डाकिया डाक लाया नहीं, जिंदगी बचाया कहिए हुजूर! संकट की घड़ी में गरीबों का तारणहार ऐसे बन रहा डाक विभाग

Updated at : 17 Apr 2020 10:28 PM (IST)
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डाकिया डाक लाया नहीं, जिंदगी बचाया कहिए हुजूर! संकट की घड़ी में गरीबों का तारणहार ऐसे बन रहा डाक विभाग

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि डाक विभाग ने लॉकडाउन के दौरान 100 टन से ज्यादा दवाओं और चिकित्सा से जुड़े अन्य आवश्यक सामान की आपूर्ति की है.

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नयी दिल्ली : केंद्रीय गृह मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि डाक विभाग ने लॉकडाउन के दौरान 100 टन से ज्यादा दवाओं और चिकित्सा से जुड़े अन्य आवश्यक सामान की आपूर्ति की है. विभाग ने इसके लिए मालवाहक विमानों और डिलीवरी वैन का इस्तेमाल किया है. कोविड-19 पर संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए गृह मंत्रालय की संयुक्त सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने बताया कि दो लाख से ज्यादा डाकिये और ग्रामीण डाक सेवक यह सुनिश्चत कर रहे हैं कि सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को ‘भारतीय डाक भुगतान बैंक’ की मदद से वक्त पर धन मिले.

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तीन मई तक लागू है लॉकडाउन : उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के दौरान भारतीय डाक विभाग ने अस्पतालों और अन्य उपभोक्ताओं को 100 टन से ज्यादा दवाएं, जांच किट और वेंटिलेटर पहुंचाए. कोरोना वायरस संक्रमण के मद्देनजर 25 मार्च से ही देश में लॉकडाउन लागू है. पहले यह 14 अप्रैल की मध्य रात्रि को समाप्त होने वाला था, लेकिन इसे बढ़ाकर तीन मई तक के लिए कर दिया गया.

डाक पहुंचाने का किया गया है विशेष इंतजाम : उन्होंने कहा कि इस अवधि में राज्यों के भीतर और एक राज्य से दूसरे राज्य तक डाक पहुंचाने के लिए विभाग ने विशेष इंतजाम किए हैं. वह पेंशन सहित सरकार द्वारा लोगों को दिये जाने वाले अन्य लाभों को घर-घर पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि इस तंत्र के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा पेंशन, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के तहत सैकड़ों करोड़ रुपये की भुगतान राशि को विधवाओं, वरिष्ठ नागरिकों तथा दिव्यांगों को उनके घरों पर उपलब्ध कराया जा रहा है.

सचल डाकघर भी कर रहे हैं काम : श्रीवास्तव ने कहा कि विभाग ने जिला प्रशासन और एनजीओ के साथ मिलकर लॉकडाउन के दौरान खाद्य सामग्री और राशन पहुंचाया है. उन्होंने कहा कि पूरे देश में मोबाइल (सचल) डाकघर काम कर रहे हैं सभी को सामान्य डाक तथा वित्तीय सेवाएं मिल रही हैं. उन्होंने बताया कि बैंकों और बाजारों पर अतिरिक्त ध्यान देने की जरूरत है, जिसके लिए वे हर संभव प्रयास करते हैं.

सरकार ने इन कामों को शुरू करने की दी इजाजत : गृह मंत्रालय ने गुरुवार को लघु वन उत्पाद और गैर-लकड़ी उत्पाद को एकत्र करने, उन्हें काटने और उनका प्रसंस्करण करने की अनुमति दे दी थी. बांस, नारियल, सुपारी, कोको और मसालों की खेती, कटाई, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, बिक्री और विप्पणन को भी छूट दी गयी है. मंत्रालय ने सरकारी ऋण समितियों, गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को न्यूनतम कर्मचारियों के साथ काम करने की छूट दी है. श्रीवास्तव ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान जलापूर्ति, बिजली और टेलीकॉम परियोजना से जुड़े कार्य ग्रामीण क्षेत्रों में जारी रहेंगे.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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