Magh Mela 2026: माघ मेले के इतिहास में पहली बार जारी हुआ प्रतीक चिन्ह, मुख्यमंत्री योगी ने किया अनावरण
Published by : ArbindKumar Mishra Updated At : 13 Dec 2025 6:12 PM
माघ मेला का लोगो
Magh Mela 2026: उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रयागराज महाकुंभ-2025 के बाद एक और ऐतिहासिक कदम उठाते हुए माघ मेला-2026 का पहला आधिकारिक प्रतीक चिन्ह (लोगो) जारी किया. माघ मेले के लंबे इतिहास में पहली बार इसका अधिकृत प्रतीक चिन्ह जारी किया गया है, जिसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वीकृत कर प्रदेश के सामने प्रस्तुत किया.
Magh Mela 2026: माघ मेला-2026 का पहला आधिकारिक प्रतीक चिन्ह न केवल माघ मेला की आध्यात्मिक परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है, बल्कि संगम, तप, अनुष्ठान और कल्पवास की सनातन धारा को भी नए रूप में परिभाषित करता है. माघ मास की आध्यात्मिकता और ज्योतिषीय तत्वों का अनूठा संगम जारी किए गए लोगो में माघ मास में किए जाने वाले तप, जप, साधना और कल्पवास की परंपरा को केंद्र में रखा गया है.
लोगो में महत्वपूर्ण प्रतीक हैं शामिल
अक्षयवट: अक्षय पुण्य और सनातन परंपरा का साक्षी.
सूर्य और चंद्र देव: 27 नक्षत्रों के साथ ब्रह्मांडीय गति का संकेत, जो माघ मेले के आयोजन काल को निर्धारित करते हैं.
संगम तट: तीन पवित्र नदियों के संगम का पवित्र दर्शन.
साइबेरियन पक्षियों का आगमन: पर्यावरण, प्रकृति और संगम की विशिष्टता का एहसास.
बड़े हनुमान जी: प्रयागराज की पहचान और आस्था का केंद्र.
सनातन पताका: सनातन संस्कृति के विस्तार और पवित्रता का संदेश.
लोगो पर अंकित श्लोक माघे निमज्जनं यत्र पापं परिहरेत् तत: माघ मास के स्नान और पवित्रता की घोषणा करता है.
ज्योतिषीय संरचना और माघ मास का वैज्ञानिक आधार
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार लोगो में सूर्य और चंद्रमा की 14 कलाओं और 27 नक्षत्रों का समावेश माघ मास की गहन ज्योतिषीय संरचना को दर्शाता है.
सूर्य के मकर राशि में प्रवेश और
पूर्णिमा के दिन चंद्रमा का माघी, अश्लेषा या पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्रों के समीप होना माघ मास के निर्धारण का आधार है.
माघ मेला इन्हीं नक्षत्रीय गतियों, चंद्र कलाओं और ऊर्जात्मक परिवर्तनों के सूक्ष्म संयोजन पर आधारित होता है. अमावस्या से पूर्णिमा की ओर चंद्रमा की बढ़ती कलाएं साधना, तप और आध्यात्मिक उन्नति के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी जाती हैं. इसी कारण माघ मास को ऊर्जा, शुद्धि और आध्यात्मिक जागरण का महीना कहा गया है.
सरकार की तैयारी: मेला क्षेत्र में प्रतीक चिन्ह को विशेष स्थान
प्रशासन मेला क्षेत्र में इस नए लोगो को विशेष रूप से स्थापित करने की तैयारी कर रहा है.
गेट, कुंभ मार्ग, घाटों, टेंट सिटी, पंटून पुल और प्रमुख थीम क्षेत्रों में लोगो को प्रदर्शित किया जाएगा.
2026 का माघ मेला इस बार नव्य स्वरूप में दिखेगा, जहां थीम-आधारित सज्जा और डिजिटल इंस्टॉलेशन भी शामिल होंगे.
डिजाइन टीम और प्रस्तुति
यह लोगो मेला प्राधिकरण द्वारा नियुक्त डिजाइन कंसल्टेंट अजय सक्सेना और प्रागल्भ अजय ने तैयार किया है.
लोगो का उद्देश्य माघ मेले को एक आध्यात्मिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक महोत्सव के रूप में विश्व पटल पर स्थापित करना है.
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अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.
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