'निजामुद्दीन में हुई धार्मिक सभा कट्टरपंथियों के अहम को दर्शाती है', शिवसेना ने की कड़ी आलोचना
Author : Amitabh Kumar Published by : Prabhat Khabar Updated At : 03 Apr 2020 1:30 PM
nizamuddin markaz: निजामुद्दीन में हुई धार्मिक सभा कट्टरपंथियों के अहम को दर्शाती है. यह कहना शिवसेना का है जिसने इस सभा की कड़ी आलोचना की है.
nizamuddin markaz: शिवसेना ने कोरोना वायरस वैश्विक महामारी फैलने के बीच दिल्ली के निजामुद्दीन में धार्मिक सभा आयोजित किये जाने को ‘‘अमानवीय” कृत्य बताया और इसके आयोजकों की कड़ी निंदा की. राष्ट्रीय राजधानी के निजामुद्दीन में तबलीगी जमात के मुख्यालय में विदेशों और देशभर के राज्यों से आये लोगों ने शिरकत की थी और यह देश में कोविड-19 फैलने का मुख्य स्रोत बन गया है.
शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में छपे संपादकीय में कहा कि इन लोगों ने इस्लाम के नाम पर इस प्रकार की सभा करके कौन सी धार्मिक और राष्ट्रीय सेवा की है? दरअसल यह अमानवीय और हानिकारक है. इसमें कहा गया है, ‘‘इस्लामी देशों में मस्जिदें बंद कर दी गयी हैं और लोगों को घरों में रहकर नमाज अदा करने को कहा गया है. मक्का और मदीना में भी बंद लागू है.
Also Read: Coronavirus : मस्जिद से हुआ अनाउंसमेंट और भीड़ ने आशा कार्यकर्ताओं पर कर दिया हमलासंपादकीय में कहा गया है कि इस समारोह ने देश में कोरोना वायरस को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं. इसमें कहा गया है कि इस कार्यक्रम में देशभर के 22 राज्यों और आठ अन्य देशों से पांच हजार से अधिक लोग शामिल हुए. इन 5,000 लोगों में से दो हजार विदेशी नागरिक थे.
मराठी समाचार पत्र ने कहा कि इन लोगों में से 380 संक्रमित पाये गये हैं. यह ऐसी लापरवाही है जिसे माफ नहीं किया जा सकता. यह कट्टरपंथियों के अहम को दर्शाती है. संपादकीय में कहा गया है कि दिल्ली पुलिस ने कहा कि उन्होंने आयोजकों से सभा रोकने को कहा था. दूसरी ओर, आयोजकों ने कहा है कि पुलिस और प्रशासन ने सभा में शामिल होने आए लोगों को बंद के दौरान बाहर जाने के लिए पास नहीं दिए. इसमें कहा गया है, ‘‘सच्चाई तो यही दोनों जानते हैं, लेकिन दिल्ली विधानसभा चुनाव के बाद पुलिस ने जिस प्रकार शाहीन बाग प्रदर्शन स्थल को खाली कराया, उसी प्रकार इस समारोह को भी बल प्रयोग से रोका जा सकता था.
संपादकीय में कहा गया है कि यह धर्म का नहीं, राष्ट्रीय स्वास्थ्य का मामला हैं. मुस्लिम समुदाय भी इस कदम की सराहना करता. बंद का उल्लंघन करना अन्य लोगों के जीवन से खेलना है. समाचार पत्र में कहा गया है कि यह मामला उन लोगों के लिए मुद्दा बन गया है जो हिंदू-मुसलमान की राजनीति करना चाहते हैं.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Amitabh Kumar
अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










