Kuno Cheetah Death: मध्य प्रदेश के कूनो में एक और चीते की मौत, अबतक कुल 9 की गयी जान

Published by : ArbindKumar Mishra Updated At : 02 Aug 2023 7:20 PM

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कूनो राष्ट्रीय उद्यान में पिछले 4 महीने में अबतक कुल 9 चीतों की मौत हो चुकी है. जिसमें छह चीते और तीन शावक शामिल हैं. 14 चीते जिन में से सात नर, छह मादा और एक मादा शावक को कुनो में बाड़े में रखा गया है और एक मादा बाहर है.

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मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीते की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. ताजा खबर है कि वहां एक और चीते की मौत हो गई है. मध्य प्रदेश वन विभाग ने बुधवार को जारी एक बयान में यह जानकारी दी. हालांकि मौत की वजह के बारे में अभी कोई जानकारी नहीं दी गयी है.

मादा चीतों में से एक धात्री (तिब्लिसी) मृत पाई गई

वन विभाग ने अपने बयान में बताया गया कि आज सुबह मादा चीतों में से एक धात्री (तिब्लिसी) मृत पाई गई. मौत का कारण पता करने के लिए पोस्टमार्टम किया जा रहा है.

नामीबिया से लाई गई मादा चीते की मौत

जिस मादा चीते की मौम हुई है, उसे नामीबिया से लाया गया था. एमपी मुख्य वन्यजीव वार्डन असीम श्रीवास्तव ने कहा, केएनपी के बोमा में रखे गए सभी 14 चीते (07 नर, 06 मादा और 01 मादा शावक) स्वस्थ हैं, और कुनो वन्यजीव पशु चिकित्सकों और नामीबिया के विशेषज्ञों की टीम द्वारा उनके स्वास्थ्य की नियमित निगरानी की जा रही है.

अबतक 9 चीतों की गयी जान

कूनो राष्ट्रीय उद्यान में पिछले 4 महीने में अबतक कुल 9 चीतों की मौत हो चुकी है. जिसमें छह चीते और तीन शावक शामिल हैं. 14 चीते जिन में से सात नर, छह मादा और एक मादा शावक को कुनो में बाड़े में रखा गया है और एक मादा बाहर है. नामीबियाई चीता ‘ज्वाला’ के चार शावक पैदा हुए, लेकिन उनमें से तीन की मई में मौत हो गई थी. ग्यारह जुलाई को एक नर चीता ‘तेजस’ मृत पाया गया था जबकि 14 जुलाई को एक और नर चीता ‘सूरज’ मृत पाया गया था. इससे पहले, नामीबियाई चीतों में से एक ‘साशा’ की 27 मार्च को किडनी से संबंधित बीमारी के कारण मौत हो गई थी, जबकि दक्षिण अफ्रीका के एक अन्य चीते ‘उदय’ की 13 अप्रैल को मौत हो गई थी. दक्षिण अफ्रीका से लाये गये चीते ‘दक्ष’ की नौ मई को मौत हो गई थी. इस चीता परियोजना से जुड़े विशेषज्ञों ने बताया था कि भारी बारिश, अत्यधिक गर्मी और नमी के कारण समस्याएं हो सकती हैं, और चीतों की गर्दन के चारों ओर लगे कॉलर संभावित रूप से और समस्याएं पैदा कर रहे हैं.

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कूनो नेशनल पार्क में चीतों की संख्या घटकर 15 रह गई

प्रोजेक्ट चीता के तहत, कुल 20 चीतों को दो दलों में नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से केएनपी में लाया गया था. पहला दल नामीबिया पिछले साल सितंबर में और दूसरा दल इस वर्ष फरवरी में आया. चार शावकों के जन्म के बाद चीतों की कुल संख्या 24 हो गई थी लेकिन नौ मौतों के बाद यह संख्या घटकर अब 15 रह गई है. चीता परियोजना के तहत आठ नामीबियाई चीतों – पांच मादा और तीन नर – को पिछले साल 17 सितंबर को केएनपी के बाड़ों में छोड़ा गया था. फरवरी में दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीते केएनपी लाये गये थे.

चीतों पर रखी जा रही निगरानी

कूनो नेशनल पार्क में चीतों की लगातार हो रही मौत से वन विभाग के अधिकारी परेशान हैं. एक दल द्वारा चीतों की गहन निगरानी की जा रही है. उसे स्वास्थ्य परीक्षण के लिए बाड़े में वापस लाने के प्रयास जारी हैं. दक्षिण अफ्रीका के एक विशेषज्ञ पशुचिकित्सक ने घावों को साफ किया. सभी चीतों को ‘फ्लुरेलानेर’ दिया गया है. फ्लुरेलारेन एक कीटनाशक और एसारिसाइड है.

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कूनो में चीतों की लगातार हो रही मौत से अधिकारी चिंतित

कूनो नेशनल पार्क में चीतों की लगातार हो रही मौत से निगरानी पर सवाल उठाए जा रहे हैं. हाल के दिनों में चीतों की मौत के बाद वन्यजीव मुख्य वार्डन जसबीर सिंह चौहान को स्थानांतरित कर दिया गया था.

चीता परियोजना पर मंडराया खतरा

कूना नेशनल पार्क में चीतों की लगातार हो रही मौत से चीता परियोजना पर खतरा मंडराने लगा है. देश में चीता लगभग विलुप्त होते जा रहे हैं. 1952 के बाद से संख्या में लगातार गिरावट आती जा रही है. चीतों को फिर से बसाने के उद्देश्य से कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया और अफ्रीका से चीतों को लाया गया. लेकिन लगातार हो रही मौत से अधिकारी चिंता में पड़ गये हैं. साथ ही चीता परियोजना पर भी खतरा मंडराने लगा है. सुप्रीम कोर्ट ने 20 जुलाई को कहा था कि कूनो राष्ट्रीय उद्यान में एक साल से भी कम समय में आठ चीतों की मौत हो जाना एक सही तस्वीर पेश नहीं करता. इसने केंद्र से इसे प्रतिष्ठा का मुद्दा नहीं बनाने और इन वन्यजीवों को अन्य अभयारण्यों में भेजने की संभावना तलाशने को कहा था.

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लेखक के बारे में

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अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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