Corona संक्रमित रोगियों के लिए 68 ट्रेन में 680 आइसोलेशन कोच बना रहा नॉदर्न रेलवे और नॉदर्न सेंट्रल रेलवे

Author : KumarVishwat Sen Published by : Prabhat Khabar Updated At : 03 Apr 2020 4:33 PM

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कोरोना वायरस संक्रमित रोगियों को रखने के लिए उत्तर रेलवे और उत्तर मध्य रेलवे 68 ट्रेनों में 680 पृथक कोच बना रहा है, जहां एक साथ 10,000 से अधिक कोरोना संक्रमित रोगियों को रखा जा सकेगा.

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लखनऊ : कोरोना वायरस संक्रमित रोगियों को रखने के लिए उत्तर रेलवे और उत्तर मध्य रेलवे 68 ट्रेनों में 680 पृथक कोच बना रहा है, जहां एक साथ 10,000 से अधिक कोरोना संक्रमित रोगियों को रखा जा सकेगा. प्रत्येक ट्रेन में 10 आइसोलेशन कोच होंगे. प्रत्येक कोच में आठ केबिन होंगे और हर केबिन में दो-दो रोगियों को पृथक रखने की व्यवस्था होगी. इस तरह इन 680 कोच में करीब 10,880 कोरोना संक्रमित मरीज रखे जा सकेंगे.

इन विशेष ट्रेनों के लिए स्पेशल कोच को बनाने का काम शुरू हो गया है और एक हफ्ते के अंदर यह विशेष डिब्बे तैयार हो जाएंगे. इन विशेष डिब्बों में उन रोगियों को रखने की व्यवस्था होगी, जो कोरोना संक्रमित होंगे, लेकिन उनके पास घर या अस्पताल में क्वारंटीन करने की जगह नहीं होगी. इन डिब्बों में रोगियों की देखभाल के लिए डाक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की टीमें तैनात रहेंगी. यह विशेष ट्रेनें उन स्थानों पर प्लेटफॉर्म पर पहुंचेंगी, जहां कोरोना वायरस संक्रमित रोगियों की संख्या अधिक होगी.

सूत्रों के अनुसार, रेलवे विभाग ने सभी रेलवे मंडलों को निर्देश दिये है कि समूचे देश में ऐसे 5,000 विशेष कोच बनाये जाएं, ताकि किसी आपात स्थिति में अगर अस्पतालों में जगह न बचे, तो दूर-दराज के इलाकों में इन ट्रेनों के डिब्बों को आइसोलेशन वार्ड बनाकर वहां रोगियों को इनमें रखा जा सके. उत्तर रेलवे (एनआर) और उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) के महाप्रबंधक राजीव चौधरी ने शुक्रवार को विशेष बातचीत में बताया कि कोरोना संक्रमण से निपटने के लिए उत्तर रेलवे और उत्तर मध्य रेलवे ने व्यापक स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं.

उन्होंने कहा कि उत्तर रेलवे में 39 ट्रेनों में 390 ऐसे स्पेशल कोच बनाये जा रहे हैं. हर ट्रेन में ऐसे केवल 10 डिब्बे होंगे. हर डिब्बों में आठ केबिन होंगे और प्रत्येक केबिन में दो-दो कोरोना संक्रमित रोगी रखे जाएंगे. उन्होंने बताया कि इसी तरह उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) की 29 ट्रेनों में 290 स्पेशल आइसोलेशन कोच बनाए जा रहे हैं. इन डिब्बो में भी आठ-आठ केबिन होंगे और प्रत्येक केबिन में दो-दो रोगी रखे जा सकेंगे. इस तरह एक डिब्बे में 16 कोरोना पीड़ित रखे जा सकेंगे.

चौधरी ने बताया कि इन सभी कोच में रखे जाने वाले रोगियों की जांच के लिए रेलवे के डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की टीमें तैनात रहेंगी, जो नियमित तौर पर रोगियों का परीक्षण करेंगी. इसके साथ ही, रोगियों की साफ-सफाई और खाने पीने की व्यवस्था भी रेलवे द्वारा की जाएगी. उन्होंने एक बात साफ की है कि इन कोच में केवल उन्हीं कोरोना संक्रमण रोगियों को रखा जाएगा, जिनमें संक्रमण तो है, लेकिन उनको सांस लेने में कोई दिक्कत नही है. अगर सांस लेने में किसी भी रोगी को कोई दिक्कत होगी, तो उसे तुरंत किसी बड़े अस्पताल में भेज दिया जाएगा.

उत्तर मध्य रेलवे ने आइसोलेशन कोच के रूप में परिवर्तित करने के लिए कोचों में संशोधन कार्य शुरू कर दिया है. रेलवे बोर्ड ने उत्तर मध्य रेलवे को 290 कोच रूपांतरण का लक्ष्य दिया है और इसे 14 अप्रैल तक पूरा करने को कहा गया है. महाप्रबंधक एनसीआर ने बताया कि उत्तर मध्य रेलवे में प्रयाग कोचिंग डिपो प्रयागराज, कोचिंग डिपो कानपुर, आगरा कोचिंग डिपो आगरा, झांसी कोचिंग डिपो झांसी तथा झांसी कारखाना कोच मिडलाइफ रिहैबिलिटेशन वर्कशॉप झांसी में इन स्पेशल आइसोलेशन कोच के रूपांतरण का काम हो रहा है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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