Maharashtra Crisis: विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर के फैसले का लोकसभा चुनाव पर क्या पड़ेगा असर ? जानें

Published by : Amitabh Kumar Updated At : 11 Jan 2024 10:36 AM

विज्ञापन

Satara: Maharashtra Chief Minister Eknath Shinde, State Minister Chhagan Bhujbal and others after paying tribute to social reformer Savitribai Phule, at Naigaon in Satara, Wednesday, Jan. 3, 2024. (PTI Photo)(PTI01_03_2024_000199B)

Maharashtra Political Crisis: विधानसभा अध्यक्ष नार्वेकर ने दावा किया कि संविधान, कानून और चुनाव आयोग के फैसले को ध्यान में रखते हुए ये फैसला लिया गया है. इसके साथ ही उद्धव गुट की उस मांग को खारिज कर दिया जिसमें यह मांग की गयी थी कि शिंदे के साथ पार्टी छोड़कर गये 16 विधायकों को अयोग्य घोषित किया जाए.

विज्ञापन

Maharashtra Political Crisis: महाराष्ट्र की राजनीति में बुधवार को ऐसा कुछ हुआ जिसकी वजह से माहौल गर्म है. दरअसल, विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने पिछले काफी दिनों से चर्चा का विषय बने शिंदे गुट के 16 विधायकों की अयोग्यता पर अपना फैसला सुनाया. फैसले में नार्वेकर ने शिंदे गुट को ही असली शिवसेना करार दिया. उन्होंने कहा कि एकनाथ शिंदे और उनके गुट के विधायकों की सदस्यता रद्द नहीं की गयी है और एकनाथ शिंदे ही महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने रहेंगे. इस फैसले का क्या मतलब क्या है ? आइए जानते हैं…

एकनाथ शिंदे का मिली नई ऊर्जा

मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के पद पर काबिज रहेंगे. उन्हें उद्धव ठाकरे के साथ अपनी राजनीतिक लड़ाई के लिए एक नई उर्जा मिल गई है, ऐसा इसलिए क्योंकि शिवसेना पर उनके दावे पर अब विधानसभा अध्यक्ष की मुहर लग गई है. अब इस बात पर सबकी नजर रहेगी कि अयोग्यता के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट क्या फैसला करता है ? क्योंकि उद्धव ठाकरे गुट नार्वेकर के फैसले को शीर्ष अदालत में चुनौती देने जा रहा है.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर रहेगी नजर

एकनाथ शिंदे महाराष्ट्र में लोकसभा चुनाव का नेतृत्व करते नजर आ सकते हैं, यदि सुप्रीम कोर्ट का फैसला तब तक नहीं आया या उनके पक्ष में आया. यदि वह सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई जीत जाते हैं, तो इस साल के अंत में राज्य विधानसभा चुनावों में भी गठबंधन का नेतृत्व करते वे दिख सकते हैं. यदि गठबंधन विधानसभा चुनाव जीतता है तो शिंदे के पास मुख्यमंत्री के रूप में वापसी का भी अच्छा अवसर होगा. कोर्ट की लड़ाई हारने का मतलब होगा कि शिंदे को मुख्यमंत्री पद छोड़ना होगा, साथ ही विधानसभा चुनाव में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले प्रतिद्वंद्वी गुट का सामना करना होगा.

Also Read: ‘BJP से हाथ मिलाना चाहते थे उद्धव ठाकरे’, NCP नेता का बड़ा दावा- PM Modi से मुलाकात के बाद बदला था मन

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट शिंदे को शिव सेना पार्टी और चुनाव चिह्न देने के चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती देने वाली ठाकरे गुट की याचिका पर भी सुनवाई कर रहा है. इस याचिका के नतीजे का असर उनके और ठाकरे के बीच चुनावी लड़ाई पर भी पड़ेगा. इस बीच खबर है कि नार्वेकर के आदेश को उद्धव ठाकरे ने लोकतंत्र की हत्या करार दिया है. साथ ही कहा कि उनकी पार्टी इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जायेगी.

Also Read: ‘वही होता है जो मंजूर-ए-मोदी और शाह होता है’, स्पीकर के फैसले पर गरमाई महाराष्ट्र की राजनीति

उद्धव ठाकरे गुट कैसे उतरेगा लोकसभा चुनाव में?

उद्धव ठाकरे गुट के लिए, नार्वेकर का फैसला कोई आश्चर्य की बात नहीं है. अयोग्यता मुद्दे पर ठाकरे सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर भरोसा कर रहे हैं. यदि वह शीर्ष अदालत में कानूनी लड़ाई जीत जाते हैं, तो इससे उन्हें पार्टी को नये सिरे से गढ़ने में मदद मिलेगी. इस संभावना को देखते हुए कि शीर्ष अदालत का आदेश लोकसभा चुनाव के बाद आ सकता है, ठाकरे गुट के नेता नार्वेकर के फैसले को भुना सकते हैं और जनता की सहानुभूति लेने का प्रयास का सकते हैं. चुनावी मैदान में उद्धव ठाकरे जनता को यह अहसास दिलाने का प्रयास कर सकते हैं कि बीजेपी के इशारे पर बालासाहेब की पार्टी को चुराने का काम किया गया है. यदि संसदीय चुनावों के लिए नामांकन प्रक्रिया समाप्त होने से पहले चुनाव आयोग के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला नहीं आता है तो ठाकरे को पार्टी के नाम और प्रतीक के बिना लोकसभा चुनाव लड़ना पड़ सकता है.

विज्ञापन
Amitabh Kumar

लेखक के बारे में

By Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola