए आवंटित राशि
स्वदेश दर्शन 1.0 के तहत केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय ने रामायण सर्किट के लिए दो प्रोजेक्ट को मंजूरी दी. दो प्रोजेक्ट उत्तर प्रदेश के लिए था. दोनों प्रोजेक्ट के लिए 196.66 करोड़ रुपये आवंटित किया गया. चित्रकूट और श्रृंगवेरपुर के लिए वर्ष 2016-17 में 69.45 करोड़ रुपये मंजूर किए गए और 64.09 करोड़ रुपये जारी कर दिया गया, जिसमें 56.03 करोड़ रुपये खर्च हुआ. इसके तहत श्रृंगवेरपुर में 23.02 करोड़ की लागत से संध्या घाट, पर्यटक सुविधा केंद्र, पार्किंग, फुटपाथ का निर्माण, मोबाइल शौचालय और अन्य सुविधा का विकास हुआ है. जबकि चित्रकूट में परिक्रमा मार्ग का कवर्ड शेड, फूड प्लाजा, पर्यटक सुविधा केंद्र, रामघाट को मध्य प्रदेश से जोड़ने, रामायण गैलरी और अन्य सुविधा का विकास हुआ है और इसपर 43.13 करोड़ रुपये खर्च हुआ है. वर्ष 2017-18 में अयोध्या के लिए 127.21 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली, 115.46 करोड़ रुपये जारी किया गया, जिसमें से 113.22 करोड़ रुपये खर्च हो चुका है.
अयोध्या में 4.14 करोड़ की लागत से रामकथा गैलरी और पार्क, 15.48 करोड़ रुपये की लागत से अयोध्या बस स्टैंड का निर्माण, 9.6 करोड़ मल्टी लेवल पार्किंग, 1.89 करोड़ से पंचकोसी परिक्रमा, 3.26 करोड़ से दिगंबर अखाड़ा में मल्टीपरपस हाॅल, 8.49 करोड़ से राम की पौड़ी, 8.87 करोड़ रुपये से लक्ष्मण किला घाट और सड़कों के विकास और लाइट पर अन्य राशि खर्च हुई है. राज्य सरकार अपने मद से भी खर्च करती है. मंत्रालय के मुताबिक उत्तर प्रदेश में रामायण सर्किट के प्रोजेक्ट का काम पूरा हो चुका है. इसके तहत बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सड़क, लाइट, घाट और अन्य सुविधा तैयार हो चुका है. स्वदेश दर्शन के 76 में से 75 प्रोजेक्ट पूरा हो चुके हैं. कई राज्यों में राज्य स्तर पर प्रोजेक्ट का काम चल रहा है. बिहार के सीतामढ़ी के लिए रामायण सर्किट योजना के प्रोजेक्ट की अब तक मंजूरी नहीं मिली है. दूसरे राज्यों में प्रस्ताव के स्तर पर काम हुआ है या आंशिक विकास किया गया है.
भगवान राम से जुड़े स्थल
- अयोध्या(जन्म स्थान)
- वनवास मार्ग (उत्तर भारत)
- श्रृंगवेरपुर निषादराज से भेंट
- चित्रकूट: वनवास का प्रारंभिक समय
- मध्य भारत से दक्षिण की ओर
- दंडकारण्य: लंबे समय तक वनवास
- नासिक (पंचवटी): सीता हरण
दक्षिण भारत
- हम्पी (किष्किंधा): सुग्रीव और हनुमान से मुलाकात
- भद्राचलम: राम भक्ति का प्रमुख केंद्र
- रामेश्वरम: लंका जाने के लिए सेतु बनाने का काम
- लंका (श्रीलंका): रावण वध और युद्ध
राम से जुड़े क्षेत्र के लिए रेलवे की पहल
राम से जुड़े तीर्थस्थल की यात्रा के लिए रेलवे भारत गौरव डीलक्स एसी ट्रेन का संचालन करने की तैयारी कर रही है. रामायण सर्किट की यात्रा सुविधा 30 मार्च से शुरू होगी. श्री रामायण यात्रा ट्रेन से 16 दिन का सफर होगा. यह ट्रेन अयोध्या, नंदीग्राम, सीतामढ़ी, जनकपुर(नेपाल), बक्सर, वाराणसी, प्रयागराज, श्रृंगवेरपुर, चित्रकूट, नासिक, हंपी, रामेश्वरम तक जायेगी और फिर दिल्ली वापस आ जाएगी. इसमें एसी 1, एसी 2 और एसी 3 कोच है और कुल 150 यात्री सफर कर सकते हैं. पर्यटक ट्रेन पर गाजियाबाद, टुंडला, अलीगढ़, इटावा, कानपुर और लखनऊ से भी बैठ सकते हैं. ट्रेन में दो रेस्टोरेंट, मॉडर्न किचन, बाथरुम, फुट मसाज की सुविधा उपलब्ध है.
सभी कोच में सीसीटीवी कैमरा और सुरक्षा गार्ड मौजूद रहेंगे. इसमें एक यात्री को एसी 3 के लिए 114100 रुपये, एसी 2 के लिए 151225 और एसी 1 के लिए 164940 रुपये किराया तय किया गया है. दिल्ली से ट्रेन पहले अयोध्या जायेगी, जहां राम जन्म भूमि मंदिर, हनुमानगढ़ी, राम की पैड़ी का दर्शन करने का मौका मिलेगा. फिर नंदीग्राम में भारत मंदिर का दर्शन होगा इसके बाद ट्रेन सीतामढ़ी जाएगी, जहां सीता के जन्म स्थान का दर्शन होगा और फिर बस से नेपाल के जनकपुर जाने की सुविधा उपलब्ध होगी. इसके बाद ट्रेन बक्सर, वाराणसी, प्रयागराज, चित्रकूट होते हुए नासिक, हंपी और अंत में रामेश्वरम की ओर जाएगी.
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