Mahakumbh 2025 Video : 'रुद्राक्ष वाले बाबा' की जय, 1.25 लाख 'रुद्राक्ष' की प्रतिज्ञा के साथ पहुंचे महाकुंभ
Published by : Amitabh Kumar Updated At : 16 Dec 2024 9:58 AM
'रुद्राक्ष वाले बाबा'
Mahakumbh 2025 Video : महाकुंभ मेला 2025 में 'रुद्राक्ष वाले बाबा' पहुंचे हैं. जानें वह किस वजह से चर्चा में रहते हैं. देखें वीडियो
Mahakumbh 2025 Video : उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में महाकुंभ मेला 2025 को लेकर तैयारी जारी है. यहां पहुंचे ‘रुद्राक्ष वाले बाबा’ गीतानंद गिरि चर्चा का केंद्र बने हुए हैं. उन्होंने न्यूज एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए कहा,” यह मेरी 12 वर्षों की तपस्या है. ‘रुद्राक्ष’ भगवान शिव को प्रिय है. मैंने इलाहाबाद अर्ध कुंभ मेले से इसकी शुरुआत की थी. इसका समापन आगामी अर्ध कुंभ मेले में होगा. अभी 6 वर्ष और शेष हैं. मैंने तब से इसकी शुरुआत की थी जब इसका वजन 11 किलो था. आज इसका वजन 45 किलो हो चुका है. मैंने 1.25 लाख ‘रुद्राक्ष’ की प्रतिज्ञा ली थी- जो 925 मालाओं में आते हैं. मेरी ‘तपस्या’ राष्ट्र और सनातन के हित में है.” देखें वीडियो
महाकुंभ 2025 क्यों खास है?
2025 का महाकुंभ प्रयागराज में आयोजित किया जा रहा है. यह केवल एक धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि लाखों श्रद्धालुओं के लिए यह आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और खगोलीय महत्व रखता है. इस आयोजन में शामिल होकर भक्त न केवल अपने पापों को धोते हैं, बल्कि मोक्ष की ओर अग्रसर होने की कल्पना करते हैं.
महाकुंभ मेला कितने दिनों में लगता है?
महाकुंभ मेला हर 144 साल में लगता है. इसका स्थान सिर्फ प्रयागराज होता है. 12 पूर्णकुंभों के बाद आयोजित यह मेला एक ऐतिहासिक और दुर्लभ धार्मिक आयोजन होता है. इसमें लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं. इसे सबसे भव्य धार्मिक पर्व हिंदू धर्म के लोग मानते हैं.
कुंभ मेला कितने दिनों में लगता है?
कुंभ मेला हर 12 साल में लगता है. इसका स्थान चारों पवित्र स्थल (हरिद्वार, प्रयागराज, उज्जैन और नासिक) होता है. खगोलीय स्थिति की बात करें तो जब सूर्य, चंद्रमा और गुरु (बृहस्पति) विशेष खगोलीय स्थिति में होते हैं तो इसका आयोजन किया जाता है. इस समय इन स्थानों की नदियों (गंगा, क्षिप्रा, गोदावरी और संगम) का जल बेहद पवित्र माना जाता है.
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By Amitabh Kumar
अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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