ओडिशा कंकाल मामला: बैंक की लापरवाही उजागर, दोषी अधिकारियों पर गिरेगी गाज
Published by : ArbindKumar Mishra Updated At : 30 Apr 2026 5:42 PM
बहन के कंकाल को कंधे पर रखकर बैँक जाता आदिवासी व्यक्ति, फोटो एक्स
Odisha Skeleton Case: ओडिशा के इस चर्चित मामले में बैंक की बड़ी लापरवाही सामने आई है. जांच में पाया गया कि बैंक की संवेदनहीनता के कारण एक आदिवासी व्यक्ति को न केवल मानसिक रूप से परेशान होना पड़ा, बल्कि उसे अपनी मृत बहन के कंकाल को कंधे पर लादकर बैंक तक पहुंचना पड़ा.
Odisha Skeleton Case: सरकार की प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि बैंक कर्मचारियों ने आदिवासी व्यक्ति के साथ बिल्कुल भी सहयोग नहीं किया. सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने उत्तरी मंडल के राजस्व संभागीय आयुक्त (RDC) को इस पूरी घटना की जांच के निर्देश दिए थे.
जिम्मेदार अधिकारियों पर होगी कड़ी कार्रवाई
जांच के सिलसिले में गुरुवार को उत्तरी मंडल के राजस्व संभागीय आयुक्त संग्राम केशरी महापात्रा, क्योंझर जिलाधिकारी विशाल सिंह और अन्य अधिकारी ओडिशा ग्रामीण बैंक की मालीपोसी शाखा पहुंचे. अधिकारियों ने सीसीटीवी फुटेज खंगाले और बैंक कर्मचारियों से पूछताछ की. महापात्रा ने कहा, प्रारंभिक जांच से स्पष्ट है कि बैंक की ओर से बड़ी चूक हुई है. इस अमानवीय घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.
जीतू मुंडा को मिली आर्थिक सहायता
प्रशासनिक दखल के बाद जीतू मुंडा को उनकी दिवंगत बहन के खाते से 20 हजार रुपये मिल गए. इसके अतिरिक्त, ओडिशा सरकार ने उन्हें 30,000 रुपये की आर्थिक सहायता भी प्रदान की है.
बैंक मैनेजर से दो बार मिल चुका था जीतू मुंडा, जांच में कई खुलासे
जांच रिपोर्ट के अनुसार, जीतू मुंडा और उनकी बहन पहले भी कई बार बैंक से पैसे निकाल चुके थे. जीतू पूरी तरह अनपढ़ नहीं हैं, लेकिन उन्हें बैंकिंग की जटिल प्रक्रियाओं का ज्ञान नहीं था. सीसीटीवी फुटेज से पता चला कि वह सुबह 11:26 से 11:58 तक बैंक में थे और इस दौरान उन्होंने दो बार मैनेजर से बात की, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ और वे निराश होकर लौट गए.
क्या था मामला?
सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक विचलित करने वाले वीडियो में 50 वर्षीय जीतू मुंडा अपनी मृत बहन के कंकाल को कंधे पर रखकर बैंक पहुंचे थे. वे अपनी बहन के खाते से 20,000 रुपये निकालने गए थे. बैंक कर्मियों ने नियम का हवाला देते हुए खाताधारक को उपस्थित करने की शर्त रखी. जीतू ने बार-बार कहा कि उनकी बहन की मृत्यु हो चुकी है, लेकिन कर्मचारी नहीं माने. अंततः मजबूर होकर जीतू श्मशान पहुंचे, कब्र खोदकर बहन का कंकाल निकाला और 3 किलोमीटर पैदल चलकर बैंक पहुंच गए. बैंक के भीतर कंकाल देखते ही वहां हड़कंप मच गया.
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By ArbindKumar Mishra
अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.
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