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Monsoon 2022: 20 मई के बाद कभी भी दस्तक दे सकता है मानसून, भीषण गर्मी से मिलेगी राहत

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने कहा है कि केरल (Kerala) में मानसून 20 मई के बाद कभी भी दस्तक दे सकता है. यानी इस बार मानसून तय समय से करीब 10 दिन पहले दस्तक दे देगा. आमतौर पर केरल में 1 जून के आसपास मानसून दस्तक देता है.

By Prabhat khabar Digital
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Monsoon 2022
Monsoon 2022
File Photo

नयी दिल्ली: भीषण गर्मी झेल रहे लोगों के लिए अच्छी खबर है. इस वर्ष मानसून (Monsoon 2022) समय से पहले दस्तक दे सकता है. जी हां. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने कहा है कि केरल (Kerala) में मानसून 20 मई के बाद कभी भी दस्तक दे सकता है. यानी इस बार मानसून तय समय से करीब 10 दिन पहले दस्तक दे देगा. आमतौर पर केरल में 1 जून के आसपास मानसून दस्तक देता है.

ERF की मदद से की गयी है भविष्यवाणी

IMD ने इस आशय के संकेत पुणे स्थित आईआईटीएम (Indian Institute Of Tropical Meteorology Pune) में विकसित मल्टी-मॉडल एक्सटेंडेड रेंज प्रेडिक्शन सिस्टम (MMERPS) का उपयोग करके अपने नवीनतम एक्सटेंडेड रेंज फोरकास्ट (ERF) की मदद से दी है.

20 मई के बाद कभी भी हो सकती है मानसून की शुरुआत

अंग्रेजी समाचार पत्र द टाइम्स ऑफ इंडिया ने IITM के एक विशेषज्ञ के हवाले से एक रिपोर्ट प्रकाशित की है, जिसमें कहा गया है कि केरल में मानसून की शुरुआत 20 मई के बाद कभी भी हो सकती है. रिपोर्ट के मुताबिक, 28 अप्रैल को जारी पिछले एक्सटेंडेड रेंज फोरकास्ट में भी 19-25 मई की अवधि में केरल में वर्षा की गतिविधियों में वृद्धि का अनुमान लगाया गया था.

समय से पहले होगी केरल में मानसून की शुरुआत

रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर ERF अगले सप्ताह भी ऐसी ही स्थिति दिखाता है, तो निश्चित तौर पर तटीय राज्य केरल में मानसून की शुरुआत समय से पहले होगी. भारत मौसम विज्ञान विभाग का नवीनतम ERF 5-11 मई (सप्ताह 1), 12-18 मई (सप्ताह 2), 19-25 मई (सप्ताह 3) और 26-जून 1 मई (सप्ताह 4) के लिए है.

बंगाल की खाड़ी में बनने जा रहा चक्रवाती तूफान

IITM के विशेषज्ञ कह रहे हैं कि अभी के लिए, केरल में मानसून के जल्द आगमन के संकेत दिख रहे हैं. पूर्वी मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक चक्रवाती तूफान बनने जा रहा है. इससे अंडमान और निकोबार द्वीप समूह पर मानसून के प्रवाह को मजबूत करने में मदद मिल सकती है. कहा गया है कि तीसरे सप्ताह के आसपास मानसून के प्रवाह में बाधा की संभावना नहीं है, क्योंकि तब तक यह अपना प्रभाव खो चुका होगा.

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